एनसीआर में रहने वाले करोड़पतियों की पहली पसंद है चंदेनी के गेहूं
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एनसीआर में रहने वाले करोड़पतियों की पहली पसंद है चंदेनी के गेहूं
मेवात क्षेत्र के चंदेनी गांव के खेतों में गेहूं की लहलहाती फसल

देश का किसान जहां भाव और गेंहू को मंडियों में बेचने के लिए खासी परेशानी उठाता है वहीं चंदेनी गांव का गेहूं कटने से पहले ही खरीदने वालों की कमी नहीं रहती.

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मेवात जिले के वैसे तो आधा दर्जन से अधिक गांव की हजारों एकड़ भूमि में देशी गेहूं की एक खास प्रजाति 306 उगाई जाती है लेकिन चंदेनी गांव की सोना उगलने वाली भूमि का देशी गेहूं का पूरे हरियाणा में कोई जवाब नहीं है. गुणवत्ता के साथ बिना खाद तथा बरसात के भरोसे ही यहां की भूमि देशी गेंहू पैदा कर रही है. दरअसल झीलनुमा सैकड़ों एकड़ चंदेनी गांव की भूमि में अरावली पर्वत से बरसात का पानी बहकर इस आकर रुकता है. घासेड़ा, रिठोड़ा इत्यादि गांव में भी इसी पानी से बुवाई होती है. जब पानी सूखने लगता है तब बुवाई होने के बाद बिना सिंचाई तेजी से गेंहू बढ़ता है.

एनसीआर में रहने वाले करोड़पतियों का चंदेनी गांव का गेंहू पहली पसंद है. आम गेहूं से इसके  दाम भी दो गुने हैं लेकिन एक बार खाने के बाद कद्रदानों को बस चंदेनी गांव के गेहूं का स्वाद ऐसा भा जाता है कि मेवात में नौकरी करने वाले अधिकारी, कर्मचारी चंडीगढ़ तक यहीं से देशी गेंहू मंगवाते हैं. चंदेनी गांव के इस गेंहू की फसल को इसल बार सिर्फ नहर का पानी भी नसीब हुआ है. इससे देशी गेहूं की इस किस्म के अच्छे उत्पादन की आस जगी है.

देश का किसान जहां भाव और गेंहू को मंडियों में बेचने के लिए खासी परेशानी उठाता है वहीं चंदेनी गांव का गेहूं कटने से पहले ही खरीदने वालों की कमी नहीं रहती. दाम भी मुहं मांगे मिलते हैं. खास बात यह है कि इस गेहूं की बिना घी के भी रोटी मुलायम, सफ़ेद और चमकदार रहती है. ठंडी रोटी को भी बगैर दांत यानि उम्रदराज व्यक्ति भी आसानी से खा सकता है. कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि चंदेनी के गेंहू का गुणवत्ता और क्वालिटी में कोई मुकाबला नहीं है.




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