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खाप के फैसले के बाद किसानों ने नहीं दिया सरकारी डेयरियों पर दूध, खाली लौटी गाड़ियां

खापों की महापंचायत में किए गए ऐलान के बाद किसान आंदोलन के समर्थन में दुग्ध किसानों भी उतर आए हैं-फाइल फोटो

खापों की महापंचायत में किए गए ऐलान के बाद किसान आंदोलन के समर्थन में दुग्ध किसानों भी उतर आए हैं-फाइल फोटो

खापों की महापंचायत में किए गए ऐलान के बाद किसान आंदोलन के समर्थन में दुग्ध किसानों ने सरकारी डेयरियों पर दूध नहीं दिया. किसानों ने दूध के दाम 100 रुपए लीटर तय कर दिए हैं. इस दर पर सरकारी डेयरियों द्वारा खरीद नहीं कर पाने पर उनकी गाड़ियां वापस खाली लौट गईं.

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जींद. एक दिन पूर्व खापों (Khap) की महापंचायत (Mahapanchayat) में किए गए ऐलान के बाद किसान आंदोलन के समर्थन में दुग्ध किसानों ने सरकारी डेयरियों पर दूध (Milk) नहीं दिया. किसानों ने दूध के दाम 100 रुपए लीटर तय कर दिए हैं. इस दर पर सरकारी डेयरियों द्वारा खरीद नहीं कर पाने पर उनकी गाड़ियां वापस खाली लौट गईं. सरकार की डेयरी को एक बूंद भी दूध कि नहीं दी. किसानों के इस कदम के बाद सभी मिल्क प्लांट में दूध की किल्लत होने के आसार बन गए हैं.

केन्द्र सरकार के खिलाफ चल रहे कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान किया था. यह ऐलान खाप महापंचायत में किया गया. सतरोल खाप ने नारनौंद में एक पंचायत करके यह ऐलान किया था कि 1 मार्च से कोई भी किसान सरकारी एजेंसियों को दूध नहीं देगा और अगर कोई देगा तो 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से ही देगा. जो भी किसान इस निर्णय का उल्लंघन करेगा उस पर 11 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा. एक मार्च को इसका असर साफ देखने को मिला. गांव में सरकारी दूध की जो भी डेयरीं थीं वहां एक भी किसान उनमें दूध देने के लिए नहीं पहुंचा. प्लांट की तरफ से जो गाड़ियां भेजी गईं थीं वह बगैर दूध लिए खाली लौट गईं.बताया गया है कि गांव राजथल, भैणी अमीरपुर, सुलचानी इत्यादि अनेक गांव में सरकार का उपक्रम वीटा प्लांट द्वारा मिल्क सोसायटी बनाई हुई है और प्लांट इन सोसायटियों के माध्यम से हजारों लीटर दूध की खरीद करता था. इन पर कोई सभी किसान दूध देने  नहीं  पहुंचा.

किसानों ने कहा कि उन्होंने डेयरी पर दूध देना बंद कर दिया है. वह घरों में लोगों को दूध दे रहे हैं. इसके साथ ही वह दूध बचने पर जरूरतमंदों को बांट रहे हैं. जब तक सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करेगी तब तक वह सरकारी एजेंसियों को दूध किसी भी कीमत पर नहीं देंगे. बताया गया है कि काफी किसान इन सोसायटीयों में दूध बेचकर ही अपने घर का खर्च चला रहे थे, लेकिन खाप के निर्णय को मानते हुए वह इन डेयरी में दूध नहीं देंगे.
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