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खेलो इंडिया: जमीन बेचकर पिता ने दिलाई थी पिस्टल, अब बेटी ने गोल्ड पर लगाया निशाना

News18 Haryana
Updated: January 21, 2020, 6:45 PM IST
खेलो इंडिया: जमीन बेचकर पिता ने दिलाई थी पिस्टल, अब बेटी ने गोल्ड पर लगाया निशाना
पानीपत के गांव बराना की बेटी अंजलि चौधरी ने खेलो इंडिया के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पद जीता है.

पानीपत के गांव बराना की बेटी अंजलि चौधरी ने खेलो इंडिया (Khelo India) के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक (gold Medal) जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है. अंजलि के पिता महावीर को प्लॉट बेचकर शूटिंग के लिए पिस्टल खरीदनी पड़ी.

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पानीपत. हरियाणा में पानीपत (Panipat) के गांव बराना की बेटी अंजलि चौधरी (Anjali Chaudhary) ने खेलो इंडिया के 25 मीटर पिस्टल इवेंट (Pistol Event) में स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है. अंजलि को पिता ने प्लॉट बेचकर जब शूटिंग के लिए पिस्टल खरीदकर दी तब लोगों ने एतराज जताया था. बेटी ने उसी पिस्टल से खेलो इंडिया के 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक पर निशाना लगाकर पिता का मान बढ़ाया है. प्रतियोगिता 10-20 जनवरी तक गुवाहाटी में आयोजित की गई है. अंजलि के इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे लंबी कहानी है. महावीर सिंह (Mahavir Singh) ने बताया कि जब बेटी छोटी थी तब दौड़ लगाने जाती थी उस समय लोग ताने मारते थे और यह कहते थे कि खेल में कुछ नहीं रखा, बेटी को बाहर अकेले भेजने पर भी मना करते थे.

पिता ने जमीन बेचकर बेटी को दिलाई दो पिस्टल

अंजलि के पिता महावीर के पैर में चोट लगी है और रॉड पड़ी है. यही वजह है कि बेटी जब दौड़ने जाती तो वह उसके साथ बाइक पर 6 किलोमीटर जाते थे. अक्टूबर 2015 में बेटी ने शूटिंग खेलने की इच्छा जाहिर की, उसे नहीं पता था कि यह खेल महंगा है. 2016 में स्कूल नेशनल में रजत पदक जीता. शूटिंग की ट्रेनिंग में पिस्टल और अन्य उपकरण दिलाने के लिए धन की कमी आड़े आ रही थी. महावीर के पास सिर्फ 2 एकड़ जमीन थी. बेटी के अरमानों को उड़ान देने के लिए महावीर ने जमीन बेचकर पैसों का इंतजम किया और 10 मीटर शूटिंग के लिए ढाई लाख और 25 मीटर के लिए ढेड़ लाख की की पिस्टल मंगवा.

अंजलि की राह में अड़चन बन रहे लोग ही बधाई देने पहुंच रहे हैं

बेटी ने भी पिता के सपनों को साकार करने के लिए जमकर अभ्यास किया और पदकों की झड़ी लगा दी. 15 जनवरी को बेटी का जन्मदिन था. बेटी ने पदक जीतकर मानों खुद को ही जन्मदिन का तोहफा दे दिया. अब बेटी कामयाब हो गई है तो बुराई करने वाले लोग ही बधाई देने पहुंच रहे हैं. अंजिल के पिता महवीर के अनुसार अंजलि की बचपन से ही खेलों में रुचि थी. उन्होंने बताया कि अंजलि ने शुरूआत में स्कूल प्रतियोगिता में अंजलि ने गोला फेंककर अपना नाम कमाया, लेकिन उसके बाद स्कूल में शूटिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई तब उसने भी शूटिंग करने की पिता से गुहार लगाई.

Anjali chaudhary
बेटी ने भी पिता के सपनों को साकार करने के लिए जमकर अभ्यास किया और पदकों की झड़ी लगा दी.


मां-पिता की है इच्छा बेटी ओलंपिक में मेडल लेकर आएमहावीर का कहना है कि अगर उन्हें पहले पता होता कि यह खेल इतना महंगा है तो वह कभी भी अपनी बेटी को इस खेल में नहीं जाने देते. लेकिन, अंजलि की मेहनत और पिता का बलिदान काम आया है. खेलो इंडिया यूथ गेम के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर नाम रोशन किया. वहीं अंजलि के पिता महावीर और माता सुमन का सपना है कि उसकी बेटी ओलंपिक में मेडल लेकर आए.

यह है अंजलि की उपलब्धियां

वर्ष 2016 और 2017 में स्कूल नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक मिला जबकि वर्ष 2018 और 2019 में खेलो इंडिया में शूटिंग प्रतियोगिता में रजत पदक. वर्ष 2019 में नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक हासिल किए. वर्ष 2019 में ही ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में रजत और कांस्य पदक इकट्ठा पाए.

(पानीपत से सुमित भारद्वाज की रिपोर्ट)

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First published: January 21, 2020, 5:17 PM IST
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