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शुरू हुआ पराली जलाने का सिलसिला, करनाल में 35 किसानों के खिलाफ केस दर्ज

News18 Haryana
Updated: October 10, 2019, 5:31 PM IST
शुरू हुआ पराली जलाने का सिलसिला, करनाल में 35 किसानों के खिलाफ केस दर्ज
किसानों से की पराली न जलाने की अपील

खेतों में पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह जल जाती है, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है. जिसके चलते अगली फसल के लिए ज्यादा पानी, खाद कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल करना पड़ता है.

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करनाल.  प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद किसान (Farmers) पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं. कहीं रात के अंधेरे में तो कहीं दिन में सरेआम धरती और पर्यावरण (Environment) की सेहत से खिलवाड़ जारी है. मौजूदा धान के सीजन की शुरुआत में ही अब तक 35 किसानों पर केस दर्ज किए जा चुके हैं. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि उन्हें 120 पराली जाने के मामलों की जानकारी मिली थी.

जब जांच की गई तो इनमें 58 केसों को सर्टिफाई कर किया. इन मामलों में 35 किसानों के खिला केस दर्ज कर लिए गए हैं. उन्होंने लोगों से पराली न जलाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पराली जलाने से भूमि की ऊपजाई शक्ति कम होती है और साथ ही प्रदूषण फैलता है.

भूमि की उपजाऊ शक्ति होती है कम

खेतों में पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह जल जाती है, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है. जिसके चलते अगली फसल के लिए ज्यादा पानी, खाद कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल करना पड़ता है. अगर किसान खेतों में पराली दबा देते हैं तो भूमि की उपजाऊ शक्ति कम नहीं होती, यही पराली खाद का काम करती है और जहरीली खाद नहीं डालनी पड़ती. ऐसी जमीन में बीजी गई अगली फसल को भी कम पानी देना पड़ता है.

पराली जलाता किसान


सर्दी के मौसम में जलाई जाती है पराली

बता दें कि हर साल सर्दी के मौसम में पराली जलाई जाती है. फसल की कटाई के दौरान ये पराली अवशेष के रुप में खेतों में बच जाते है. किसान इन्हीं अवशेषों को जलाते है. जिससे प्रदूषण फैलता है. जिससे हरियाणा समेत दिल्ली गैस चेंबर में बदल जाती है.
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किसानों को किया जा रहा जागरुक

सरकार की ओर से किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है. उम्मीद है कि अगले 2 सालों में इस अभियान में और अधिक सफलता मिलेगी. उपायुक्त विनय प्रताप ने कहा कि गत 2 वर्षों के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन के तहत किसानों द्वारा जिस तरह जिला में स्थापित कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से तथा व्यक्तिगत तौर पर भी कृषि मशीनों का प्रयोग किया गया है. उससे फसल अवशेष अथवा पानी में आग लगाने के मामले में 40 से 50% तक की गिरावट आई है.

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First published: October 10, 2019, 5:31 PM IST
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