ना पानी है ना बिजली, बर्बादी की कगार पर यहां के किसान

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कई साल बीत गए पर रजवाहों में पानी नहीं आया. नतीजतन खेत सूखने की कगार पर हैं. फसलें दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती और खेतों में दरारें आ चुकी है. यहां पर किसान बारिश पर निर्भर हैं. बारिश आएगी तो खेतों में पानी आएगा.

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पलवल में किसान बर्बादी की कगार हैं. ना पानी है और ना ही अन्य सुविधाएं. खेत सूख चुके है, फसलें तबाह हो गई हैं. पलवल के होडल और हथीन में पानी का अकाल है. खेतों में पानी देने के लिए निकाले गए रजवाह सूखे पड़े है.



कई साल बीत गए पर रजवाहों में पानी नहीं आया. नतीजतन खेत सूखने की कगार पर हैं. फसलें दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती और खेतों में दरारें आ चुकी है. यहां पर किसान बारिश पर निर्भर हैं. बारिश आएगी तो खेतों में पानी आएगा.



किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने पानी देने का वादा किया था. मगर चार साल बीत गए पानी का नामोनिशान नहीं है. वहीं संबधित अधिकारियों का कहना है कि रजवाहों में पानी छोड़ा जाता है. लेकिन अगर पानी छोड़ा जाता है तो पानी जाता कहां है.





किसान यहां एक ही नहीं बल्कि कई समस्याओं से जूझ रहे है .किसान अपनी तरफ से पानी का जुगाड़ कर भी ले तो वो पानी खारा होता है जिससे फसलों पर असर पड़ता है. यहीं नहीं बिजली के कटों से किसान परेशान है. ऐसे किसान जाए तो कहां जाए ना कुदरत का साथ है ना ही सरकार का.
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