दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए मां-बेटियों ने संभाली कमान, महिलाओं को कर रहीं जागरुक

शबाना खान ने कार्यकर्म के दौरान महिलाओं से कहा कि आज वह समय आ गया है कि जब हम महिलाओं को अपनी सोच में परिवर्तन करते हुए यह सोचना ही होगा की दहेज प्रथा एक कलंक और अभिशाप है.

Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: September 25, 2018, 12:16 PM IST
दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए मां-बेटियों ने संभाली कमान, महिलाओं को कर रहीं जागरुक
महिलाओं को जागरुक करती मां-बेटियां
Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: September 25, 2018, 12:16 PM IST
नूंह जिले में दहेज प्रथा के खात्मे और शिक्षा के  बढ़ावे को लेकर घर-घर जाकर मां-बेटियां लोगों को जागरूक कर रही  है. एक संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष सहेली शबाना ख़ान ने अपनी मां और पांच छोटी बहनों के साथ मिल कर इस मुहीम को साकार करने में लगी हुई है.  पिछले 10 दिनों से मेवात के गांव-गांव और घर-घर जाकर मुहीम "दहेज़ नहीं शिक्षा है बेटी का अधिकार" के तहत लोगो को दहेज़ के बुरे परिणाम और बेटियों के लिए शिक्षा का महत्त्व के लिए मेवात की बेटी और महिलाओं को जागरुक कर रहीं हैं.

शबाना खान ने कार्यकर्म के दौरान महिलाओं से कहा कि आज वह समय आ गया है कि जब हम महिलाओं को अपनी सोच में परिवर्तन करते हुए यह सोचना ही होगा की दहेज प्रथा एक कलंक और अभिशाप है. इससे केवल एक नहीं बल्कि दो  परिवारों की बर्बादी हो रही है. अगर बेटी शिक्षित होगी तो वह खुद ही दहेज है.

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घर-घर जागरूकता यात्रा करते वक़्त अपने अनुभव को सांझा करते हुए उन्होंने कहा कि वो सैंकड़ों ऐसी बेटियों से रू-ब-रु हुई है जिनकी सही उम्र में शादी होने के बावजूद भी आज वो पति ससुराल की ठुकराई हुई अपने मां-बाप के घर बैठी है.

बता दें कि शबाना अपनी बहनो और मां के साथ  नूंह के गांव माड़ीखेड़ा, रानीका के दर्जन भर स्कूल में जाकर 5वीं कक्षा से लेकर 10वीं कक्षा के बच्चों और शिक्षकों को दहेज़ प्रथा के बारे में जानकारी दे रही हैं.
First published: September 25, 2018, 12:14 PM IST
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