सोनीपत नगर निगम में आने वाले 13 गांवों के लोग नहीं देंगे हाउस टैक्स, महापंचायत में लिया फैसला

महापंचायत में शामिल तेरह गांव के लोग.
महापंचायत में शामिल तेरह गांव के लोग.

सोनीपत नगर निगम (Sonipat Municipal Corporation) में आने वाले 13 गांवों के लोग एक महापंचायत कर हाउस टैक्स (House Tax) ना भरने का फैसला लिया है. इनकी मांग है कि उन्हें नगर निगम से बाहर किया जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 3:37 PM IST
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सोनीपत. सोनीपत (Sonipat) नगर निगम में पहले शहर के लगते गांवों को निगम में शामिल किया गया था, लेकिन कुछ गांवों को निगम से बाहर कर दिया गया, लेकिन अब सोनीपत नगर निगम (Sonipat Municipal Corporation) में 13 गांव ही बचे हैं और उन 13 गांव के ग्रामीण भी अब हाउस टैक्स ना भरने का फैसला ले चुके हैं. सोनीपत के गांव रायपुर में आज 13 गांवो के ग्रामीणों ने इक्क्ठा होकर महापंचायत की. ग्रामीणों में नगर निगम सोनीपत के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया, ग्रामीणों ने एक स्वर में हाउस टैक्स ना भरने का फैसला किया. ग्रामीणों ने कहा कि एक तो सुविधा नहीं दी जा रही ऊपर से टैक्स वसूला जा रहा है.

ग्रामीण देवेंद्र और कर्मबीर ने कहा कि आज  13 गांव के ग्रामीणों ने महापंचायत की है और हाउस टैक्स ना भरने का फैसला लिया गया है क्योंकि नगर निगम में शामिल गावों की जमीन निगम ने हड़प ली और पंचायत में जमा कैश भी ले लिया है. विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा है, इसलिए आज इस बात का फैसला लिया गया है कि कोई भी ग्रामीण हाउस टैक्स नहीं भरेगा.

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सोनीपत में यह पहला मौका नही है नगर निगर के अंतर्गत आने वाले ग्रामीणों ने हाउस टैक्स ना देने की चेतावनी दी है. इसके पहले कई बार जिले के दर्जनों गांवों ने महापंचायत बुलाकर नगर निगम के खिलाफ रोष व्यक्त किया था. साथ ही टैक्स नहीं देने के लिए कहा था. फरवरी 2017 में 26 गांवों के लोगों ने निगम के खिलाफ शहर में जुलूस निकालकर लघु सचिवालय पहुंचे थे और वहां पर जमकर हंगामा किया था. वहां सीटीएम को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर गांवों को नगर निगम से बाहर करने की मांग की थी और पंचायतों में जमा 300 करोड़ रुपया अन्य जगह खर्च करने का आरोप लगाया था.अब 13 गांव नगर निगम के अंतर्गत आते हैं.
300 करोड़ रुपये वापस करने की मांग
सोनीपत नगर परिषद को नगर निगम बनाने के लिए 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था. इसके बाद गांवों की प्रॉपर्टी का सर्वे कराकर बिल जमा करने के लिए नोटिस भेजा गया था. तो इसका लोगों ने विरोध शुरू कर दिया. शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के प्रस्ताव पर सीएम मनोहर लाल ने गांवों का दो साल का प्रॉपर्टी टैक्स माफ कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी गांवों का निगम के खिलाफ विरोध कम नहीं हुआ. 26 गांवों के लोगों का आरोप है कि उनके पास 3748 एकड़ पंचायती जमीन और 300 करोड़ रुपये जमा थे. उनको निगम ने अपने पास स्थानांतरित करा लिया और उसके बाद गांवों में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया.
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