कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में हरियाणा का जवान शहीद, घर पहुंचा पार्थिव शरीर
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कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में हरियाणा का जवान शहीद, घर पहुंचा पार्थिव शरीर
शहीद बलजीत सिंह

आतंकवादियों को सेना के निकट आने की भनक लग गई और अपनी ओर से अंधेरे में फायर शुरू कर दिए. इधर हवलदार बलजीत अपने ऑफिसर जेसीओ के साथ सर्च अभियान की अगुवाई में शामिल थे.

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जम्मू-कश्मीर में मंगलवार सुबह आतंकियों से हुई मुठभेड़ में हरियाणा के बलजीत सिंह शहीद हो गए. करनाल के गांव डिंगर माजरा के बलजीत सिंह 50 राष्ट्रीय राईफल में हवलदार के पद पर तैनात थे. उनकी उम्र 35 वर्षीय थी. श्रीनगर के पुलवामा में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए वो शहीद हो गए. इसकी पुष्टि घरौंडा के उपमंडलाधीश मो. इमरान रजा और जिला सैनिक बोर्ड के सचिव प्रमोद कुमार यादव ने की है.

सैनिक बलजीत सिंह के शहीद होने के सूचना जैसे ही पैतृक गांव पहुंची तो गांव स्तब्ध रह गया. परिवार से प्राप्त जानकारी अनुसार हवलदार बलजीत सिंह इस समय श्रीनगर के पुलवामा में 50 राष्ट्रीय राईफल में तैनात थे. गत रात्रि को 2.30 बजे उनकी सेना के जवानों को पुलावामा के पास तीन आतंकवादियों के घुसे होने की सूचना पहुंची, तो वह अपने साथी जवानों के साथ आतंकवादियों की घेराबंदी के लिए पहुंचे.

इस दौरान आतंकवादियों को सेना के निकट आने की भनक लग गई और अपनी ओर से अंधेरे में फायर शुरू कर दिए. इधर हवलदार बलजीत अपने ऑफिसर जेसीओ के साथ सर्च अभियान की अगुवाई में शामिल थे.



इस मुठभेड़ में बलजीत ने एक आतंकवादी को फायर कर मार गिराया, लेकिन सामने से आतंकवादियों की फायरिंग में बलजीत सिंह को दो गोली लगी और एक अन्य साथी सिपाही को गोली लगी, जिसके बाद साथी सैनिक तुरंत सेना के अस्पताल दोंनो गोली लगने से घायल जवानों को लेकर पहुंचे. लेकिन तब तक हवलदार बलजीत और उसका दूसरा साथी सिपाही शहीद हो चुके थे.
जनवरी 2002 में 2 मैक इनफैंटरी में भर्ती हुए थे बलजीत

जनवरी 2002 में हवलदार बलजीत सिंह 2 मैक इनफैंटरी में भर्ती हुए थे. महाराष्ट्र के अहमदनगर में ट्रेनिंग की थी. इसके बाद अपनी अच्छी फिटनेस के चलते हवलदार बलजीत ने एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग पूरी की थी. वर्ष 2015 से वर्ष 2017 तक नई दिल्ली में एनएसजी में वीवीआईपी डयूटी में तैनात रहे. इससे पहले भी तीन साल तक हवलदार बलजीत राष्ट्रीय राईफल में पोस्टिंग रह चुके थे और अब दोबारा से लगभग पिछले तीन वर्षों से 50 राष्ट्रीय राईफल में श्रीनगर क्षेत्र में पोस्टिंग थे.

हवलदार बलजीत का एक तीन वर्षीय बेटा और सात वर्षीय बेटी

देश के लिए शहादत देने वाले हवलदार बलजीत की पत्नी अरूणा, एक तीन वर्षीय बेटा अरनव, सात वर्षीय बेटी जन्नत, 75 वर्षीय किसान पिता किशनचंद, बड़ी बहन नीलम जो कि करनाल के नेवल गांव में शदीशुदा हैं. बड़ा भाई कुलदीप जो कि खेती बाड़ी और एक गाड़ी चलाकर अपना जीवन निर्वाह कर रहा है. शहीद की माता मूर्ति का पहले ही देहांत हो चुका है.

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