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शहीद खुर्शीद अहमद का शव पहुंचा पैतृक गांव, नम आंखों से ग्रामीणों ने दी अंतिम विदाई

Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: October 16, 2019, 9:36 AM IST
शहीद खुर्शीद अहमद का शव पहुंचा पैतृक गांव, नम आंखों से ग्रामीणों ने दी अंतिम विदाई
शहीद का शव गांव पहुंचते ही माहौल हुआ गमगीन

जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर बीएसएफ के जवानों द्वारा रायपुर गांव में लाया गया, तो पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया. शहीद का शव पहुंचने की खबर जैसे ही ग्रामीणों व इलाके के लोगों को लगी तो रायपुर गांव में भारी भीड़ जुट गई.

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नूंह. असम के नक्सल प्रभावित इलाके में पेट्रोलिंग के दौरान शहीद (Martyr) हुए बीएसएफ हवलदार खुर्शीद अहमद का शव मंगलवार को देर शाम उनके पैतृक गांव रायपुर पहुंचा. जहां बीएसएफ (BSF) के जवानों ने सलामी दी और पूरे  राजकीय सम्मान के साथ शहीद को सुपुर्द ए खाक किया गया. इस दौरान डीएसपी (DSP) अशोक कुमार अपने पुलिस (Police) जवानों के साथ गांव में मौजूद रहे.

जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर बीएसएफ के जवानों द्वारा रायपुर गांव में लाया गया, तो पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया. शहीद का शव पहुंचने की खबर जैसे ही ग्रामीणों व इलाके के लोगों को लगी तो रायपुर गांव में भारी भीड़ जुट गई. शहीद का  शव पहुंचा तो शुरुआत में वे कुछ बातों को लेकर नाराज दिखे और शहादत पर ही उन्होंने सवाल खड़े कर दिए. हालांकि कुछ पूर्व सैनिकों वे गणमान्य लोगों के समझाने के बाद मामला शांत हो गया और शहीद को अंतिम विदाई देने की प्रक्रिया शुरू हो गई.

नक्सली हमले में हुए शहीद

जानकारी के मुताबिक यह घटना असम जिले के सिलचर इलाके के आसपास गत 14 अक्टूबर को उस समय घटी जब बीएसएफ के 3 जवान एनआरसी ड्यूटी के लिए पेट्रोलिंग कर रहे थे. उसी दौरान नक्सलियों की गोली ने खुर्शीद अहमद की जान ले ली. परिजनों को जैसे ही बीएसएफ के जवानों ने घटना की जानकारी दी तो उनके पैरों तले की जमीन निकल गई.

शहीद को अंतिम विदाई देते ग्रामीण


नक्सल इलाकों में मंडराता रहता है मौत का साया

बीएसएफ के एएसआई मंगल मशीह ने पत्रकारों को बताया कि नक्सल प्रभावित इलाके में हर वक्त जवानों पर मौत का साया मंडराता रहता है. गत 14 अक्टूबर को पेट्रोलिंग के दौरान खुर्शीद अहमद की शहादत हुई, जब दुश्मन की गोली ने उन्हें लहूलुहान कर दिया. उन्होंने बताया कि शहीद खुर्शीद अहमद के शव को पहले सिलचर लाया गया. उसके बाद कोलकाता लाया गया, फिर हवाई जहाज से दिल्ली एयरपोर्ट पर लाया गया. जहां फ्लाइट कई घंटे देरी से पहुंची और जैसे ही शहीद का शव एयरपोर्ट पर आया तो बीएसएफ के जवानों ने उसे सलामी देते हुए उनके पैतृक गांव रायपुर का रुख कर लिया.दो बच्चों का पिता था शहीद खुर्शीद

बता दें की नूह जिले के पुनहाना खंड के गांव रायपुर में जन्मे खुर्शीद अहमद 1989 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे. तीन भाइयों में खुर्शीद अहमद अकेले सरकारी सेवा में कार्यरत है खुर्शीद अहमद दो बच्चों के पिता थे और अपने परिवार के साथ कई सालों से दिल्ली में रह रहे थे. खुर्शीद अहमद कि जिस तरह से शहादत हुई उस पर पूरे गांव के लोगों को गर्व है, लेकिन परिवार के साथ दिल्ली में पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों ने कहा कि शुरुआत में खुर्शीद अहमद के खुदकुशी करने की खबर दी गई थी और बाद में शहादत की खबर आई तो दिल और दिमाग अलग - अलग सोचने लगे, जिसे लेकर अंतिम विदाई देने में भी करीब 1 घंटे का विलंब हुआ.

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First published: October 16, 2019, 9:36 AM IST
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