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आर्मी एरिया के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में दो बच्चों की मौत

आर्मी एरिया के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में दो बच्चों की मौत

अंबाला कैंट के आर्मी एरिया में सेना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में नहाने उतरे सात बच्चों में से दो की मौत हो गई। एक ही तालाब में अलग-अलग समय हुए। दो हादसों का पता सेना को तब चला जब दोनों की जानें जा चुकी थी। हालांकि, हादसों के बाद भी शव निकालने के लिए सेना की रेस्कयू टीमें समय पर नहीं पहुंच पाई और दमकल विभाग के कर्मचारियों को ही अपनी जान पर खेलकर बीस फीट गहरे तालाब में उतरकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।

अंबाला कैंट के आर्मी एरिया में सेना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में नहाने उतरे सात बच्चों में से दो की मौत हो गई। एक ही तालाब में अलग-अलग समय हुए। दो हादसों का पता सेना को तब चला जब दोनों की जानें जा चुकी थी। हालांकि, हादसों के बाद भी शव निकालने के लिए सेना की रेस्कयू टीमें समय पर नहीं पहुंच पाई और दमकल विभाग के कर्मचारियों को ही अपनी जान पर खेलकर बीस फीट गहरे तालाब में उतरकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।

अंबाला कैंट के आर्मी एरिया में सेना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में नहाने उतरे सात बच्चों में से दो की मौत हो गई। एक ही तालाब में अलग-अलग समय हुए। दो हादसों का पता सेना को तब चला जब दोनों की जानें जा चुकी थी। हालांकि, हादसों के बाद भी शव निकालने के लिए सेना की रेस्कयू टीमें समय पर नहीं पहुंच पाई और दमकल विभाग के कर्मचारियों को ही अपनी जान पर खेलकर बीस फीट गहरे तालाब में उतरकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।

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अंबाला कैंट के आर्मी एरिया में सेना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में नहाने उतरे सात बच्चों में से दो की मौत हो गई। एक ही तालाब में अलग-अलग समय हुए। दो हादसों का पता सेना को तब चला जब दोनों की जानें जा चुकी थी। हालांकि, हादसों के बाद भी शव निकालने के लिए सेना की रेस्कयू टीमें समय पर नहीं पहुंच पाई और दमकल विभाग के कर्मचारियों को ही अपनी जान पर खेलकर बीस फीट गहरे तालाब में उतरकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।

दरअसल, बुधवार सुबह कौला निवासी कृष्ण अपने दो अन्य दोस्तों के साथ तालाब में नाहने उतर गया, लेकिन तालाब बीस फीट गहरे तथा पानी ज्यादा होने की वजह से वह शायद पूरी तरह तैर नहीं पाया और डूबने से उसकी मौत हो गई। मगर राहत की बात यह रही कि दो अन्य बच्चों की जान बच गई। इस हादसे को अभी कुछ घंटे भी नहीं बीते थे कि साथ वाले ही एक और तालाब में कौला निवासी गुरुप्रीत भी अपने तीन दोस्तों के साथ पहुंच गया।

मगर बदकिस्मती से तालाब में वह फिसलकर गहराई में चला गया और उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन गुरूप्रीत के भी तीन अन्य दोस्तों की जान बच गई। कौला के सरपंच के अनुसार दोनों मृतक सैनिकों के ही बच्चे थे जोकि छोटी कक्षाओं में पढ़ते थे।

पूरे मामले में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर तैनात कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही तो सामने आई ही है, लेकिन सेना की रेस्कयू टीमें भी समय पर नहीं पहुंच पाई। मगर दमकल विभाग के कर्मचारियों ने बीस फीट गहरे तालाब में स्वंय उतरकर शव को बाहर निकाला। उधर, एसीपी जगदीप सिंह ने दोनों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है, जबकि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, मामले में सेना के अधिकारी भी ज्यादा अच्छी भूमिका अदा नहीं करते नजर आए। दोनों घटनाओं के बाद मौके पर पहुंचे सेना अधिकारी अपने विभाग की बजाए मीडिया, स्थानीय लोगों और पुलिस से ना सिर्फ जानकारी मांगने में लगे रहे बल्कि प्लांट के कर्मचारियों द्धारा बरती गई।

लापरवाही पर भी चुप्पी साध गए। अब दबाव बढ़ने पर हो सकता है कि लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच खोल दी जाए। उन्हें सस्पेंड कर दिया जाए या पुलिस परिजनों की शिकायत पर लापरवाही का केस भी दर्ज कर दें, लेकिन इस घटना ने आर्मी एरिया के सुरक्षा तंत्र पर जरूर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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