ऑस्ट्रेलिया की शानो शौकत छोड़ मेवात बदलने आए वाजिब अली, बने विधायक
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ऑस्ट्रेलिया की शानो शौकत छोड़ मेवात बदलने आए वाजिब अली, बने विधायक
वाज़िब अली

वाजिब अली एनआरआई हैं. ऑस्ट्रेलिया में एक कामयाब व्यवसायी हैं. अपने दूसरे भाइयों इनताज़ खान और सरताज खान के साथ ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न में कई शिक्षण संस्थान चलाते हैं.

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हाल में ही संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में राजस्थान के भरतपुर जिले की नगर विधानसभा सीट से 36 साल के वाज़िब अली का विधायक निर्वाचित होना कई मायनों में खास है. विधायक तो सूबे में 199 बने हैं और बसपा से भी आधा दर्जन विधायक जीतकर आए हैं, लेकिन वाजिब अली ऑस्ट्रेलिया की शानोशौकत छोड़कर हरियाणा के मेवात इलाके खासकर मेव समुदाय की कायापलट करने की ठानकर आए हैं. फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली वाजिब अली ने अपनी मिट्टी की खुशबू को कभी नहीं भुलाया, तभी तो ऑस्ट्रेलिया में रहकर भी उन्हें इलाके की पिछड़ेपन की याद सताती रही.

वाजिब अली एनआरआई हैं. ऑस्ट्रेलिया में एक कामयाब व्यवसायी हैं. अपने दूसरे भाइयों इनताज़ खान और सरताज खान के साथ ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न में कई शिक्षण संस्थान चलाते हैं. उनके वहां सात कॉलेज और एक स्कूल है. जिसमें हजारों बच्चे पढ़ते हैं. वाजिब अली को वहां ग्रीन कार्ड मिला हुआ है. उनके एक भाई इनताज़ खान मेलबॉर्न शहर के पार्षद (काउंसलर) हैं और इनका परिवार मेलबॉर्न शहर में 9.5 मिलियन डॉलर की कीमत वाले घर में रहता है.

इनके बड़े भाई इनताज खान 20 साल पहले भारत के सबसे पिछड़े इलाके मेवात, राजस्थान से ऑस्ट्रेलिया गए थे. तब तक इनताज़ खान 12वीं और सरताज खान सिर्फ आठवीं की पढ़ाई कर चुके थे. वाजिब अली ने सिडनी से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में मास्टर किया है.



विदेश में पढ़ने वाले वाजिब अली लौट आए और 2013 में उन्होंने एनएलपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्हें सिर्फ 36 हजार वोट मिले. इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया और 26 हजार वोटों से जीतकर विधायक बन गए. 2018 के चुनावी हलफनामा में 14 करोड़ की सम्पति बताने वाले वाजिब अली पहले से ही यहां रोल मॉडल हैं.
वाजिब अली कहते हैं, “एक तरफ ऑस्ट्रेलिया है, जहां विकास ही विकास है और दूसरी तरफ अपना मेवात है. जिसे आप सबसे अधिक पिछड़ा कह सकते हैं, मुझे इस इलाके की बेहतरी के लिए काम करना है."


वाजिब अली को लेकर लोगों में उत्सुकता थी, उन्हें अक्सर फूलों में लाद दिया जाता था. दिल्ली से लगभग 200 किमी दूर नगर विधानसभा खराब रास्ते, खंडहर इमारतें, हर बात में बेहद पिछड़े हुए इलाके के स्थानीय लोग मेवाती होने का आभास कराते हैं. मेवात का यह इलाका राजस्थान और हरियाणा के सीमा बंधन तोड़कर मेव बिरादरी के नाम पर एक है और वाजिब अली इनकी उम्मीद बन गए हैं.

वाजिब अली को जात-पात और संप्रदाय वाद से हटकर सबका समर्थन मिला. लाखों की आबादी और तीन राज्यों तक फैले मेवात में वाजिब अली बिरादरी (मेव) में अकेले विधायक नहीं हैं, मगर आशा उन्हीं से सबसे ज्यादा है.

वाजिब अली के बारे मेवात के युवा साथी बताते हैं कि उनकी सादगी, उनका रहन सहन, बात करने का अंदाज, दिल को छू जाता है. स्थानीय लोगों में उनकी दीवानगी है. यहां आम लोगों के बीच से निकलकर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में झंडे गाड़े हैं. युवाओं को उनसे सबसे ज्यादा उम्मीद है, वो सब वाजिब बनना चाहते हैं. चुनाव के दौरान उनके भाषण, पहनावा सब कुछ स्थानीय लगता था.

मेवात के इस इलाके में लड़कियां स्कूल नहीं जाती और लड़के कॉलेज तक नही पहुंचते. सड़कें बदतर हैं और पीने का पानी दूषित है, कुछ गांवों में बिजली है, जबकि अधिकतर अंधेरे में डूबे रहते हैं. इमरान बताते हैं, “ज्यादातर मेव मेलबॉर्न उच्चारण भी नहीं कर पाते हैं. मगर क्रिकेट की वजह से ऑस्ट्रेलिया को जानते सब हैं."

मेलबॉर्न से भरतपुर तक का सफर आश्चर्यचकित करता है. विधायक वाजिब अली कहते हैं, “मैं अपने इलाके के लिए कुछ करना चाहता हूं, मेरा करियर सेटल था. अपना बिजनेस बहुत अच्छा है, वहां हम क्वालिटी शिक्षा पर काम करते हैं और हजारों बच्चे हमारे कॉलेजों में पढ़ते हैं. मैं चाहता हूं कि यहां के नौजवान अधिक से अधिक पढ़े और इलाके का नाम करें, हम यहां कुछ कॉलेज भी शुरू करेंगे."

चुनाव प्रचार के दौरान वाजिब अली ने खुद को जमीन से जोड़े रखा-
पहले बहुजन समाज पार्टी ने वाजिब अली का टिकट काट दिया मगर बाद में फिर उन्हें ही प्रत्याशी बना दिया. बसपा के राजस्थान प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव धर्मवीर अशोक कहते है कि यह अतीत की बात है. फिलहाल वो युवाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद हैं, वो पढ़े-लिखे और परिपक्व हैं. उनके पास दृष्टिकोण हैं और वो कामयाब बिजनेसमैन साबित होने के बाद गरीबो, दलितों, वंचितों की सेवा करने आए हैं.

वाजिब अली राजस्थान में बसपा के 6 विधायकों में से एक हैं और उनकी पार्टी ने कांग्रेस सरकार के समर्थन का ऐलान किया है. वाजिब अली के मंत्रिमंडल में शामिल होने की भी संभावना है. नगर विधानसभा के युवाओं ने वाजिब अली की जीत को लेकर बहुत अधिक काम किया. उन्हें 40% मत मिले, पिछली बार वो भाजपा की अनीता सिंह से हार गए थे. अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के मत भी उनकी और जोड़ दे तो उनको 80% मतों का हिस्सा मिलता है.

परिवार सहित भरतपुर लौटे-
वाजिब अली ने समाजवादी पार्टी के नेम सिंह फौजदार को 26000 वोटों से हराया, भाजपा की विधायक अनीता सिंह तीसरे स्थान पर पहुंच गई. इस चुनाव प्रचार में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नेम सिंह फौजदार के समर्थन में पहुंचे, मगर युवा अखिलेश भी वाजिब अली की युवाओं की फौज को प्रभावित नहीं कर सके. वाजिब के साथी और करीबी मित्र नाहिद हसन उत्तर प्रदेश के कैराना से विधायक हैं.
वाजिब कहते हैं, “मैं हर घर जाना चाहता था. मैं लोकतंत्र की ताकत समझता हूं, अब मेरे पास मेरे इलाके की आवाज़ है, जाहिर है मैं अपने इलाके में सबसे ज्यादा काम शिक्षा के लिए करना चाहूंगा.”


ऑस्ट्रेलिया में रहने के बावजूद स्थानीय मेवात वाली भाषा बोल लेने वाले वाजिब अली कहते हैं, "मेरा माता पिता सहित मेरा परिवार यहीं रहता है. मैं ऑस्ट्रेलिया पढ़ने गया था, जहां अपने भाइयों के साथ काम में हाथ बांटने लगा. मेरे नगर और ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न में जमीन और आसमान का फर्क है. मैं नगर को मेलबॉर्न बनाना चाहता हूं."


वाजिब मानते है कि उन्हें हर बिरादरी से समर्थन मिला, खासकर युवाओं और महिलाओं ने उन्हें एकतरफा वोट किया. जिसकी बदौलत वह विधायक बन सके. वाजिब अली अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण काउंसिल के भी सदस्य हैं और वो चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में बने किसानों के लिए नए वीजा नियमों का भरतपुर के किसानों को लाभ मिले. वाजिब के भाई सरताज खान पूरे चुनाव के दौरान उनका प्रचार का काम देखते रहे. वाजिब को हर तरफ से शानदार समर्थन मिला.

भाई इनताज खान ने वाजिब को किया चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित
वाजिब अली के भाई इनताज खान ने वाजिब को चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया. भाई इनताज खान ने वाजिब अली से कहा, "ऑस्ट्रेलिया में रहने की वजह से विकास किया है और अच्छा नाम कमाया है. मगर हम जो कुछ भी हैं, अपने देश भारत की वजह से हैं." इनताज ने बताया कि वाजिब अपने इलाके में आकर अपने लोगों के लिए काम करना चाहता था, जिसका मौका उसे मिल गया है. अब उसे खुद को साबित करना है. चुनाव प्रचार के दौरान वाजिब ने अपनी जड़ों से जुड़ाव का ख्याल रखा, वो स्थानीय जबान में बात करते थे और उन्होंने आम लोगों जैसा दिखने की कोशिश की वो जहां जाते थे लोग उन्हें फूल मालाओं में लाद देते थे. वाजिब कहते हैं जनता ने जो फूल माला पहनायी हैं, अब इन फूलों का बोझ बढ़ गया है, जिसे मुझे सेवा कर उतारना है.

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