महिलाओं को दक्ष बनाने के लिए लाई गई योजना से नहीं हुआ कोई फायदा

कौशल विकास केंद्र की शुरुआत महिलाओं को दक्ष बनाने के लिए की गई थी, लेकिन चंद दिनों बाद ही उन दावों की हवा निकल गई.

Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: November 11, 2018, 6:39 PM IST
महिलाओं को दक्ष बनाने के लिए लाई गई योजना से नहीं हुआ कोई फायदा
महिलाओं को दक्ष बनाने के लिए लाई गई योजना से नहीं हुआ कोई फायदा
Kasim Khan | News18 Haryana
Updated: November 11, 2018, 6:39 PM IST
हरियाणा में नूंह (मेवात) जिले के खेड़ला गांव में वाचनालय (सार्वजनिक पुस्तकालय) और कौशल विकास केंद्र की शुरुआत के समय महिलाओं को दक्ष बनाने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन चंद दिनों बाद ही उन दावों की हवा निकलने लगी.

जिला बाल कल्याण परिषद के जिला अधिकारी विश्वास मलिक इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सबसे ज्यादा अहम किरदार में दिखाई दिए, लेकिन अब तो महिलाओं को धागा, कपड़ा आदि जैसी चीजों के लिए भी अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.

प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान 20 रुपए प्रतिदिन देने का वादा किया गया था, लेकिन पिछले 8-9 महीने से काम कर रही इन महिलाओं को फूटी कौड़ी भी नहीं दी जा रही है.

महिलाओं से शुरुआती दौर में जो वादे किए गए थे, उन पर जिला प्रशासन खरा नहीं उतर पा रहा है. जिले की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, कटिंग आदि में दक्ष बनाने के लिए कौशल विकास केंद्र खोला गया था. बता दें कि जिले में दर्जनभर से ज्यादा कौशल विकास केंद्र खोले जा चुके हैं. सैकड़ों महिलाएं इनमें अपनी आजीविका को बेहतर बनाने के लिए कई गुर भी सीख चुकी हैं.

बहरहाल, इन केंद्रों में प्रशिक्षण लेने के बाद नौकरी और स्वरोजगार की उम्मीद लेकर आई महिलाओं का विश्वास अब डगमगाने लगा है. महिलाओं का कहना है कि खेड़ा खलीलपुर, पिनगवां आदि गांवों में भी कौशल विकास केंद्र खोलकर स्किल डेवलपमेंट योजना को मजबूती देने का दम भरा गया था. तत्कालीन उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा के समय में जिले में सार्वजनिक पुस्तकालय से लेकर कौशल विकास केंद्र खोलने पर पूरा फोकस किया गया था. उनके समय में ही जिले के अधिकतर बड़े-बड़े गांवों में कौशल विकास केंद्र स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए खोले गए.

आपको बता दें कि कौशल विकास केंद्र की शुरुआत में वेतन आदि के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने की थी. उन्होंने अंत्योदय योजना का हवाला देते हुए कहा था कि अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को 20 रुपए प्रतिदिन देने के अलावा सुई-धागा, कपड़े आदि खरीदने के लिए 300 रुपए प्रतिमाह देने की बात कही थी, लेकिन वो वादे महज वादे ही बनकर रह गए.

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