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विधानसभा चुनाव: हरियाणा की एक ऐसी सीट, जहां हमेशा रहा निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा

मोहित मल्होत्रा | News18 Haryana
Updated: October 10, 2019, 3:53 PM IST
विधानसभा चुनाव: हरियाणा की एक ऐसी सीट, जहां हमेशा रहा निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा
पूंडरी विधानसभा सीट पर रहता है निर्दलीय उम्मीदवारों का कब्जा

भले ही पूरे देश में या फिर हरियाणा राज्य में किसी भी पार्टी या चेहरे की लहर रही हो लेकिन पूंडरी विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने 1996 के बाद से तमाम राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों को नकारा है.

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कैथल. हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) में कई विधानसभा सीटों से जुड़ी ऐसी बातें हैं जो हरियाणा चुनाव को बेहद ही दिलचस्प बना देती हैं. ऐसी ही एक रोचक सीट है कैथल (Kaithal) जिले की पूंडरी (Pundri) विधानसभा सीट. ये सीट ऐसी सीट है जहां पर हमेशा ही निर्दलीय उम्मीदवारों  (Independent Candidates) का दबदबा रहा है. 1996 के बाद से तो इस विधानसभा सीट पर किसी भी राजनीतिक पार्टी का उम्मीदवार जीत ही नहीं सका. भले ही पूरे देश में या फिर हरियाणा राज्य में किसी भी पार्टी या चेहरे की लहर रही हो लेकिन पूंडरी विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने 1996 के बाद से तमाम राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों को नकारा है और सिर्फ निर्दलीय को ही अपना विधायक बना कर हरियाणा विधानसभा में भेजा है.

इस बार भी पुंडरी विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है. भले ही जीत का दावा कर रहे तमाम बड़ी राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में है लेकिन इसके बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव को बेहद ही दिलचस्प बनाए हुए हैं.

निर्दलीय प्रत्याशियों को पसंद करते हैं लोग

पूंडरी के मतदाता दलीय प्रत्याशी के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशी को किस कदर पसंद करते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1996 से लेकर अभी तक पूंडरी से सभी विधायक निर्दलीय ही बने हैं. पूंडरी में इस बार भी निर्दलीय उम्मीदवार सत्ता में बैठी बीजेपी और अन्य राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं और जीत का दावा कर रहे हैं.

टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरे

हालांकि इन निर्दलीय उम्मीदवारों में से कई चेहरे ऐसे हैं जो पहले बीजेपी के साथ जुड़े थे और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की लहर को मान रहे थे और टिकट भी चाहते थे. लेकिन जब बीजेपी ने इनको टिकट नहीं दिया तो ये निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर चुके हैं. लेकिन इनमें से कई चेहरे ऐसे हैं जो इस विधानसभा सीट पर बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं.

बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो लिया ये फैसला
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पूंडरी से सिटिंग एमएलए दिनेश कौशिक 2014 के चुनाव में निर्दलीय जीते थे लेकिन बाद में वो बीजेपी के साथ जुड़ गए थे और बीजेपी से टिकट की उम्मीद भी लगा रहे थे, लेकिन बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. जिसके बाद वो एक बार फिर से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं. रणधीर सिंह गोलन भी पहले बीजेपी के साथ जुड़े थे लेकिन उन्हें भी जब टिकट नहीं दिया गया तो वो भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में आ चुके हैं.

कैंची से कांटेगे बीजेपी के वोट

रणधीर गोलन के बेटे अमित ने कहा कि उनके पिता पिछले 30 साल से बीजेपी के लिए इलाके में काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें टिकट ना देकर किसी बाहरी व्यक्ति को टिकट दी गई और ऐसा करके बीजेपी ने उनके साथ धोखा किया है. इसी वजह से उनके पिता निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर गए हैं और उन्हें चुनाव चिन्ह भी कैंची मिला है और इस कैंची से वो बीजेपी के वोट काटेंगे और निर्दलीय ही इसी पर जीत कर दिखाएंगे.

'राजनीति पार्टियां अहंकारी'

कुछ ऐसा ही दावा हेलीकॉप्टर चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र शर्मा ने भी किया और उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियां अहंकार के कारण स्थानीय नेताओं को दरकिनार करके बाहरी और अंजान लोगों को टिकट दे देती हैं. इसी वजह से पूंडरी की जनता निर्दलीय उम्मीदवार को ही जिता कर आगे भेजती है और पूंडरी की जनता ऐसे ही उम्मीदवारों को पसंद करती है जो उनके बीच में से निकले हो.

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First published: October 10, 2019, 3:53 PM IST
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