पत्रकार हत्याकांड: रिवॉल्वर के साथ आए थे राम रहीम के गुर्गे, जानिए क्या हुआ था उस रात
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पत्रकार हत्याकांड: रिवॉल्वर के साथ आए थे राम रहीम के गुर्गे, जानिए क्या हुआ था उस रात
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और राम रहीम

अंशुल के मुताबिक रात को जब उनका परिवार खाना खाने की तैयारी कर रहा था, तभी किसी ने बाहर से उनके पिताजी को पुकारा. रामचंद्र छत्रपति देखने के लिए बाहर निकले और पीछे-पीछे अंशुल भी.

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  • Last Updated: January 17, 2019, 4:20 AM IST
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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत गुरुवार को गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाएगी. इस मामले में कोर्ट 11 जनवरी को राम रहीम को दोषी करार दे चुकी है. जिन धाराओं में राम रहीम को दोषी करार दिया गया है उसे देखते हुए माना जा रहा है कि राम रहीम को बड़ी सजा सुनाई जाएगी.

गुरमीत राम रहीम साध्वियों के यौन शोषण के मामले में इस वक्त रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का मामला भी इसी मामले से जुड़ा हुआ था. रामचंद्र छत्रपति अपना अखबार चलाते थे और इसके वह लगातार साध्वियों से जुड़े मामले को उठा रहे थे. इसी के चलते डेरा की तरफ से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थी. 24 अक्टूबर 2002 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई.

हाल ही में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने इस हत्याकांड से जुड़ी कई बातों का खुलासा किया. अंशुल ने बताया कि वह करवाचौथ का दिन था और किसी की अचानक मौत की वजह से उनकी मां को मायके जाना पड़ा था. अंशुल ने बताया कि उनके पिता अखबार की व्यस्तताओं की वजह से अक्सर देर से घर पहुंचते थे, लेकिन उस दिन वह जल्दी घर आ गए थे.



अंशुल के मुताबिक रात को जब उनका परिवार खाना खाने की तैयारी कर रहा था, तभी किसी ने बाहर से उनके पिताजी को पुकारा. रामचंद्र छत्रपति देखने के लिए बाहर निकले और पीछे-पीछे अंशुल भी. उसने देखा कि बाहर स्कूटर पर दो लोग खड़े हैं और दोनों के हाथ में रिवॉल्वर है. इससे पहले की कोई कुछ समझ पाए उनमें से एक ने फायरिंग शुरू कर दी. रामचंद्र छत्रपति को पांच गोलिया लगीं और वह गिर गए.



जैसे ही रामचंद्र छत्रपति को गोली मारी गई अंशुल ने शोर मचाना शुरू कर दिया. इस शोर की वजह से दोनों हत्यारे बुरी तरह घबरा गए और भागने लगे. दोनों इस तरीके से घबरा गए थे कि एक स्कूटर छोड़कर पैदल ही भागने लगा. इनमें से एक को मौके से पकड़ लिया गया.

अंशुल ने बताया कि वह पिताजी के साथ अस्पताल में थे इसलिए उनके छोटे भाई ने थाने में एफआईआर लिखाई और डेरा पर शक जताया. बाद में पुलिस ने दूसरे हत्यारे को भी पकड़ लिया. दोनों के पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया रिवॉल्वर भी बरामद हो गया. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दूसरे हत्यारे के पास जो रिवॉल्वर था वह नकली था. जिस रिवॉल्वर को हत्या में इस्तेमाल किया गया था उसका लाइसेंस डेरा के प्रधान किशनलाल के नाम पर था. किशनलाल ने कुछ ही दिनों में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया.

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अंशुल बताते हैं कि जब उनके पिता को होश आया तो उन्होंने अपने बयान में गुरमीत राम रहीम का नाम लिया, लेकिन पुलिस ने बयान बदल दिया. उन्होंने कहा कि पुलिस डेरा के दबाव में काम कर रही थी, इसलिए उसने जांच को तीन लोगों (किशनलाल और दो हत्यारों) से आगे नहीं बढ़ने दिया. पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उन्होंने सीबीआई जांच के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 2003 में जांच सीबीआई को सौंपी गई.

अंशुल बताते हैं कि न्याय के लिए भले ही लंबा इंतजार करना पड़ा हो, लेकिन उन्हें हमेशा इस बात का भरोसा था कि मामले में न्याय जरूर होगा. अंशुल ने कहा कि जब वह राम रहीम को शक्तिशाली लोगों के साथ देखते तो डर जरूर लगता, लेकिन साध्वियों के यौन शोषण मामले में कोर्ट ने जो फैसला दिया उसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ा दिया. उन्हें विश्वास हो गया कि उन्हें भी न्याय जरूर मिलेगा. अंशुल चाहते हैं कि कोर्ट राम रहीम को फांसी की सजा सुनाए.

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