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Karnal Lathicharge: करनाल में हुए लाठीचार्ज की जांच शुरू, पहले दिन 6 गवाहों के बयान दर्ज

Karnal Lathicharge: करनाल में हुए लाठीचार्ज की जांच शुरू, पहले दिन 6 गवाहों के बयान दर्ज

करनाल के बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज मामले में जांच शुरू हो गई है.

करनाल के बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज मामले में जांच शुरू हो गई है.

Lathicharge in Karnal: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से रिटायर्ड जज एसएन अग्रवाल ने बताया कि इस मामले की जांच करीब 4 महीने तक चलेगी।.पहले उन्हें एक महीने का समय मिला था लेकिन जिस तरह किसानों व प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज करने हैं, ऐसे में लंबा समय लगेगा. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वह बुधवार, वीरवार और शुक्रवार इन तीन दिनों तक करनाल रहेंगे और किसानों के बयान दर्ज करेंगे.पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से रिटायर्ड जज एसएन अग्रवाल ने बताया कि इस मामले की जांच करीब 4 महीने तक चलेगी।.पहले उन्हें एक महीने का समय मिला था लेकिन जिस तरह किसानों व प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज करने हैं, ऐसे में लंबा समय लगेगा. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वह बुधवार, वीरवार और शुक्रवार इन तीन दिनों तक करनाल रहेंगे और किसानों के बयान दर्ज करेंगे. सोमवार को आयोग के चेयरमैन एसएन अग्रवाल ने करनाल के पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में पहुंचकर 6 किसानों के बयान दर्ज किए

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    हिमांशु नारंग

    करनाल. बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज और आईएस अधिकारी आयुष सिन्हा के वीडियो की जांच शुरू हो गई है. आज करनाल में पूर्व जस्टिस एसएन अग्रवाल पहुंचे, जिन्होंने किसानों के बयान रिकॉर्ड किए. रिटायर्जड जज सोमनाथ अग्रवाल ने मीडिया के सामने  कहा कि आज हमने मूनक गांव  के सात गवाहों को बुलाया था. छह गवाहों ने अपने बयान दर्ज करवाए हैं. गवाहों को थोड़ा-थोड़ा करके बुलाया जाएगा. गवाहों के बयानों के बाद अधिकारियों को बुलाया जाएगा. जो नाम निकलकर आएंगे, उनको बुलाया जाएगा.

    उन्होंने कहा कि डॉक्टर, तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा व प्रशासनिक अधिकारियों को भी बुलाया जाएगा कुछ को चंडीगढ़ भी बुलाया जा सकता है. किसान नेता गुरनाम चढुनी व अन्य नेता को भी  2 नवम्बर को बुलाया गया है.  करनाल में इस मामले को चार महीने में पूरा कर दिया जाएगा. इसमें करीब 35 किसानों की गवाही ली जाएगी.

    गवाही देने के लिए आए हरविंदर सिंह ने बताया कि 28 अगस्त को पुलिस का रवैया कैसा रहा, कितनी संख्या में पुलिस वाले थे और कितने किसान मौजूद रहे इस बारे में उससे पूछा गया. पुलिस ने कितनी ज्यादती की, किसानों पर लाठी क्यों उठाई गई. इसके अलावा बिना पूछे ही आयुष सिन्हा और पुलिस अधिकारियों के बारे में उसने बताया.

    वहीं किसान रघुबीर सिंह ने कहा कि उनकी बात करने का तरीका, हमारी बात सुनने का तरीका ठीक है. हमे लग रहा है कि किसानों को इंसाफ मिलेगा. हमारी बात को सरकार दबा रही थी. इस देश में कानून है, जो किसानों की भी सुन सकता है. हमने हमारी बात को अच्छे से रख दिया है. दोबारा भी बुलाया जा सकता है. ऐसा हमे कहा गया है.

    वहीं किसान बलविंद्र सिंह ने बताया कि हम तीसरी बार लाठीचार्ज पर पहुंचे थे. हमने सब अवगत करवाया है. पुलिस अधिकारी हरजिंद्र ने मेरी आंखों के सामने लाठी चार्ज किया. हम एक किलोमीटर तक भागे. तीनों बार हुए लाठीचार्ज के बारे में अवगत करवाया गया. सरकार क्या करेगी, क्या नहीं करेगी, सरकार इसमें क्या हल करती है, ये देखने की बात रहेगी. हमने तो अपने बयान दे दिए. हमे जितनी बार भी बुलाया जाएगा हम जांच में शामिल होंगे. ये रिपोर्ट 4 महीने तक सरकार के सामने रखी जाएगी. देखना होगा कि इस रिपोर्ट में सरकार को क्या बताया जाता है और सरकार उसके बाद क्या एक्शन लेती है.

    Tags: Kisan Aandolan, Kisan lathicharge

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