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सर्व कर्मचारी संघ ने नूंह में डीसी आफिस पर किया प्रदर्शन

News18 Haryana
Updated: March 29, 2018, 1:56 AM IST
सर्व कर्मचारी संघ ने नूंह में डीसी आफिस पर किया प्रदर्शन
प्रतीकात्मक तस्वीर.

कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2014 में विधानसभा चुनावों से पहले कर्मचारियों की सभी मांगों को लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद शिक्षा भत्ता, मेडिकल भत्ता तक नहीं दिया है.

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मेवात के जिला मुख्यालय नूंह में लघु सचिवालय पर सर्व कर्मचारी संघ जिला नूंह के सैकड़ों कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन कर नई पेंशन योजना को समाप्त करके पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली, ठेका प्रथा बंद करके स्थायाी रोजगार प्रदान करने तथा राज्य कर्मचारियों की लंबित मांगों को शीघ्र लागू करने की मांग की. इसे लेकर प्रधानमंत्री तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त अशोक शर्मा को ज्ञापन सौंपा.

प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व जिला प्रधान तैयब हुसैन व राज्य मुख्य संगठन सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने किया. उन्‍होंने केंद्र सरकार पर कर्मचारियों की पेंशन समाप्त करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत में ब्रिटिश काल से ही सरकारी कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ के रूप में पेंशन देने का प्रावधान था. देश की आजादी के बाद पेंशन प्रणाली में सुधार करके इसको व्यापक बनाकर पारिवारिक पेंशन को और जोड़ दिया गया.

इस पेंशन की प्राप्ति के लिए कर्मचारियों को अपनी तरफ से कुछ भी सहयोग राशि नहीं देनी पड़ती थी, लेकिन भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 से अंशदायी पेंशन योजना लागू कर दी.

उन्‍होंने कहा कि प्रदेश में यह स्कीम 1 जनवरी 2006 से लागू है. इस स्कीम के तहत कर्मचारियों को प्रतिमाह पेंशन के लिए 10 प्रतिशत राशि अपने वेतन से कटौती कर कर जमा करानी पड़ती है. डंगवाल ने बताया कि अंशदायी पेंशन योजना कुल मिलाकर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है. सरकार का इस पर नियंत्रण नहीं रहेगा, लेकिन केंद्र सरकार पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी एक्ट को पास करके पुरानी पेंशन स्कीम को बंद करने पर आमादा है.

डंगवाल ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2014 में विधानसभा चुनावों से पहले कर्मचारियों की सभी मांगों को लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद शिक्षा भत्ता, मेडिकल भत्ता तक नहीं दिया है.

कर्मचारियों की मुख्य मांगों में 2 वर्ष की सेवाकाल पूर्ण रूप से पूर्ण कर चुके कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पुरानी स्कीम बहाल करने, पंजाब के समान वेतन देने, कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने, निजीकरण पर रोक लगाने, पंचायती पंप ऑपरेटर के वेतन का भुगतान बैंकों के माध्यम से करने जैसी मांगें शामिल हैं.

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First published: March 29, 2018, 1:56 AM IST
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