नूंह में डिप्थीरिया से 10 बच्चों की मौत, दर्जनों पीड़ित

मरने वाले या पीड़ित बच्चों की उम्र 2 -10 वर्ष के आसपास है. पशुओं में इस बीमारी से मौतों का सिलसिला तो पुराना है, लेकिन इंसानों की जान भी बीमारी से खतरे में पड़ गई है.

Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: October 1, 2018, 4:34 PM IST
नूंह में डिप्थीरिया से 10 बच्चों की मौत, दर्जनों पीड़ित
डीप्थीरिया से 10 बच्चों की मौत
Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: October 1, 2018, 4:34 PM IST
डिप्थीरिया (गलघोटू) की बीमारी बच्चों की जान पर भारी पड़ रही है. नूंह जिले के नूंह और पुन्हाना खंड में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है. गलघोटू की बीमारी से मौत होने का यह पहला मामला है. स्वास्थ्य विभाग मौत के कारणों और बीमारी का पता लगाने में जुट गया है. आशंका स्वास्थ्य विभाग को भी है कि मौतों की वजह डिप्थीरिया है. अब जांच के बाद इस पर सिर्फ मोहर लगनी बाकि है.

मरने वाले या पीड़ित बच्चों की उम्र 2 -10 वर्ष के आसपास है. पशुओं में इस बीमारी से मौतों का सिलसिला तो पुराना है, लेकिन इंसानों की जान भी बीमारी से खतरे में पड़ गई है. स्वास्थ्य विभाग ने मौत के आंकड़ों को देखते हुए टीमें जांच के लिए उन इलाकों में भेज दी हैं, जहां गलघोटू के केस पाए गए हैं.

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जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉक्टर लोकवीर सिंह के मुताबिक बीमारी तो पहले भी होती थी, लेकिन मौत नहीं हुई थी. जिले में दस बच्चों की जान जाने की बात सामने आई है और 21 बच्चों को जांच में बीमारी के लक्षण मिले हैं. बीमारी से ग्रसित बच्चों का आंकड़ा बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीम भेजकर जांच शुरू कर दी है. जानलेवा बीमारी जिन गांवों में सामने आई है. उसमें ग्रामीण बीमारी और जान जाने के डर से भयभीत दिखाई दे रहे हैं. 31 बच्चों में से मरने और बीमारी से ग्रसित बच्चियों की संख्या 11 बताई जा रही है, तो 20 लड़के शामिल हैं.

स्वास्थ्य विभाग बीमारी की जांच से लेकर निपटने का दावा कर रहा है, लेकिन लोगों को जान बचाने के लिए निजी अस्पतालों में इलाज के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. गलघोटू की बीमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और हरियाणा के नूंह जिले में तेजी से बढ़ रही है. मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है जो चिंता का विषय बनता जा रहा है.
First published: October 1, 2018, 4:31 PM IST
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