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गांधी@150: अफ्रीका ही नहीं हरियाणा के इस रेलवे स्टेशन से भी जुड़ा है अंग्रेजों और गांधीजी का किस्सा

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Updated: October 2, 2019, 3:18 PM IST
गांधी@150: अफ्रीका ही नहीं हरियाणा के इस रेलवे स्टेशन से भी जुड़ा है अंग्रेजों और गांधीजी का किस्सा
हरियाणा के इसी रेलवे स्टेशन पर विदेश से लौटने के बाद पहली बार महात्मा गांधी की गिरफ्तारी हुई थी. (File photo)

विदेश से लौटने के बाद भारत में गांधीजी की पहली गिरफ्तारी हरियाणा (Haryana) के एक छोटे से शहर के रेलवे स्टेशन पर हुई थी. इस घटना को लगभग 100 साल पूरे हो चुके हैं.

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  • Last Updated: October 2, 2019, 3:18 PM IST
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नई दिल्ली. मोहनदास करमचंद गांधी (Mahatma Gandhi) पूरी दुनिया में सत्य और अहिंसा के नायक के रूप में प्रसिद्ध हैं. उन्होंने सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजों को भारत (India) छोड़ने पर मजबूर किया था. यूं तो गांधीजी के साथ देश-विदेश के तमाम किस्से जुड़े हैं. साउथ अफ्रीका (South Africa) के रेलवे स्टेशन (Railway Station) पर ट्रेन (Train) से धक्का देने की घटना जगजाहिर है, लेकिन यह बहुत कम लोगों को मालूम है कि विदेश से लौटने के बाद भारत में गांधीजी की पहली गिरफ्तारी हरियाणा (Haryana) के एक छोटे से शहर के रेलवे स्टेशन पर हुई थी. इस घटना को लगभग 100 साल पूरे हो चुके हैं.



100 साल पहले भारत में 10 अप्रैल 1919 को अंग्रजों ने पहली बार गांधीजी को गिरफ्तार किया था. गांधीजी उस वक्त रॉलेट एक्ट के विरोध में पंजाब जा रहे थे. ब्रिटिश सरकार ने स्वाधीनता आंदोलन को कुचलने के लिए रॉलेट एक्‍ट बनाया था. 6 अप्रैल, 1919  को इस एक्ट के विरोध में देशव्यापी हड़ताल हुई थी.

इसलिए पंजाब जाना जरूरी हो गया था गांधीजी का

लाहौर एवं पंजाब में अंग्रेजों ने भीड़ पर गोलियां चलवाई थीं. महात्मा गांधी हड़ताल के बाद के हालात का जायजा लेने के लिए मुंबई से पंजाब और लाहौर के लिए रवाना हुए थे. यह खबर सुनकर ब्रिटिश सरकार ने उनके पंजाब प्रवेश पर रोक लगा दी थी. इस पाबंदी को अनदेखा कर गांधीजी मुंबई से ट्रेन द्वारा पंजाब के लिए निकल पड़े.

रॉलेट एक्ट के विरोध में गांधीजी पंजाब जा रहे थे, लेकिन अंग्रेजो ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. (File photo)


अंग्रेज अफसरों ने ऐसे गिरफ्तार किया था गांधीजी कोजैसे ही उनकी ट्रेन दिल्‍ली के नजदीक पलवल रेलवे स्टेशन पर पहुंची, ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. तारीख थी 10 अप्रैल 1919. यह स्‍थान राष्ट्रीय राजधानी से करीब 60 किलोमीटर दूर मथुरा के रास्‍ते में पहले पड़ता है. पलवल पहले गुड़गांव फिर फरीदाबाद का हिस्सा रहा. अब यह जिला बन गया है.

पलवल स्टेशन पर आज भी इस तरह से ताजा है यह घटना

मुंबई-दिल्ली रेलवे रूट पर स्थित पलवल स्टेशन आज भी इस महान घटना की गवाही दे रहा है. स्टेशन पर इस घटना की याद में गांधीजी की फोटो और गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेज लगाकर उसके बारे में न केवल जानकारी दी गई है, बल्कि स्मारक भी बनवाया गया है.

गांधीजी मुम्बई से पंजाब जा रहे थे जब उन्‍हें पलवल स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया और दोबारा से मुम्बई में जाकर छोड़ गय था. (File Photo)


गिरफ्तारी के बाद गांधीजी को ले जाया गया था मुंबई

गिरफ्तारी के बाद पुलिस गांधीजी को मुंबई ले गई और 11 अप्रैल 1919 को वहीं पर उन्हें रिहा किया गया. इससे पहले 16 अप्रैल 1917 को चंपारण से पुलिस ने उन्हें जिला बदर करने के आदेश दिए थे, लेकिन वह गिरफ्तार नहीं हुए थे. हालांकि, इससे पहले उनकी छह गिरफ्तारियां दक्षिण अफ्रीका में हुई थीं. दक्षिण अफ्रीका में उनके जीवन की पहली गिरफ्तारी 10 जनवरी 1908 को हुई थी.

इसलिए रॉलेट एक्ट का विरोध कर रहे थे गांधीजी

भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के मकसद से मार्च 1919 में ब्रिटिश गवर्नमेंट में रॉलेट एक्ट बनाया था. यह एक्ट अराजकता और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम, 1919 के नाम से लगाया जाता था. यह कानून सर सिडनी रोलेट की अध्यक्षता वाली समिति की शिफारिशों के आधार पर बनाया गया था.

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First published: October 2, 2019, 8:05 AM IST
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