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जानिए उन निर्दलीय विधायकों के बारे में जो बन गए हैं हरियाणा के किंग मेकर!

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Updated: October 25, 2019, 8:08 PM IST
जानिए उन निर्दलीय विधायकों के बारे में जो बन गए हैं हरियाणा के किंग मेकर!
निर्दलीय विधायकों के सहारे रहेगी हरियाणा की सत्ता

हरियाणा के पांच निर्दलीय विधायक (Independent mla in haryana) बीजेपी (BJP) के बागी हैं, एक कांग्रेस (Congress) का, आखिर किसे मिलेगा मंत्री पद. 2009 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने निर्दलीय विधायकों को दिया था मंत्री पद.

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  • Last Updated: October 25, 2019, 8:08 PM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा (Haryana) में निर्दलीय विधायक (Independent mla) पहली बार किंग मेकर की भूमिका में नजर नहीं आ रहे. सियासत में इनका दखल प्रदेश में हुए पहले चुनाव से ही बना हुआ है. इस बार 2009 वाली स्थिति दोहराई जा रही है. तब कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) ऐसे ही हालात में खड़े थे जैसे इस वक्त बीजेपी (BJP) नेता मनोहरलाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) हैं. तब कांग्रेस (Congress) को 40 सीटें मिली थीं. उस वक्त इनेलो के पास 31 सीटें थीं. 7 निर्दलीय विधायक चुनकर आए थे. हुड्डा ने उनका समर्थन लेकर सरकार बनाई. कुछ निर्दलीय विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया था. देखना ये है कि खट्टर कितने निर्दलीय विधायकों को मंत्री बनाते हैं.

इस बार जो सात निर्दलीय विधायक चुनकर आए हैं उनमें से पांच बीजेपी और एक कांग्रेस का बागी है. इन विधायकों के हाथ में ही सरकार बनाने और बिगाड़ने की ताकत आ गई है. आईए जानते हैं इनके बारे में.

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सोमबीर सांगवान: इन्होंने हरियाणा की दादरी सीट से बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा. टिकट के लिए बागी बन गए थे. 2014 में उन्होंने इसी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे. इस बार पार्टी ने सांगवान की जगह रेसलर बबिता फोगाट को लड़ाया. लेकिन सियासी अखाड़े में सांगवान ने उन्हें हरा दिया.

>>बलराज कुंडु: हरियाणा की महम सीट पर बीजेपी के बागी के रूप में निर्दलीय मैदान में उतरे और विधायक का सर्टिफिकेट हासिल कर लिया. कुंडु पार्टी से टिकट मांग रहे थे. लेकिन उनकी जगह पार्टी ने शमशेर सिंह को मैदान में उतारा. कुंडु रोहतक में जिला परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं.

>>नयन पाल रावत: इन्होंने 2014 में बीजेपी की टिकट पर पृथला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. वो बसपा से हार गए थे. इस बार नयनपाल की जगह बीजेपी ने सोहनपाल को मैदान में उतारा. लेकिन नयनपाल ने उन्हें हरा दिया.

>>रणधीर सिंह गोलन: हरियाणा की पुंडरी विधानसभा सीट से रणधीर सिंह गोलन ने निर्दलीय चुनाव लड़ा जीत गए. वे बीजेपी के बागी हैं. पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया था.
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>>धर्मपाल गोंडर: नीलोखेड़ी सीट से धर्मपाल गोंडर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता है. वो बीजेपी के बागी नेता हैं. उन्होंने बीजेपी के भगवान दास को हराया.

>>रंजीत सिंह: ये निर्दलीय जीतने वालों की लिस्ट में कांग्रेस के बागी नेता हैं. रंजीत सिंह को कांग्रेस ने रानिया सीट से टिकट देने से मना कर दिया था.

>>राकेश दौलताबाद: इन्होंने हरियाणा की बादशाहपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता है. 2009 में दौलताबाद ने अपना पहला चुनाव निर्दलीय ही लड़ा था. 2014 में वो इनेलो के टिकट पर चुनावी मैदान में थे. इस बार निर्दलीय लड़े और भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष मनीष यादव को हरा दिया.

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हरियाणा में बीजेपी की मजबूरी बने निर्दलीय विधायक. (प्रतीकात्मक फोटो)


कब कितने निर्दलीय विधायक बने
1996 में सबसे अधिक 2031 उम्मीदवार निर्दलीय थे, लेकिन जीते सिर्फ 13. इसी तरह 2014 में पांच निर्दलीय चुने गए थे. 2019 के चुनाव में 375 आजाद प्रत्याशी मैदान में थे जिनमें से 7 सदन पहुंच गए. हरियाणा में पहला विधानसभा चुनाव 1967 में हुआ था. तब 20 फीसदी विधायक निर्दलीय ही चुने गए थे. तब विधानसभा 90 की जगह 81 सीट की ही हुआ करती थी.  इसमें से 16 विधायक निर्दलीय थे.

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First published: October 25, 2019, 6:15 PM IST
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