कड़कड़ाती ठण्ड में खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर सरकारी स्कूल की 700 छात्राएं
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कड़कड़ाती ठण्ड में खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर सरकारी स्कूल की 700 छात्राएं
जमीन पर बैठी छात्राएं

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं का नारा देनी वाली भाजपा सरकार को मेवात की बेटियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि या तो सरकार हमारे स्कूल का निर्माण कराये अन्यथा सभी लड़कियां सड़कों पर भीख मांगकर अपना स्कूल बनवाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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नूंह जिले के पिनगवां राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के भवन के टूटने से अध्यापकों और बेटियों को तालीम हासिल करने में बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. सर्दी के मौसम में कड़ाके की ठण्ड में जिस कन्या प्राइमरी में अस्थाई तौर पर कक्षाएं लगाई जा रही हैं, वहां पर कमरों का अभाव है. खुले आसमान के निचे जमीन पर बैठकर पढाई करने पर छात्राएं मजबूर है.

इस समस्या से प्राइमरी स्कूल की छात्राओं के साथ-साथ 6ठीं-12वीं कक्षा तक की करीब 1100 से अधिक छात्राओं हैं. राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 700  लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं. मीडिया की सुर्ख़ियों में स्कूल आया तो उसे गत फरवरी माह में कंडम घोषित कर तुड़वा दिया.

विभाग ने दो मंजिला राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय बनवाने के लिए करोड़ों रुपये की राशि मंजूर कर दी, लेकिन करीब 11 माह बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं का नारा देनी वाली भाजपा सरकार को मेवात की बेटियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि या तो सरकार हमारे स्कूल का निर्माण कराये अन्यथा सभी लड़कियां सड़कों पर भीख मांगकर अपना स्कूल बनवाने पर मजबूर होना पड़ेगा.



बता दें कि पुराना भवन कमरों और परिसर के लिहाज से काफी कम था और बरसात में तो स्कूल में पानी तालाब का रूप ले लेता था. अधिकतर बेटियों को खुले आसमान के नीचे पढ़ना पड़ता था. लड़कियों के स्कूल की समस्या को एक बार नहीं बार-बार मीडिया में मामला आया तो शिक्षा विभाग की नींद खुली. शिक्षा विभाग ने नए भवन के लिए करोड़ों की राशि भेज दी और पुराने भवन का टेंडर लगाकर उसे फरवरी माह में तुड़वा दिया गया है. भवन को तोड़े हुए 11  माह से अधिक समय बीत गया है ,लेकिन नए भवन के नाम पर अभी तक एक ईंट भी नहीं लगी है.
स्टाफ की कमी है , बैठने की जगह नहीं है. ठंड में जमीन पर बैठकर पढाई करनी पड़ रही है. अध्यापक और छात्राओं को झाड़ू लगानी पड़ती है. छोटे बच्चों के शोर और जगह के अभाव से बड़े-छोटे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है. टूटे भवन की जगह अब जुआरियों का ठिकाना बनता जा रहा है. लड़कियों ने तो सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे पर ही सवाल खड़े कर भाजपा को मुसीबत में डालने का काम किया है.

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