सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स के रवैये पर फूटा BJP विधायक का गुस्सा, धरने पर बैठने की दी धमकी
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सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स के रवैये पर फूटा BJP विधायक का गुस्सा, धरने पर बैठने की दी धमकी
भाजपा विधायक को आय़ा डॉक्टरों पर गुस्सा

भाजपा विधायक कृष्ण मिड्ढा के संज्ञान में मामला आया तो वो भी नागरिक अस्पताल के प्रशासन के सामने पस्त नजर आए.

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जींद. नागरिक अस्पताल (Civil Hospital) में 11 महीने के बच्चे के शव के पोस्टमार्टम (Postmortem) को लेकर जींद के स्थानीय विधायक डॉ कृष्ण मिड्ढा का गुस्सा डॉक्टरों (Doctors) पर आखिरकार फूट पड़ा. विधायक कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि यहां के डॉक्टर विधायक की भी  नहीं सुन रहे तो आम जनता का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है.

बता दें कि यहां के निवासी एक परिवार के 11 महीने के बच्चे का रोहतक के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था. लेकिन वहां से मृत अवस्था में बच्चे को रेफर करने के बाद जींद अस्पताल में लाया गया. तो सोमवार की पूरी रात बच्चे के जिंदा होने या मृत होने के ऊपर नागरिक हस्पताल संशय से बनाए रखने के बाद जब परिजनों ने कहा कि उनका बच्चा अगर मर चुका है तो उनको उसका शव सौंप दिया जाए. लेकिन सामान्य अस्पताल में डॉक्टर बच्चे के शव का पोस्टमार्टम करने पर अड़ गए.

डॉक्टरों ने विधायक की भी नहीं सुनी



वहीं पर परिवार के लोगों ने इसकी सूचना जींद के विधायक डॉक्टर कृष्ण मिड्ढा को दे दी. मिड्ढा के संज्ञान में मामला आया तो वो भी नागरिक अस्पताल के प्रशासन के सामने पस्त नजर आए. उन्होंने कहा कि वो इस मामले को स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक और मुख्यमंत्री तक लेकर जाएंगे कि जींद के अस्पताल के डॉक्टरों का रवैया विधायक के प्रति ठीक नहीं है तो मरीजों के प्रति कैसे ठीक होगा. जहां पूरी सोमवार की रात सामान्य अस्पताल प्रशासन शव का पोस्टमार्टम करने पर अड़ा रहा तो मंगलवार की सुबह  परिजनों और विधायक का दबाव बनते देख डॉक्टरों ने बगैर शव का पोस्टमार्टम किये बिना परिजनों को बच्चे का शव सौंप दिया.
डॉक्टर ने कही ये बात

वहीं सामान्य अस्पताल के डॉक्टर गोपाल सिंह ने कुछ नियमों का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा रुक्का निरस्त करने के बाद ही शव का पोस्टमार्टम नहीं करने का फैसला लिया है. इस पूरे मामले में मृतक बच्चे के परिजनों ने कहा कि उनको कहीं ना कहीं उम्मीद थी कि शायद उनका बच्चा अभी भी जिंदा है. लेकिन जिस उम्मीद को लेकर वह सिविल अस्पताल में आए थे यहां के डॉक्टरों के रवैया ने उनको बुरी तरह से तोड़ दिया गया और पूरी रात उनको बुरी तरह से तड़पाया भी है कि बच्चे का शव देने से बार-बार इनकार करते रहे.

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