OMG: हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में फटी धरती, दहशत में लोग
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OMG: हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में फटी धरती, दहशत में लोग
धरती फटने से दहशत में लोग

जानकारी के मुताबिक खेड़ी कांटी गांव के सोमेश्वर मंदिर के पास रहस्यमयी परिस्थियों में करीब पांच-छह एकड़ की लंबाई से धरती फट (Land Torn) गई.

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  • Last Updated: July 14, 2020, 12:54 PM IST
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महेंद्रगढ़. हरियाणा के महेन्द्रगढ़ (Mahendergarh) जिले के गांव खेड़ी से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. महेंद्रगढ़ के अन्तिम छोर पर बसे अटेली खंड के गांव खेड़ी-कांटी में करीब चार-पांच एकड लम्बी सर्पाकार जमीन फट (Land torn) गई. घटना  गत 9 जुलाई की बताई जा रही है. बकरी चराने वाले चरवाहों ने गांव के लोगों को बताया तब शुक्रवार को यह जानकारी सामने आई. अब लोग इसे देखने आ रहे है. हालांकि महेंद्रगढ़ जिले में करीब एक दशक पहले भी इस प्रकार की घटना घटित हो चुकी है. अभी तक इसके कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है.

जानकारी के मुताबिक खेड़ी कांटी गांव के सोमेश्वर मंदिर के पास रहस्यमयी परिस्थियों में करीब पांच-छह एकड़ की लंबाई से धरती फट गई. जिसको सबसे पहले एक चरवाह ने देखा. गांव में जाकर उसने अन्य लोगों को भी बताया. लोगों ने जैसे ही उस जगह को देखा तो लोग हैरान रह गए.

गांव के सरपंच नरेन्द्र सिंह चौहान बताते कि चरवाहों के अनुसार मंगलवार से पूर्व यहां सब सामान्य था. इससे पूर्व सोमवार को भूकम्प आया था. मंगलवार सुबह जब वहां बकरी चराने चरवाहे गये तब जमीन फटी हुई थी. उन्होंने गांव के लोगों को बताया तब यह बात धीरे धीरे मीडिया तक पहुंची. वहीं गांव के ही कुछ लोगों का कहना था कि यहां पर पानी की पाइप दबाई गई है. जिस वजह से यह जमीन अंदर धंस गई है.



पाइप लाइन से कोई संबंध नहीं
जब इस धटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया तो पाया कि पाइप लाईन से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है. जमीन सर्प की तरह आड़ी तिरछी फटी है, एक दम सीधी नहीं है. फिर कही सामान्य है तो कही चौड़ी दरार है. बणी जिसमें जमीन फटी है वहां के उत्तर दिशा में खेत में एक पुराना ब्राह्मणों को कुंआ था जिसे वर्षो पूर्व दबा दिया गया था. इसमें आई दरारों में भी बरसाती पानी जाने से वह बैठ गया है.

कहीं-कहीं गहरी हैं दरारें

बणी के दक्षिण दिशा में खेत में भी दरार देखी जा सकती है. हालांकि इस दरार की गहराई कही ज्यादा तो कही कम है. इसी प्रकार चौड़ाई कही डेढ़ फुट तो कही अगूंठे जितनी है. वहीं कुछ लोग इसे प्राकृतिक आपदा के रुप में देख रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि ट्यूबवेलों द्वारा जमीन से पानी के अत्याधिक दोहन भी एक मुख्य कारण हो सकता है. किसी प्रकार की गैस निकलने की बात देखने को नहीं मिली.

भूकंप से दरारें आने की संभावना कम

वहीं खेड़ी-कांटी में फटी जमीन के पास प्रसिद्ध सोमेश्वर सरोवर(जोहड़) है जहां बरसाती पानी के साथ आजकल नहरी पानी डाला जाता है. उसे भी भूकम्प और जमीन से पानी के अत्याधिक दोहन से भी जोड़कर देखा गया था और इसे भी देखा जा रहा है. अभी तक इसके सही कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है. गांव खेड़ी कांटी के सरपंच नरेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि इसकी सूचना प्रशासन को दे दी गई थी. शनिवार दोपहर बाद कनीना के उपमण्डल अधिकारी तथा अटेली तहसीलदार ने मौके का मुआयना किया. बीडीपीओ ओमप्रकाश ने निरीक्षण करने के बाद बताया कि इसके नीचे पानी की लाइन भी दबी हो सकती है या बरसात की वजह से भी हो सकता भूकंप की तीव्रता इतनी नहीं थी उसकी संभावना कम है.
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