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187 दिन से धरने पर बैठे दलित समाज के सैकड़ों लोगों ने किया धर्म परिवर्तन

Vijender Kumar | News18 Haryana
Updated: August 16, 2018, 11:03 AM IST
187 दिन से धरने पर बैठे दलित समाज के सैकड़ों लोगों ने किया धर्म परिवर्तन
धरने पर बैठे दलित समाज के लोग

खापड़ का कहना है कि अभी तक सरकार की तरफ से कोई संदेश उन्हें नहीं मिला है. ऐसे में धर्म परिवर्तन किया गया है.

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एक तरफ जहां पूरा देश आजादी की वर्षगांठ मना रहा है, वहीं दूसरी ओर जींद में उपायुक्त के आवास से चंद दूरी पर सैकड़ों दलितों ने बुधवार को धर्म परिवर्तन कर लिया. उन लोगों ने बौद्ध भिक्षुओं से दीक्षा लेकर सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन किया.

दलित नेता दिनेश खापड़ का कहना है कि विभिन्न मांगों को लेकर दलित समाज के लोग करीब 6 महीने से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही. खापड़ का कहना है कि वे सरकार से कोई नई मांग नहीं मांग रहे, बल्कि, वे उन्हें पूरा करने की मांग कर रहे हैं, जिनके बारे में सरकार पहले ही पूरा करने की घोषणा कर चुकी है.

उनका कहना है कि सरकार करीब 30 फीसदी छोटी-छोटी मांगों को तो मान चुकी है, लेकिन जो बड़ी-बड़ी मांगें हैं, वे अभी भी अधर में लटकी पड़ी हैं. प्रदेश में कई दलित परिवार की लड़कियों-महिलाओं के साथ हुए गैंगरेप मामलों में सीबीआई जांच कार्रवाई जानी बाकी है, उनके परिवारों को नौकरी दी जानी बाकी हैं, उनके परिवारों को सुरक्षा दी जानी बाकी हैं. कई दलित शहीदों के स्मारक बनाने, शहीदों के घरवालों को नौकरी देने की मांग बाकी है.

खापड़ का कहना है कि इन सब मांगों को लेकर कईं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जा चुका है लेकिन सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है. दो माह पहले भी जब सरकार ने मांगे नहीं मानीं तो 120 दलितों को मजबूर होकर दिल्ली के लद्दाख बुद्ध भवन में जाकर बौद्ध धर्म अपनाना पड़ा था. अब एक बार फिर दलित बौद्ध धर्म अपनाने पर मजबूर हैं.

खापड़ का कहना है कि सरकार को कई दिन पहले ही यह चेतावनी दे दी गई कि अगर 15 अगस्त से पहले पहले सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो एक हजार से ज्यादा दलित 15 अगस्त को आजादी के दिन हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने पर मजबूर होंगे. खापड़ का कहना है कि अभी तक सरकार की तरफ से कोई संदेश उन्हें नहीं मिला है. ऐसे में धर्म परिवर्तन किया गया है.

इस मामले पर प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि धर्म जीवन से बड़ा होता है और मांगों के लिए कभी भी धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि दलित समाज की क्या मांगें है, उनके संज्ञान में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मांगों के लिए धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहिए. क्योंकि मांगें तो बदलती रहती हैं.

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First published: August 15, 2018, 5:29 PM IST
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