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जांच के नाम पर अधिकारी अपनी मनमर्जी से बना रहे रिपोर्ट!

जांच के नाम पर अधिकारी अपनी मनमर्जी से बना रहे रिपोर्ट!

लोगों की समस्याओं का जल्द और मौके पर ही निपटारा करने के मकसद से खोली गई सीएम विंडों पर ही अब सवाल खडे होने लगे हैं। सीएम विंडों पर की गई शिकायत की जांच करने वाले अधिकारी जांच के नाम पर अपनी मनमर्जी कर अपनी इच्छा के अनुसार ही रिपोर्ट बनाकर भेज रहे हैं।

लोगों की समस्याओं का जल्द और मौके पर ही निपटारा करने के मकसद से खोली गई सीएम विंडों पर ही अब सवाल खडे होने लगे हैं। सीएम विंडों पर की गई शिकायत की जांच करने वाले अधिकारी जांच के नाम पर अपनी मनमर्जी कर अपनी इच्छा के अनुसार ही रिपोर्ट बनाकर भेज रहे हैं।

लोगों की समस्याओं का जल्द और मौके पर ही निपटारा करने के मकसद से खोली गई सीएम विंडों पर ही अब सवाल खडे होने लगे हैं। सीएम विंडों पर की गई शिकायत की जांच करने वाले अधिकारी जांच के नाम पर अपनी मनमर्जी कर अपनी इच्छा के अनुसार ही रिपोर्ट बनाकर भेज रहे हैं।

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    लोगों की समस्याओं का जल्द और मौके पर ही निपटारा करने के मकसद से खोली गई सीएम विंडों पर ही अब सवाल खडे होने लगे हैं। सीएम विंडों पर की गई शिकायत की जांच करने वाले अधिकारी जांच के नाम पर अपनी मनमर्जी कर अपनी इच्छा के अनुसार ही रिपोर्ट बनाकर भेज रहे हैं।

    यहीं कारण है कि औरंगाबाद का एक छात्र पहले की गई शिकायत पर इंसाफ न मिलने के कारण अब दोबारा से जांच करवाने के लिए सीएम विंडों में शिकायत देने पहुंचा। पीड़ित छात्र का आरोप है कि उनके गांव का डिपो धारक गांव में दिए जाने वाले राशन को लेकर घपला करता है और शिकायत करने पर अधिकारी भी उल्टा उसे ही धमकाकर चले जाते हैं।

    सही प्रकार से चल पाने में असमर्थ यमुनानगर के लघु सचिवालय में बनी सीएम विंडों पर पहुंचा औरंगाबाद के रवि यहां पहली नहीं, बल्कि दूसरी बार शिकायत देने पहुंचा है। रवि की माने तो उसने पहले भी अपने गांव के डिपो धारक के खिलाफ जनवरी में सीएम विंडों पर शिकायत दी थी।

    शिकायत के बाद जांच के लिए जो अधिकारी गांव में आए वह जांच करने की बजाए डिपो धारक की कार में ही बैठकर घूमते रहे और बाद में उसे ही धमकाकर गेहूं न दिए जाने के मामले को छोटा-मोटा मामला बताकर उसे ही चुप रहने को कहा।

    बाद में उन्होंने खुद ही डिपो धारक द्वारा सेल रजिस्टर में एंट्री न करने की बात कहकर रिपोर्ट बनाकर भेज दी। इसलिए अब वह दोबारा से सीएम विंडों पर शिकायत करने आया है कि इस मामले की जांच चंडीगढ़ से कोई टीम आकर खुद करे।

    इतना ही नहीं रवि की माने तो 2005 में उसका राशन कार्ड बनने के बावजूद भी डिपो धारक ने उसे कार्ड नहीं दिया, जो कि बाद में डीएफएसओ आफिस में जाने पर 2011 में उसे बनाकर दिया गया। साथ ही जब उसने डिपो धारक के रिकार्ड बारे आरटीआई में जानकारी मांगी गई तो उसे न तो वह जानकारी दी गई अलबत्ता उनके द्वारा दिए गए प्लाट के बयाने को लेकर ही उनके साथ झगड़ा कर दिया।

    रवि के अनुसार यदि इसी प्रकार से जांच हो तो सीएम विंडों के भी कोई मायने नहीं रह जाते। रवि द्वारा दी गई शिकायत पर हुई जांच के बारे जब जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी डा. मंजुला दहिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाई थी। यदि वह जांच से संतुष्ट नहीं है तो वह दोबारा जांच करवा देंगे और मामले की जांच उच्चाधिकारी से दोबारा करवाकर उसे संतुष्ट करवाएंगे।

    यदि जांच के दौरान पहले जांच करने वाले किसी अधिकारी की गलती पाई गई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि यदि किसी के खिलाफ कोई जांच होती है तो आरोपी के घर नहीं जाया जाता, बल्कि सार्वजनिक जगह पर बैठकर पूरे गांव के लोगों के बयान लिए जाते हैं।

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