ऑनलाइन ऑर्डर करने पर घर पर आ रही है अबॉर्शन क‍िट, कैसे बचेंगी गर्भ में बेट‍ियां?

एमटीपी ( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ) किट की बेरोकटोक रही ऑनलाइन डिलीवरी

एमटीपी ( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ) किट की बेरोकटोक रही ऑनलाइन डिलीवरी

Haryana News: कैथल जिला के डिस्ट्रिक पीएनडीटी नोडल ऑफिसर डॉ गौरव पूनिया द्वारा ग्राहक बनकर अमेजॉन साइट से ऑनलाइन मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी क‍िट मंगाने से इस मामले का खुलासा हुआ है.

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सरकार ने दवाइयों को ऑनलाइन माध्यम से बेचने की परमिशन देने के बाद बहुत सी दवाइयां जो मार्किट में बैन है वो भी धड़ल्ले से बेची जा रही हैं जो ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है. ऑनलाइन माध्यम से वो दवाइयां भी मिल जाती है जो आम मेडिकल शॉप पर नहीं बेच सकते. ऐसा ही एक मामला कैथल में सामने आया है और कैथल के पीएनडीटी नोडल अधिकारी ने ऑनलाइन माध्यम अमेज़ॉन समेत 4 लोगों पर केस दर्ज करवाया है.

बेटियां गर्भ में न मारी जाएं, इसको रोकने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब भी असफल साबित हो रहे हैं, जिसका कारण एमटीपी ( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ) किट की बेरोकटोक रही ऑनलाइन डिलीवरी है. इसका खुलासा कैथल जिला के डिस्ट्रिक पीएनडीटी नोडल ऑफिसर डॉ गौरव पूनिया द्वारा ग्राहक बनकर अमेजॉन साइट से ऑनलाइन मंगबाई दो एमटीपी किट से हुआ है. डॉ. गौरव पूनिया द्वारा ऑर्डर करने के 7 दिन बाद ही उड़ीसा से बिल व डिलीवरी चार्ज समेत 2 एमटीपी किट 897 रुपए में उनके घर पहुंच गई.

उन्होंने इसके बारे में सिविल सर्जन को अवगत कराया. डीसी समक्ष भी मामला संज्ञान में लाया गया. इस पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डिस्ट्रिक ड्रग कंट्रोल ऑफिसर मनदीप मान, डॉ ललित जांगड़ा ने डॉ गौरव पुनिया के घर में आई हुई गर्भपात किट को विडिओग्राफी करते हुए खोला. एमटीपी किट की ऑनलाइन सप्लाई करने पर इसे तैयार करने वाली कंपनी, इसको बेचने वाली फर्म , डिलीवरी देने वाली Amazon.in समेत 4 के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस दायर किया है.

ऐसे हुआ खुलासा
ओमप्रकाश के पास एमटीपी किट की ऑनलाइन डिलीवरी होने की पिछले दिनों शिकायतें आ रही थी. इस पर सिविल सर्जन ने डिस्ट्रिक पीएनडीटी नोडल ऑफिसर डॉ गौरव पूनिया को इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए. डॉ. पूनिया ने अमेजॉन की साइट पर जाकर 27 मार्च को 2 एमटीपी किट का ऑर्डर कर दिया. इसमें एक एमटीपी किट की कीमत 413 रुपए दी गई थी लेकिन छूट व हैंडलिंग चार्जिज लगाकर कुल 897 रुपए की दो किट दी गई. डिलीवरी मिलने के बाद सील बंद लिफाफे को खोला नहीं गया व डॉ . पूनिया ने इसके बारे में सिविल सर्जन को अवगत कराया कि दो एमटीपी के दिए गए ऑर्डर की डिलीवरी उनके पास पहुंच गई है.

सबसे बड़ा सवाल: इतनी आसानी से मिल रही एमटीपी किट तो कैसे रुकेंगे अवैध गर्भपात

एमटीपी किट ऑनलाइन व बड़ी आसानी से हो रही डिलीवरी पर सवाल उठ रहा है कि फिर स्वास्थ्य विभाग अवैध गर्भपात पर कैसे लगाम लगा पाएगा. अधिकतर अवैध गर्भपात के मामलों में सामने आया है कि गर्भ में भूण लिंग जांच में बेटी के होने बाद ही करवाया जाता है. बहुत ही कम ऐसे होता है जब महिला के सामने गर्भपात करवाने की विषम परिस्थितियां हो.



इस तरह का प्रदेश में ये पहला मामला

प्रतिबधित एमटीपी किट की इस तरह से ऑनलाइन डिलीवरी होने का प्रदेश में ये मामला है. इस पूरे मामले के साक्ष्य एकत्रित कर एमटीपी किट बनाने वाले कंपनी से लेकर डिलीवरी करने वाली अमेजॉन डॉट इन समेत 4 के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है.
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