कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीता खन्ना का ऐतिहासिक फैसला, कांट्रेक्ट शिक्षकों का मानदेय बढ़ाया

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की कुलपति के दो बड़े फैसलों से कर्मचारी खुश हैं.
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की कुलपति के दो बड़े फैसलों से कर्मचारी खुश हैं.

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (Kurukshetra University) की कुलपति डॉ. नीता खन्ना ने दो बड़े एतिहासिक फैसले लिए हैं, जिसके बाद से कर्मचारियों (Employees) में खुशी का माहौल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 8:22 PM IST
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कुरुक्षेत्र. कोरोना (Corona) काल में जब लोगों की नौकरी जा रही है ऐसे समय में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (Kurukshetra University) की कुलपति डॉ. नीता खन्ना ने दो बड़े एतिहासिक फैसले लिए हैं. उनके इस फैसले से विश्वविद्यालय के कर्मचारियों में खुशी का माहौल है. इस फैसले के लिए विश्वविद्यालय के कर्मचारी कुलपति (Vice Chancellor) को बधाई दे रहे हैं.

मंगलवार को विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीता खन्ना ने दो बड़े फैसले लिये. पहले फैसले में एसएफएस और कांट्रेक्ट शिक्षकों की बहुत पुरानी मांग को तत्काल प्रभाव से पूरा कर दिया है. कुलपति डॉ. नीता खन्ना ने कांट्रेक्ट शिक्षकों की मांग को पूरा करते हुए उनका मानदेय भी तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर 57 हजार 700 रुपये कर दिया है. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लोक सम्पर्क विभाग के उप-निदेशक डॉ. दीपक राय ने बताया कि एसएफएस शिक्षकों की बहुत पुरानी मांग को पूरा करते हुए उनकी पदोन्नति का रास्ता साफ कर दिया है.
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मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार जो एसएफएस शिक्षक एपीआई स्कोर को पूरा करते  हैं वो कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति के लिए अपने आवेदन 15 अक्टूबर तक स्थापना शाखा को भेज सकते हैं. इन दोनों एतिहासिक फैसला लेने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एसएफएस शिक्षकों और कांट्रेक्ट पर लगे शिक्षकों ने कुलपति डॉ. नीता खन्ना और कुलसचिव प्रो. भगवान सिंह चौधरी का आभार प्रकट किया है. इस फैसले से एसएफएस शिक्षकों और कांट्रेक्ट पर लगे शिक्षकों में खुशी की लहर है.
पहले भी ले चुकी हैं बड़े फैसले


इसके पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लोओसीएफ-लर्निंग आउटकम आधारित शिक्षा (ओबीई) पाठ्यक्रम को लागू किया गया था. जिसमें केयू शिक्षक विद्यार्थियों को सिखाने के साथ ही अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना होता है, जिसकी जवाबदेही शिक्षक की ही नहीं, बल्कि विभागाध्यक्ष और संबंधित डीन की भी होती है. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. नीता खन्ना ने इसके बारे में बताया था कि इस प्रणाली को विश्वविद्यालय में लागू करने से विद्यार्थियों को परीक्षा संबंधित सभी समस्याएं दूर होंगी और परिणामों में पारदर्शिता आएगी. छात्र समझ सकेंगे कि वे क्या उम्मीद करते हैं, और शिक्षक यह समझ सकेंगे कि उन्हें पूरे पाठ्यक्रम में क्या पढ़ाने व बदलाव करने की आवश्यकता है.
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