डिप्थीरिया से मरने वालों की संख्या हुई 22, बीमारी की चपेट में आये 83 बच्चे
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डिप्थीरिया से मरने वालों की संख्या हुई 22, बीमारी की चपेट में आये 83 बच्चे
डिप्थीरिया से अबतक 18 मौतें

पशुओं में इस बीमारी से मौत का सिलसिला तो पुराना है, लेकिन इंसानों की जान भी बीमारी से खतरे में पड़ गई है.

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डिप्थीरिया (गलघोटू) की बीमारी बच्चों की जान पर भारी पड़ रही है. नूंह जिले के नूंह और पुन्हाना खंड में 22  बच्चों की मौत हो चुकी है. इतना ही पीड़ितों का आंकड़ा बढ़कर 83  तक पहुंच गया है. गलघोटू की बीमारी से मौत होने का यह पहला मामला बताया जा रहा है, जिन मौतों को पहले आशंका से जोड़कर देखा जा रहा था ,अब उस पर लगभग मोहर लग चुकी है. मरने वाले या पीड़ित बच्चों की उम्र 2 -17  वर्ष के आसपास है.

पशुओं में इस बीमारी से मौत का सिलसिला तो पुराना है, लेकिन इंसानों की जान भी बीमारी से खतरे में पड़ गई है. अकेले दिहाना गांव में ही चार बच्चे डिप्थीरिया की वजह से काल के गाल में समां चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग ने मौत के आंकड़ों को देखते हुए टीमें जांच के लिए उन इलाकों में भेज दी हैं, जहां गलघोटू के केस पाए गए हैं. शुरुआत में जिले में दस बच्चों की जान जाने की बात सामने आई थी और 35 बच्चों को जांच में बीमारी के लक्षण पाए गए थे.

गलघोंटू की चपेट में नूंह, अबतक 18 बच्चों की मौत



लेकिन उसके बाद से बीमार और मौत होने का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीम भेजकर जांच शुरू कर दी है. जानलेवा बीमारी जिन गांवों में सामने आई है, उसमें ग्रामीण बीमारी और जान जाने के डर से भयभीत दिखाई दे रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने करीब 26 गांव चिंहित किये हैं, जिनमें डिप्थीरिया की बीमारी पाई गई है.
83 बच्चों में से मरने और बीमारी से ग्रसित बच्चियों की संख्या दर्जन भर से अधिक बताई जा रही है, तो करीब दो दर्जन से अधिक लड़के शामिल हैं. गलघोटू की बीमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और हरियाणा के नूंह जिले में तेजी से बढ़ रही है. मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है , जो चिंता का विषय बनता जा रहा है. बता दें कि शुरू में महज 31 केस थे, जो बाद में 36 तो अब 60 से बढ़कर 83 तक पहुंच गए हैं.
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