हरियाणा: सरकार उठाने जा रही बड़ा कदम, कैथल में 21 तो प्रदेश में 1057 सरकारी स्कूलों को बंद करने की तैयारी

कैथल में 21 तो प्रदेश में 1057 स्कूलों को बंद करने की तैयारी.

कैथल में 21 तो प्रदेश में 1057 स्कूलों को बंद करने की तैयारी.

जिला कैथल में ऐसे 21 प्राइमरी स्कूल हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है. प्राथमिक शिक्षक इस फैसले के विरोध में दिख रहे हैं. लेकिन यहां कई विद्यालय ऐसे हैं जहो दो छात्रों पर दो शिक्षकों की तैनाती है. सरकार का यदि यह फैसला लागू हुआ तो इन स्कूलों में इसी सत्र से दाखिले बंद हो जाएंगे.

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कैथल. हरियाणा ( Haryana) में 25 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले राजकीय प्राइमरी स्कूलों ( Government Primary School ) को बंद करने का फैसला लिया गया है. इन स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले दूसरे राजकीय स्कूल में पढ़ाया जाएगा. जिला कैथल में ऐसे 21 प्राइमरी स्कूल हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है. प्राथमिक शिक्षक ( Primary Teachers) इस फैसले के विरोध में दिख रहे हैं. लेकिन यहां कई विद्यालय ऐसे हैं जहो दो छात्रों पर दो शिक्षकों की तैनाती है. सरकार का यदि यह फैसला लागू हुआ तो इन स्कूलों में इसी सत्र से दाखिले बंद हो जाएंगे और यहां तैनात शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा.

जानकारी के मुताबिक निर्धारित मापदंड के तहत सबसे कम संख्या वाले स्कूल में दो तो सबसे ज्यादा संख्या वाले स्कूल में 23 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं. जिला के 25 से कम संख्या वाले स्कूलों के एक किलोमीटर दायरे में कोई स्कूल भी नहीं है. ऐसे में अभिभावकों के सामने बच्चों को पढ़ाने की चिंता पैदा हो गई है. कम संख्या के कारण स्कूल बंद हुए तो अभिभावकों के पास बच्चे को स्कूल भेजने के लिए दूसरा विकल्प भी नहीं है. हालांकि अभी शिक्षा विभाग द्वारा रिपोर्ट तैयार की जा रही है. जो निदेशालय को भेजी जाएगी.

नहीं होंगे नए दाखिले

25 से कम संख्या वाले स्कूलों में नए सत्र से दाखिले नहीं होंगे. शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में नियुक्त किया जाएगा. स्कूल को मर्ज या बंद होने के बाद स्कूल भवन में प्ले स्कूल खोले जाएंगे या पंचायत को दिए जाएंगे. जिसे पंचायत अपने अनुसार प्रयोग करेगी. स्कूल के सामान को जरुरत अनुसार दूसरे स्कूलों में प्रयोग किया जाएगा. जिला के कम संख्या वाले स्कूलों के एक किलोमीटर दायरे में दूसरा स्कूल नहीं हैं. ऐसी स्थिति में निदेशालय से जवाब आने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
सरकार छीन रही मौलिक अधिकार

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिला प्रधान रोशनलाल पंवार ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों से उनका मौलिक अधिकारी छीनना चाहती है. शिक्षा के मौलिक अधिकार के तहत विद्यार्थियों को उनके घर के एक किलोमीटर दायरे में ही पहली से पांचवी की शिक्षा दी जानी अनिवार्य है. सरकार स्कूलों की स्थिति सुधारने की बजाय बंद करके अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहती है. प्राथमिक शिक्षक संघ इस निर्णय के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगा.

ये प्राइमरी स्कूल होंगे बंद



जो स्कूल बंद किए जाने की संभावना है उनमें राजकीय स्कूल डेरा फरल  यहां 2 बचों पर 2 टीचर हैं. इसी तरह राजकीय स्कूल मटकालियां मेंं 3 बचें पर 2 टीचर राजकीय स्कूल कालू की गामड़ी कैथल 4 पर 2, राजकीय स्कूल करतारपुर 5-2, राजकीय स्कूल रतनपुरा 6-2, राजकीय स्कूल जटहेड़ी 8-2, राजकीय स्कूल डेरा गोबिंदपुरा 9-2, राजकीय स्कूल शुगलपुर 9-2, राजकीय स्कूल बुबाकपुर 10-2, राजकीय स्कूल गुरदासपुरा 11-2, राजकीय स्कूल डेरा उत्तमसिंह 11-2, राजकीय स्कूल कसौर 13-2, राजकीय स्कूल डेरा दिल्लूराम 15-2, राजकीय स्कूल थेहबर्थ 15-2, राजकीय स्कूल सरकारपुर 16-2, राजकीय स्कूल थेह खरक 18-2, राजकीय स्कूल सिंहपुर खेड़ा 19-2, राजकीय स्कूल बुडनपुर 20-2, राजकीय स्कूल जोधांवा 22-2, राजकीय स्कूल भूना नंबर एक 23-2, राजकीय स्कूल डेरा सिधुआं 23 विद्यार्थियों पर 2 टीचर पढ़ा रहे हैं.

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि जिला में 25 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले 21 स्कूल हैं. इन सभी स्कूलों के एक किलोमीटर के दायरे में दूसरा स्कूल नहीं है. इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है. जो निदेशालय को भेजी जाएगी. निदेशालय से जो जवाब आएगा उसी अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे.

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