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कैथल के सरकारी स्कूल में ई-व्याकरण से दिया जा रहा 'हिंदी' का ज्ञान
Kaithal News in Hindi

Virender Puri | News18 Haryana
Updated: January 20, 2020, 5:01 PM IST
कैथल के सरकारी स्कूल में ई-व्याकरण से दिया जा रहा 'हिंदी' का ज्ञान
हिंदी को इस तरीके से पढ़ा रहा ये अध्यापक

डॉ चावला की उपलब्धियों (Achievements) का आलम यह है कि आज 13 राज्यों में उनके द्वारा बनाई गई ई-व्याकरण (E-grammar) विभिन्न स्कूलों में अध्यापकों द्वारा पढ़ाई जा रही है.

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कैथल. ‘Innovations motivate the unmotivated’ इस कहावत को कैथल के क्योड़क विद्यालय में पढ़ाने वाले डॉ विजय चावला ने हिंदी (Hindi) को रुचिकर विषय (Subject) बना इसे सार्थक किया है. डॉ चावला शिक्षा विभाग में एक मील का पत्थर साबित हो रहे हैं. डॉ चावला ने हिंदी जैसी वैदिक भाषा में भी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ई-व्याकरण और खेल पिटारा जैसे माध्यम तैयार किये और उन बच्चों के लिए वरदान साबित हुए जो हिंदी विषय को कठिन व अरुचिकर मानते थे.

डॉ विजय चावला क्योड़क गाँव के सरकारी स्कूल में हिंदी के प्राध्यापक हैं और शिक्षा विभाग में आधुनिक शिक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं. उन्होंने छोटे बच्चों के लिए  शिक्षा के ऐसे-ऐसे तरीके इजाद कर दिए हैं जिससे बच्चों का मानसिक विकास तो हो ही रहा है. साथ ही उन्हें आधुनिक तरीके से हिंदी भाषा का ज्ञान भी प्राप्त हो रहा है.

डॉ चावला की उपलब्धियों का आलम यह है कि आज 13 राज्यों में उनके द्वारा बनाई गई ई-व्याकरण विभिन्न स्कूलों में अध्यापकों द्वारा पढ़ाई जा रही है. साथ ही उन्होंने खेल पिटारा जिसमें सांप सीढ़ी, लूडो व अन्य कई तरह के तरिके ईजाद कर छोटे बच्चों के लिए शिक्षा के आधुनिकीकरण के रास्ते खोल दिए हैं.

बच्चों को पढ़ाते हुए


डॉ चावला की बनाई इ-व्याकरण और खेले पिटारा आज के समय में हिंदी जैसी वैदिक भाषा को भी आधुनिक तरीके से बच्चों को खेल खेल में ज्ञान प्रदान करने में काफी मददगार साबित हो रही है और देश के 13 राज्यों के अध्यापकों द्वारा डॉ विजय चावला की ई-व्याकरण इतनी पसंद की गई कि उन्होंने इसके माध्यम से ही अब अपने-अपने स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देना शुरू कर दिया है.

डॉ विजय चावला पिछले दिनों ईआरटी अजमेर में राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में नवाचारी प्रयोगों की दी अपनी प्रस्तुति दे कर प्रशंसापत्र प्राप्त कर चुके हैं. डॉ  चावला को जहां प्रदेश में कई बार सम्मानित किया जा चुका है. वहीं उनके द्वारा  बनाए गए  ई व्याकरण और खेल पिटारा आदि को हरियाणा के कई आईएएस अधिकारी भी जो कि शिक्षा विभाग में कार्यरत रहे है. बड़ी दिलचस्पी लेकर कर देखा और समझा व इन उपलब्धियों को सराहा भी है.
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First published: January 20, 2020, 5:01 PM IST
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