हरियाणा का एक गांव ऐसा जहां नहीं हो रही लड़कों की शादी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

गांव के लोगों की मानें तो वो पिछले 25 सालों से अपनी समस्या लेकर सरकार के पास जाते हैं. उनको आश्वासन के तौर पर गांव शिफ्ट करने का वायदा मिलता है, लेकिन इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या हल होने का नाम नहीं ले रही है.

News18 Haryana
Updated: July 2, 2019, 4:42 PM IST
हरियाणा का एक गांव ऐसा जहां नहीं हो रही लड़कों की शादी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
इस कारण गांव के युवकों की शादी नहीं हो पा रही
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Updated: July 2, 2019, 4:42 PM IST
हरियाणा का एक गांव ऐसा है जहां कोई भी अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता. जी हां, ये बात सच है. हम बात कर रहे हैं हरियाणा के पानीपत जिले में आने वाले गांव खुखराना की. इस गांव में कोई भी अपनी लड़की की शादी नहीं करना चाहता है. यही वजह है कि यहां लड़कों की शादी भी नहीं हो पा रही है. खुखराना गांव पानीपत शहर से महज 13 किलोमीटर दूर असंध रोड पर बसा है.

1978 में यहां बिजली निर्माण के लिए बनाए गए थर्मल प्लांट से रोजगार की उम्मीद जगी थी. लेकिन ग्रामीणों को रोजगार मिलना तो दूर अब तो इस गांव में कोई अपनी लड़की की शादी भी नहीं करना चाहता है. यही नहीं इस गांव के लोगों के रिश्‍तेदार भी आने से डरते हैं. इसकी वजह जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे.

ये है वजह
खुखराना गांव पिछले 25 सालों से प्रदूषण का दंश झेल रहा है. क्योंकि इस गांव के साथ ही थर्मल प्लांट के बाद सीमेंट फैक्टरी लगने से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण इस कदर बढ़ गया कि गांव में रहना भी दुश्वार हो गया है. इस गंभीर समस्या को लेकर की गई गुहार पर सुनवाई ना होने के बाद 1993 में गांव सुधार समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को गांव शिफ्ट करने के निर्देश देते हुए 24 घंटे बिजली व शुद्ध पेय जल मुहैया करवाने के आदेश दिए थे.

बिजली तो मिली पर शुद्ध पानी नहीं
गांव वालों को बिजली तो जरूर 24 घंटे मिल पा रही है लेकिन शुद्ध पेय जल कुछ ही दिन मिल पाया. जिसके चलते गांव के लोगों को सांस और स्किन एलर्जी जैसी बीमारियां लग गईं. कई लोग तो इस गांव को छोड़ कर निकल गए लेकिन जो यहां रह रहे हैं उन्हें सरकार से आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिला.

पीना पड़ रहा गंदा पानी
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पानीपत थर्मल प्लांट के निकट बसा होने के कारण गांव खुखराना के लोगों को थर्मल से निकलने वाली राख तथा गंदे पानी की निकासी के लिए बनाई गई झील के गंदे पानी से भारी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं. इस राख से जहां गांववाले खांसी, दमा और टीबी जैसे घातक रोगों का शिकार हो रहे हैं. वहीं झील के गंदे पानी से जलस्तर ऊपर आ जाने से लोगों को दूषित जल पीना पड़ता है.

क्या है गांववालों का कहना
गांव के लोगों की मानें तो वो पिछले 25 सालों से सरकार के पास अपनी समस्या लेकर जाते हैं. उनको आश्वासन के तौर पर गांव शिफ्ट करने का वायदा मिलता है, लेकिन इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्या हल होने का नाम नहीं ले रही है. मोदी सरकार जहां गांव को बदलने की बात करती है, खुशहाली लाने की बात करती है, वही खुखराना गांव के लोग इस प्रतिकूल माहौल में जीने को मजबूर हैं.

First published: July 2, 2019, 4:06 PM IST
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