पानीपत के बड़े गांव नौल्था में किसान आंदोलन को लेकर 12 गांव के किसानों की हुई पंचायत, करेंगे दिल्ली कूच

पानीपत के बड़े गांव नौल्था में किसान आंदोलन के समर्थन में किसानों ने महापंचायत की.

पानीपत के बड़े गांव नौल्था में किसान आंदोलन के समर्थन में किसानों ने महापंचायत की.

दिल्ली (Delhi) में चल रहे किसान आंदोलन (Farmer Agitation) को मजबूत बनाने के लिए पानीपत (Panipat) जिले के नौल्था खंड में 12 गांव के किसानों (Farmers) की आज एक बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि बारह खाप की कमेटी के नेतृत्व में किसान आंदोलन में भाग लेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 2, 2021, 6:47 PM IST
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पानीपत. किसान आंदोलन (Farmer Agitation) को मजबूती प्रदान करने के लिए पानीपत (Panipat) जिले के नौल्था खंड में 12 गांव के किसानों ने आज एक पंचायत आयोजित की. पंचायत (Meeting) में बराह खाप के लोगों ने इकट्ठे होकर निर्णय लिया कि अब गांव से अलग-अलग सिंधु बॉर्डर (Singhu Border) पर किसान आंदोलन में जाने की बजाए बारह खाप की कमेटी के नेतृत्व में किसान आंदोलन में भाग लेंगे.

साथ ही प्रत्येक गांव से कमेटी में 5 लोगों को शामिल करने का फरमान सुनाया है. इसके साथ ही सिंधु बॉर्डर पर अलग तंबू लगाने के खर्च की व्यवस्था करने का भी निर्णय लिया गया है. इस दौरान पंचायत के लोगों ने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के लिए 2 मिनट अपने स्थान पर खड़े होकर श्रद्धांजलि दी.

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गणतंत्र दिवस के बाद हरियाणा में किसान आंदोलन एक बार फिर गति पकड़ रहा है और आंदोलन का नया रूप सामने आने लगा है. आज नौल्था खंड के 12 गांवों की पंचायत में किसान आंदोलन तेज करने और उसको मजबूती प्रदान करने के लिए कई निर्णय लिए गए. इस दौरान बराह खाप के अध्यक्ष रामस्वरूप ने बताया 12 गांव की कमेटी बनाई जाएगी.
सिंधु बार्डर पर एक तंबू लगाया जाएगा और सारे किसान वहां पहुंचेंगे. इसके लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए हर गांव की कमेटी को अधिकृत कर दिया गया है. नौल्था और इसराना गांव दो -दो लाख रुपए चंदा इकट्ठा करेंगे और बाकी गांव एक-एक इस तरह कुल मिलाकर 12 लाख रुपए चंदा इकट्ठा किया जाएगा.

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इसराना गांव के सरपंच ईश्वर ने बताया कि कमेटी के अंदर गांव के सभी वर्गों के लोगों को शामिल किया जाएगा. 5 आदमियों की कमेटी में तीन जनरल एक बीसी और एक एससी वर्ग के व्यक्ति को हर गांव से शामिल किया जाएगा. किसान आंदोलन में सभी इकट्ठा होकर जाएंगे ना कि अलग-अलग. वहीं सभी वर्गों से चंदा इकट्ठा किया जाएगा.



उन्होंने कहा यह तीनों कृषि कानून गले की फांस हैं. किसानी को खत्म करने के लिए ये तीनों कानून लाए गए हैं. यह कानून तीन घरानों के लिए लूट की छूट देते हैं. वहीं पूर्ण डिडवाड़ी ने कहा जब तक आंदोलन चलेगा तब तक हम भी डटे रहेंगे. उन्होंने कहा इस सरकार में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अलावा किसी की नहीं चलती. कोई उनके सामने बोल नहीं सकता किसान ने यह भी कहा इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए जब वह गलत काम करती थी तो उसके मंत्रिमंडल के सदस्य राजेश पायलट खिलाफ बोलते थे दूसरे मंत्री भी विरोध में आवाज उठाते थे, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ किसी में बोलने की हिम्मत नहीं है.
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