दुनिया की पहली इलेक्ट्रिफाइड रेल सुरंग हरियाणा में तैयार, जानें इसकी खासियत
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दुनिया की पहली इलेक्ट्रिफाइड रेल सुरंग हरियाणा में तैयार, जानें इसकी खासियत
डीएफसी का इस्टर्न कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पास दानकुनी से पंजाब के लुधियाना को जोड़ रहा है. (सांकेतिक फोटो)

यह सुरंग मालगाड़ी के लिए बन रही लाइन को दादरी तक ले कर जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि जवाहर लाल नेहरू पोर्ट (Jawaharlal Nehru Port) से दादरी तक का ये प्रोजेक्ट अगले साल तक पूरा हो जाएगा.

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  • Last Updated: July 25, 2020, 10:31 AM IST
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मेवात. रेलवे के वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर (Western Freight Corridor) की सबसे बड़ी रुकावट शुक्रवार को ख़त्म हो गयी है. अरावली की पहाड़ियों को चीरने के लिए जैसे ही यहां धमाका किया गया, DFC के सभी कर्मचारी खुशी से झूम उठे. हरियाणा के सोहना (Sohna) में मेवात इलाके में पड़ने वाली यह सुरंग वेस्टर्न DFC की सबसे बड़ी सुरंग है. इसकी लंबाई क़रीब 1 किलोमीटर है. शुक्रवार को डायनामाइट ब्लास्ट (Dynamite Blast) के साथ ही इसका सोहना छोर और पृथला छोर एक दूसरे से मिल गया. अरावली की इस पहाड़ी में सुरंग बनाने के लिए एक साल से काम चल रहा था. इस सुरंग की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह दुनिया की पहली ऐसी इलेक्ट्रिफ़ाइड रेल सुरंग जिसमें डबल स्टेक कंटेनर चल सकेंगी. यानी इसकी ऊंचाई इतनी रखी गयी है कि एक ऊपर लदा एक कंटेनर भी इस सुरंग गुजर पायेगा.

यह सुरंग मालगाड़ी के लिए बन रही लाइन को दादरी तक ले कर जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि जवाहर लाल नेहरू पोर्ट से दादरी तक का ये प्रोजेक्ट अगले साल तक पूरा हो जाएगा. भारतीय रेल मालगाड़ियों को चलाने के लिए ख़ास रेल लाइन बना रहा है. इस लाइन पर न केवल मालगाड़ियां सरपट दौड़ेंगी बल्कि मौजूदा लाइन से बड़ी संख्या में मालगाड़ियां DFC पर चली जायेंगीं. और रेल ट्रैक पर लोड कम होने से यहां ट्रेनें भी सही समय पर चल सकेंगीं.

कोलकाता के पास दानकुनी से पंजाब के लुधियाना को जोड़ रहा है
डीएफसी का इस्टर्न कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पास दानकुनी से पंजाब के लुधियाना को जोड़ रहा है. 1856 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब को जोड़ेगा. जबकि वेस्टर्न कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक फैला है. 1506 किलोमीटर लंबाई वाली इस लाइन से पूरे एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को बड़ा लाभ मिलने वाला है. इन दोनों कॉरिडोर का काम साल 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है.
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