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लाखों रुपए की लागत से स्‍थापित ई-टॉयलेटों में लटक रहे ताले

लाखों रुपए की लागत स्‍थापित शौचालयों में लटक रहे हैं ताले.
लाखों रुपए की लागत स्‍थापित शौचालयों में लटक रहे हैं ताले.

सीएम सिटी करनाल को खुले में शौच से मुक्त करने के अभियान के तहत शहर के 6 विभिन्न स्थानों पर लगाए गए ई-टॉयलेट की हकीकत जानने का प्रयास किया गया, तो सभी दावे हवा-हवाई ही नजर आए. लाखों रुपए खर्च करके लगवाए गए सभी ई-टॉयलेट पर ताले लटके हैं.

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हरि‍याणा की सीएम सिटी करनाल को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल किया गया है और उसे स्वच्छता सर्वेक्षण में 41वीं रैंक भी मिल गई है, परन्तु सरकार की तरफ से शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चल रही योजनाओं को सरकारी अधिकारी और कर्मचारी ही ठेंगा दिखा रहे हैं. करनाल को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए नगर निगम ने लाखों रुपए की लागत से शहर के विभिन्न स्थानों पर 6 ई-टॉयलेट लगाए थे, लेकिन ये टॉयलेट पिछले कई महीनों से बंद पड़े हैं और लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं.

पिछले दिनों आए स्वच्छता सर्वेक्षण के नतीजों में हरियाणा के करनाल नगर को देशभर में 41वां स्थान मिला. इस पर करनाल के स्थानीय प्रशासनिक अमले ने बहुत वाहवाही बटोरी और विभिन्न समूहों में इसका श्रेय लेने की होड़ मची रही, परंतु जब स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्त अभियान के तहत शहर के 6 विभिन्न स्थानों पर लगाए गए ई-टॉयलेट की हकीकत जानने का प्रयास किया गया, तो सभी दावे हवा-हवाई ही नजर आए. लाखों रुपए खर्च करके लगवाए गए सभी ई-टॉयलेट पर ताले लटके हैं. इस वजह से आम नागरिक खुले में ही शौच जाने को मजबूर हैं.

इसके अलावा नगर निगम द्वारा जो सामान्य शौचालय बनाए गए हैं, उनकी हालत भी बहुत ही दयनीय है. इन शौचालयों के लिए सफाई कर्मचारी की व्यवस्था न होने के कारण शौचालय के अंदर गंदगी का अंबार लगा है. जिले के जिस लघु सचिवालय से समय- समय पर सफाई की कार्य योजना तैयार की जाती है, सफाई के नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाते हैं, उसी लघु सचिवालय में एसडीएम कार्यालय के समीप स्थित सार्वजनिक शौचालय भी बदतर हालत में है. यहां गंदगी और बदबू के कारण आसपास का पूरा वातावरण दूषित हो रहा है. वहीं प्रशासनिक अधिकारी व्यवस्था को जल्द ही ठीक करने की बात कह रहे हैं.
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