करनाल में कोरोना मरीज़ों की केयर के लिए अब मैदान में उतारे जाएंगे MBBS स्टूडेंट्स

करनाल मेडिकल कॉलेज में मेडिकल स्टूडेंट्स.

करनाल मेडिकल कॉलेज में मेडिकल स्टूडेंट्स.

Haryana News : Covid-19 के हालात से जूझने के लिए हफ्ते भर पहले ही प्रधानमंत्री की बैठक में मेडिकल छात्रों की मदद लेने के संबंध में बातचीत हुई थी. हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी यह बात महीने भर पहले कही थी.

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करनाल. कोरोना मरीज़ों के इलाज के लिए एक तरफ ऑक्सीजन, बेड, मेडिकल स्टाफ की कमी है तो दूसरी तरफ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी की बात भी छुपी नहीं है. इसी सिलसिले में अब करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल हॉस्पिटल के MBBS के फाइनल इयर के स्टूडेंट्स को होम केयर की सेवाओं में लगाए जाने का फैसला किया गया है ताकि होम आइसोलेशन वाले मरीज़ों तक हेल्थकेयर पहुंचाई जा सके.

इसी सिलसिले में रविवार को MBBS के तमाम स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें ACS देवेंद्र सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े और करनाल के उपायुक्त निशांत यादव समेत कई सीनियर डॉक्टर मौजूद रहे.

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गंभीर हैं करनाल में कोरोना के हाल!
कई कोरोना मरीज़ शहर के अस्पतालों में भर्ती तो हैं, उनसे कई गुना ज़्यादा मरीज़ ऐसे हैं जो घरों में ही आइसोलेशन का समय बिता रहे हैं. करनाल में कोविड के एक्टिव केसों की संख्या करीब 5300 है. इनमें से 90 प्रतिशत यानी 4500 से ज़्यादा मरीज़ अपने घरों में इलाज कर रहे हैं यानी वो होम आइसोलेट हैं.

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फाइनल इयर के छात्रों को कोरोना केयर संबंधी प्रशिक्षण दिया गया.

इन मरीज़ों को समय-समय पर स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरी सलाह, इलाज आदि की ज़रूरत पड़ती है. इस स्थिति से निपटने के लिए अब करनाल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और कल्पना चावला मेडिकल हॉस्पिटल प्रबंधन ने इन मरीज़ों मरीज़ों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने के लिए डॉक्टर की डिग्री लेने के करीब पहुंचे छात्रों को मैदान में उतारने की कवायद की है.



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ऐसे 200 MBBS स्टूडेंट्स हैं, जो करनाल में होम आइसोलेशन मरीजों का धयान रखेंगे. एक स्टूडेंट रोज़ाना 25 मरीज़ों को फोन करेगा जो होम आइसोलेट हैं. कॉल पर मरीज़ की सेहत, परेशानी, लक्षण, दिनचर्या, दवाओं व व्यायाम के शेड्यूल जैसी जानकारियां ली और दी जाएंगी. ज़रूरत पड़ने पर स्टूडेंट डॉक्टर इन मरीज़ों के घर भी जाएंगे.

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क्या करेंगे स्टूडेंट्स?

अगर फोन कॉल पर किसी की सेहत बिगड़ने और उसे ऑक्सीजन की ज़रूरत होने की नौबत पेश आती है, तो उसको पंचायत भवन में ऑक्सीजन सपोर्ट बेड पर शिफ्ट करवाने की व्यवस्था की जा रही है. वहीं MBBS स्टूडेंट्स की इस परर्फोमेंस का फायदा उन्हें उनके प्रैक्टिकल मार्क्स में भी मिलेगा.

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