पलवल : अटोहां चौक पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल हुआ महाराष्ट्र से आया किसानों का जत्था

पलवल में चल रहे किसानों के धरने में महाराष्ट्र से लगभग 250 किसानों का जत्था आया है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं.

पलवल में चल रहे किसानों के धरने में महाराष्ट्र से लगभग 250 किसानों का जत्था आया है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं.

अटोहां चौक पर कृषि बिलों को रद्द करवाने, एमएसपी पर लिखित में कानून बनवाने के लिए 37 दिन भी धरने पर बैठे रहे किसान. बरसात के साथ-साथ ठंड व सर्द हवा भी उनके मनोबल को कम नहीं कर पा रही है.

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  • Last Updated: January 11, 2021, 12:19 PM IST
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पलवल. पलवल (Palwal) के एनएच-19 स्थित अटोहां चौक पर चल रहा किसानों का धरना (farmers Agitation) कड़कड़ाती ठंड के बीच 37वें दिन भी जारी रहा. साथ ही 19वें दिन 24 घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल पर ओडिशा (Odisha), मध्य-प्रदेश (Madhya Pradesh) व पलवल जिले के 11 किसान बैठे. शुक्रवार को किसान विकास मंच अकोला महाराष्ट्र (Maharashtra) से लगभग 250 किसानों का जत्था धरना स्थल पर पहुंचा, जिसमें 40-50 महिलाएं भी शामिल रहीं. किसानों का कहना है कि जब तक तीनों काले कानून (New agricultural law) वापस नहीं लिए जाते और एमएसपी पर लिखित कानून नहीं बनाया जाता तब तक यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा.

पलवल के नेशनल हाइवे-19 स्थित अटोहां चौक पर कृषि बिलों को रद्द करवाने, एमएसपी पर लिखित में कानून बनवाने के लिए 37 दिन भी धरने पर बैठे रहे किसान. बरसात के साथ-साथ ठंड व सर्द हवा भी उनके मनोबल को कम नहीं कर पा रही है. किसानों के जत्थे के साथ आंदोलन में शामिल होने आए महाराष्ट्र के अकोला से अविनाश देशमुख ने कहा कि उनके साथ लगभग 200-250 किसानों का जत्था आया है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि वे सभी किसान हैं और किसानों के परिवार से हैं, जिससे उन्हें मालूम है कि इन काले कानूनों से उन्हें क्या नुकसान है. इसलिए हम चाहते हैं कि ये काले कानून रद्द होने चाहिए. सरकार बार-बार वार्ता कर रही है, लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है जिससे पूरे देश में रोष व्याप्त है.

जब तक कानून वापस नहीं, तब तक घर वापसी नहीं

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव रतन सिंह सौरोत ने कहा कि हमारे शीर्ष नेताओं ने शुरू से ही एक बात कही है कि तीनों काले कानूनों को वापस लिया जाए, एमएमपी पर लिखित में कानून बनाया जाए. लेकिन सरकार वार्ता की बात कर रही है. हम व हमारे नेता बार-बार कह रहे हैं कि वार्ता नहीं, समाधान चाहिए और समाधान का केवल एक ही उपाय है कि जब तक ये कानून वापस नहीं होंगे, एमएमपी पर कानूनी दर्जा नहीं मिलेगा तब तक किसान मोर्चे पर अड़े रहेंगे. दिन-प्रतिदिन इस आंदोलन को बल मिल रहा है और यह आंदोलन जन आंदोलन में तब्दील होता जा रहा है. तमाम प्रदेशों से किसान इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं. सरकार जितने भी हत्थकंडे अपना चाह रही थी, उन्होंने अपना लिए हैं और वे सभी फेल हो चुके हैं. कल जो ट्रैक्टर रैली निकाली थी वह तो केवल ट्रेलर था. जो फिल्म है वो तो आने वाले 26 जनवरी को देखने को मिलेगी. हमारे शीर्ष नेताओं का नारा है कि जब तक बिल वापसी नहीं, तब तक किसानों की घर वापसी नहीं.
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सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है

वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक करण सिंह दलाल ने कहा कि नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार गंभीर नहीं है. भाजपा का अहंकार साफ झलक रहा है. सरकार के मन में मजदूर, किसानों के प्रति बेईमानी है. सरकार नए कृषि कानूनों को लागू कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चहाती है.
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