औजार बने हथियार: हत्या की वारदातों में हो रहा कृषि यंत्रों का इस्तेमाल

वारदात करने से पहले इन्हें खरीदने के लिए न तो भागदौड़ की जरूरत है और ना ही किसी डॉक्यूमेंट की क्योकि हर शहरों में ही सडक़ पर इस तरह के हथियारों की मंडी सजी नजर आती है.

Virender Puri | News18 Haryana
Updated: June 17, 2019, 10:22 AM IST
औजार बने हथियार: हत्या की वारदातों में हो रहा कृषि यंत्रों का इस्तेमाल
हत्या की वारदातों में हो रहा इन यंत्रों का इस्तेमाल
Virender Puri
Virender Puri | News18 Haryana
Updated: June 17, 2019, 10:22 AM IST
सम्प्रदायिक झगड़ा हो या फिर शक्ति प्रदर्शन अक्सर चमचमाती गंडासी, दरांत, कुल्हाड़ी, खंजर, बरछे आदि जैसे दिखने वाले ये हथियार आज कल लोग सड़को पर लहराते है और ऐसा ही कुछ हरियाणा में हुए आंदोलनों में देखने को भी मिला. डेरा सच्चा सौदा के सभी डेरों के सर्च अभियान में इसी तरह के कुछ कृषि यंत्र जैसे ही हथियार बरामद किये गए थे. हत्या के भी सैकड़ों ऐसे मामले सामने आये जिसमे इस तरह के कृषि यंत्रों जैसे दिखने वाले हथियारों  वारदात को अंजाम दिया गया.

अपराधिक गतिविधियों में हो रहा कृषि यंत्रों का इस्तेमाल

कहने को तो ये कृषि में प्रयोग होने वाले औजार हैं, लेकिन आजकल इनका प्रयोग खेती में कम अपराधिक गतिविधियों में हथियार के तौर पर ज्यादा किया जा रहा है.  वारदात करने से पहले इन्हें खरीदने के लिए न तो भागदौड़ की जरूरत है और ना ही किसी डॉक्यूमेंट की क्योकि हर शहरों में ही सडक़ पर इस तरह के हथियारों की मंडी सजी नजर आती है.

खरीदने के लिए न लाइसेंस और पहचान की जरूरत

लोहे के भाव में गंडासी, चाकू,खंजर, दरांत, भाला, जेली कुछ भी खरीदिए, यहां सब बिकता है और वो भी बिना किसी लाइसेंस के और बिना किसी पहचान के. कोई भी आकर इनसे कुछ दाम में ये औजार रूपी हथियार खरीद सकता है. अगर देखा जाए तो हथियारों की इस मंडी का परिणाम भी सबके सामने हैं क्योंकि हर दूसरी वारदात में गंडासी या लोहे के दूसरे औजार ही हथियार के तौर पर प्रयोग किए जाते हैं.

इन औजारों पर नहीं लगता आर्म्ज एक्ट जैसी धाराएं

हालांकि तेजधार हथियारों को घर में रखने के लिए सरकार ने लाईसेंस लेने का नियम बनाया हुआ है, लेकिन प्रशासन की लापरवाही में यह नियम वर्षों बाद भी लागू नहीं हुआ. पुलिस के ढीले रवैये के कारण ही ये अवैध दिखने वाले हथियार पनप रहे हैं. क्योकि वारदात से पहले इन्हे कृषि यंत्र समझने की भूल जो कर ली जाती है और वारदात के बाद ये ऐसे हथियार बन जाते हैं जिस के ऊपर आर्म्ज एक्ट जैसी धारा भी नहीं लगती.
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कानून में बदलाव की जरूरत

आर्मज एक्ट के तहत साइज और बनावट तय गई है जो हथियारों की श्रेणी दर्शाता है लेकिन आजकल जो वारदातों में हथियार प्रयोग हो रहे है वो दिख तो कृषि यंत्रों जैसे ही है जिसकी वजह से उन्हें अवैध हथियार तो मान लिया जाता है. लेकिन आर्म्ज एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं होती. वकीलों का भी मानना है की इस तरह के हथियारों पर अंकुश लगाने के लिए क़ानून में बदलाव की जरूरत है.

खाद व बीज के लिए आधार कार्ड अनिवार्य लेकिन हथियार के लिए नहीं 

सरकार के आदेशानुसार खाद खरीदते समय किसान द्वारा आधार कार्ड देने का नियम बनाया गया है, ताकि खाद ब्लैक में बेचने पर रोक लगाई जा सके, लेकिन गंडासी, लंबे चाकू,दरांत बेचने व खरीदने वालों का प्रशासन के पास भी कोई रिकॉर्ड नहीं है। बिना किसी रिकॉर्ड खुले में हथियार बिक्री से युवा हथियारों की तरफ आकर्षित होकर उन्हें खरीदते हैं, जो बाद में अपराधिक वारदात को अंजाम देने का कारण भी बनता है.

चाकू, सुए व गंडासी से कैथल में हो रहे हैं मर्डर

बीते वर्षों में चाकू, गंडासी व बर्फ तोडऩे वाले सुएं से मर्डर करने की वारदात बढ़ी है. बड़ी घटनाओं का जिक्र किया जाए तो नवंबर 2017 में गांव सिरसल में चाकू से पिता व पुत्र की हत्या की गई. जुलाई 2018 में कैथल की बालाजी कॉलोनी में चाकू से ही पिता-पुत्र की हत्या को अंजाम दिया. वर्ष 2018 में ही बाबा लदाना मेले से लौट रहे युवक के सिर में चाकू व सुए मारकर हत्या कर दी. इसी साल 31 मई को नरड़ के सुनील की सिर व पेट में सुएं मारकर हत्या की गई, उससे 10 दिन पहले कोर्ट में गवाह पर सुएं से हमला किया. 12 अप्रैल का शहर में चंदाना गेट पर युवक पर गंडासी व सुएं से हमला कर हत्या का प्रयास किया. कुछ दिन पहले गांव पाई में युवक संसार की गंडासी जैसे तेजधार हथियार से हत्या की गई थी. इसके अलावा धरने-प्रदर्शन उग्र होने पर गंडासी, दराँत व फरसे जैसे देसी हथियार लहराना आम बात हो चुकी है. हरियाणा में हुए पिछले तीन बड़े आंदोलनों में भी इसी तरह के हत्यारों का भी खुले तौर पर इस्तेमाल हुआ था. डेरा सच्चा सौदा के हर जिले के सर्च अभियान में इस तरह के हथियार ही पाए गए थे जो कृषि यंत्र कहकर प्रयोग हो रहे थे.

क्या है उपायुक्त का कहना

जब इस विषय पर जिला उपायुक्त प्रियंका सोनी से बात की गई तो उन्होंने बताया की यह गंभीर मामला है. इस बारे में एक्शन लिया जाएगा. मामला संज्ञान में आने के बाद जिला उपायुक्त ने  कार्यवाही करने की बात भी कही.

कृषि यंत्रों से की गई हत्याएं

-2018 सोनीपत में कुल्हाड़ी मारकर एक बस ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी

-नवंबर 2018 भिवानी में एक बड़े दराँत(बरछी) से बैंक की लूट की गई थी

-सोनीपत में ही हॉस्पिटल के सामने एक युवक की दरांती से हत्या कर दी गई थी

-पिछले छह महीने में ऐसे ही हथियारों से कैथल में भी दर्जनों वारदातें हो चुकी  हैं

-2017 में यूपी एक महिला को सरेआम बरछी से काट दिया गया था

-2018 में यूपी के सम्भल में सरेआम एक युवक को कुल्हाड़ी से काटा गया था

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First published: June 17, 2019, 10:16 AM IST
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