अंधविश्वास के चलते गई नवजात की जान, नीम हकीम ने की दो बार खतना
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अंधविश्वास के चलते गई नवजात की जान, नीम हकीम ने की दो बार खतना
एक माह के शिशु की मौत के बाद परिवार में मचा कोहराम

पीड़ित परिवार ने बताया कि 60 वर्षीय हक़ीम व जर्राह ममरेज ने 15 दिन पहले ही बच्चे की खतना की थी. उसके बाद वह 27 फरवरी के दिन पड़ौस के एक बच्चे की खतना करने आया. ममरेज उस पहले बच्चे के घर पहुंच गए और बच्चे की खतना में कुछ कमी बताते हुए दोबारा खतना कर डाली.

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एक ओर जहां देश और दुनियां कम्प्यूटर युग में दिनों दिन तरक्की कर रहा है वहीं  मेवात जिले में लोग भी आज रूढ़ीवादी परम्पराओं का हवाला देकर अंधविश्वास का चोला नहीं उतार पा रहे हैं. शिक्षा की कमी होने के कारण हकीमों और झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा ले रहे हैं. मेवात में ऐसे ही नीम-हकीमों के चक्कर में एक मासूम की जान चली गई. पिनगवा खंड के गांव में एक माह के शहजान पुत्र साजिद की की अधिक रक्तस्त्राव से मौत हो गई.

पीड़ित परिवार ने बताया कि 60 वर्षीय हक़ीम व जर्राह ममरेज ने 15 दिन पहले ही बच्चे की खतना की थी. उसके बाद वह  27 फरवरी के दिन पड़ौस के एक बच्चे की खतना करने आया. ममरेज उस पहले बच्चे के घर पहुंच गए और बच्चे की खतना में कुछ कमी बताते हुए दोबारा खतना कर डाली. बच्चे के भारी ब्लीडिंग शुरू हो गई. काफी कोशिशों के बाद भी जब रक्त नहीं रुका तो बच्चे को तुरंत नजदीक के अस्पताल ले जाया गया. यहां भी बात नहीं बनी तो रात 9 बजे मेडिकल कॉलेज नलहड़ लेकर पहुंचे.

यहां बच्चे के स्थिति को देखकर डॉक्टरों ने दिल्ली के लिए रैफर कर दिया लेकिन बच्चे ने दिल्ली पहुंचने से पहले ही 28 फरवरी की सुबह पांच बजे दम तोड़ दिया. परिजनों का आरोप है कि ममरेज जब उनके घर आया तो घर का कोई भी मर्द वहां मौजूद नहीं था सिर्फ महिलाएं मौजूद थीं. परिजनों ने कहा कि एक बार होती है. उन्होंने कहा कि हमने तो अपना बच्चा तो खो दिया लेकिन किसी और मां की कोख न उजड़े, उसके लिए ऐसे नीम-हकीमों के सबको बचने की जरूरत है.




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