करनाल: अपनों का इंतजार कर रही सैकड़ों लोगों की अस्थियां, श्मशान घाट नहीं पहुंच रहे परिजन

समाज सेवियों ने अस्थियों को पैकेट में रखा हुआ है.

समाज सेवियों ने अस्थियों को पैकेट में रखा हुआ है.

Corona Death: करनाल में शमशान घाट पर अस्थियां अपनों के इंतजार में है. संस्कार हुए लंबा वक्त हो गया पर परिजन फूलों को चुगने के लिए नहीं आए.

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करनाल. इस कोरोना काल में किसी ने अपने पिता को खोया तो किसी ने अपनी मां को, तो कोई अपने लाडले से दूर हो गया, तो किसी पति - पत्नी का सफर इस श्मशान घाट (Cremation Ground) पर आकर खत्म हो गया. लेकिन इस कोरोना काल ने रिश्तों की सच्चाई दिखाई, कौन अपना है और कौन अपना होते हुए भी पराया ये बताया. पिछले कुछ दिनों में करनाल के बलड़ी श्मशान घाट पर 400 से ज़्यादा संस्कार हुए, ये संस्कार दिल्ली, उत्तप्रदेश, पंजाब , हरियाणा (Haryana) के अलग अलग ज़िलों से आए कोरोना का इलाज करवाने वाले लोगों के थे, जिनकी इलाज के दौरान कोरोना से मौत हो गई थी. उनका संस्कार हुआ उसके बाद परिवार वाले उनकी अस्थियां लेकर चले गए. लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो अपने परिजन की अस्थियां लेने तक नहीं आए.

जो लोग अपने होने का दम भरते थे वो आज फूल चुगने से भी कतरा रहे हैं. ऐसा एहसास दिलवा रहे हैं कि जैसे उनका मरने वाले के साथ कोई रिश्ता ही नहीं था. करनाल के बलड़ी शमशान घाट पर करीब दर्जन भर अस्थियों को हिन्दू रीति रिवाजों के साथ पैकेट में बन्द करके रखा हुआ है. 15 दिन से ज़्यादा का समय हो गया है परिवार वाले फूल चुगने नहीं आए हैं.

ऐसे में शमशान घाट पर पिछले कई दिनों से समाज सेवा कर रहे लोगों ने फैसला लिया है कि अगर 4 - 5 दिनों के भीतर कोई भी इन अस्थियों को लेने के लिए नहीं आता तो फिर वो हिंदू रीतिरिवाजों के साथ हरिद्वार जाकर इन अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करेंगे. फिलहाल ये अस्थियां अपनो का इंतजार कर रही हैं , लेकिन लंबे समय से रखी ये अस्थियां ये सच्चाई बताती हैं कि आज के समाज में रिश्ते खोखले हो रहे हैं जो चला गया शायद उसने कभी सोचा भी नहीं होगा कि मेरे संस्कार के बाद मेरा कोई अपना मेरी अस्थियों को लेने तक नहीं आएगा.

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