दिव्यांग का आरोप, कहा- सिर्फ आश्वासन ही मिला, नियुक्ति पत्र नहीं'

पीड़ित दिव्यांग शौकीन कोटला

पीड़ित दिव्यांग शौकीन कोटला

नूंह मेवात जिले में सीएम खट्टर की घोषणा के एक साल बाद भी दिव्यांग शौकीन कोटला को नौकरी नहीं मिली है.

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हरियाणा के नूंह मेवात जिले में सीएम खट्टर की घोषणा के एक साल बाद भी दिव्यांग शौकीन कोटला को नौकरी नहीं मिली है. लिहाजा, नौकरी की आस लिए दिव्यांग पिछले एक साल से लघु सचिवालय में अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है.



पूरा मामला



दरअसल, बीते 17 नवंबर 2017 को दो दिन के मेवात प्रवास पर आए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात और बातचीत कर दिव्यांग शौकीन कोटला को सीएम से नौकरी का भरोसा मिला था, जिससे वह बेहद उत्साहित था. उस समय दिव्यांग शौकीन कोटला ने साफ छवि और सरल स्वभाव के लिए धनी माने जाने वालेे सीएम खट्टर की काफी प्रशंसा की थी. दिव्यांग ने कहा था कि सीएम मनोहर लाल गरीबों के सच्चे हितैषी हैं. इसी कारण सीएम ने महज पहली ही मुलाकात में डीसी नूंह को सरकारी विभाग में नौकरी देने के आदेश देकर लाखों दिव्यांगों का दिल जीत लिया था.





बता दें कि दिव्यांग शौकीन कोटला ग्रेजुएट है. सामाजिक कार्यों में भी शौकीन की काफी रूचि है. 23 वर्षीय शौकीन नूंह खंड के कोटला गांव का रहने वाला है. बावजूद इसके एक साल में उसे नौकरी नहीं मिली. इसी का नतीजा था कि बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर से लेकर सूबे का जो भी मंत्री या नेता मेवात आया, उनके पास शौकीन कोटला नौकरी की फरियाद लेकर पहुंच जाया करता था.
बीजेपी नेताओं से मिलकर सीएम मनोहर लाल के नौकरी के भरोसे को भी याद दिलाया, लेकिन अधिकारी शायद सीएम के आदेशों को भी पलीता लगाने से नहीं कतराते. शौकीन को अब उस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार है जब सीएम हरियाणा के आदेशों को अमलीजामा पहनाते हुए उसे नौकरी का पत्र दिया जाएगा या नौकरी का कोई बुलावा आएगा. हालांकि शौकीन का यह भी कहना है कि उसे नेताओं से नैकरी के लिए आश्वासन तो मिलता है, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं मिलता. इसी के साथ उसने जल्द से जल्द सरकार से नौकरी देने की अपील की है.



 



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