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PGI के डॉक्टर्स ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, बच्ची के पेट से निकाला चार किलो बालों का गुच्छा

जहां चाह वहां राह की कहावत को चरित्रार्थ करके दिखाया है रोहतक पीजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग ने. यहां पर एक 14 साल की बच्ची के पेट से 4 किलोग्राम बालों का गुच्छा बगैर ऑपरेशन के सफलतापूर्ण तरीके से निकाला गया है.

जहां चाह वहां राह की कहावत को चरित्रार्थ करके दिखाया है रोहतक पीजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग ने. यहां पर एक 14 साल की बच्ची के पेट से 4 किलोग्राम बालों का गुच्छा बगैर ऑपरेशन के सफलतापूर्ण तरीके से निकाला गया है.

जहां चाह वहां राह की कहावत को चरित्रार्थ करके दिखाया है रोहतक पीजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग ने. यहां पर एक 14 ...अधिक पढ़ें

    जहां चाह वहां राह की कहावत को चरित्रार्थ करके दिखाया है रोहतक पीजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग ने. यहां पर एक 14 साल की बच्ची के पेट से 4 किलोग्राम बालों का गुच्छा बगैर ऑपरेशन के सफलतापूर्ण तरीके से निकाला गया है.

    अबतक विश्व में मात्र छह ऐसे केस एंडोस्कोपी द्वारा ठीक किए गए हैं, लेकिन ये उनमें से सबसे बड़ा और भारी है. पीजीआई की इस टीम का ये दूसरा बड़ा केस था. दरअसल पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलोजी विभाग में कुछ हफ्ते पहले भिवानी जिले की एक 14 साल की लडक़ी आई थी, उसे उल्टी, पैर दर्द और पेट मे गांठ की समस्या थी.

    मरीज से जब पूछताछ की गई तो पता चला कि वो दो साल से बीमार है और शुरू में तो उसे पेट में दर्द, भूख ना लगना, वजन गिरना शुरू हुआ और बाद में उसने पेट में नाभि के ऊपर एक गांठ महसूस हुई. इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंत में तो इतना बढ़ गया कि वो सीधा चल भी नहीं पाती थी और उसे झुककर चलना पड़ता था.

    पिछले बीस दिनों से तो वो कुछ भी खा-पी नहीं रही थी और लगातार उल्टी कर रही थी. बच्ची की बीमारी से परेशान परिवार ने उसे हर जगह दिखाया, लेकिन बीमारी का पता नहीं चल पाया. उसके कई अल्ट्रासांउड भी किए गए, पर हर बार में उसकी इस गांठ की तिली बताया गया.

    हकीकत में बच्ची मानसिक तौर पर परेशान थी और अपने ही सिर के बालों को खा लेती थी, जिसका परिवार को भी नही पता चल पाया. परिवार थक-हारकर उसे पीजीआई लेकर आया तो उसकी एंडोस्कोपी की गयी तो डॉक्टर्स हैरान हो गए, क्योंकि पूरे पेट को एक बहुत बड़े बालों के गोले ने घेर रखा था और पेट का ऐसा कोई भी हिस्सा नही था, जहां बाल ना हों.

    गैस्ट्रोएंट्रोलोजी के विभागाध्यक्ष डॉ प्रवीण मल्होत्रा ने ऐसा ही एक केस तीन साल पहले एक 17 साल की युवती का भी किया था. डॉ मल्होत्रा ने बताया कि अगर इन सभी बालों को एक बारी में निकालने की कोशिश की जाती तो उससे पेट फट सकता था और बच्ची की मौत भी हो सकती थी.

    इसके चलते सबसे पहले इसके कई छोटे-छोटे हिस्से किए गए और उन्हें बारी-बारी से निकाला गया. अब ये बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है और पिछले दो हफ्तों मे उसका तीन किलो वजन भी बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि अब तक विश्व में मात्र छह ऐसे केस एंडोस्कोपी द्वारा ठीक किए गए हैं, लेकिन ये उनमें से सबसे बड़ा और भारी है. पीजीआई की इस टीम का ये दूसरा बड़ा केस था.

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