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पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा- गुरु तेग बहादुर साहस, त्याग, बलिदान और आपसी प्रेम की मिसाल

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज पानीपत में आयोजित ‘हिंद दी चादर’ गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाशोत्सव में हिस्सा लिया.

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज पानीपत में आयोजित ‘हिंद दी चादर’ गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाशोत्सव में हिस्सा लिया.

Guru Tegh Bahadur Parkash Purab 2022: पानीपत में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से मांग की कि ऐसी महान विभूति की याद में हरियाणा स्थित धमतान साहिब में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कॉलेज व रिसर्च सेंटर बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को अच्छी शिक्षा मिले और गरीब व दीन-दुखी की सेवा हो सके. हुड्डा ने कहा कि यह हम सबके लिए गर्व की बात है कि हरियाणा प्रदेश आज हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाशोत्सव मना रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी साहस, त्याग, बलिदान और आपसी प्रेम की वो मिसाल थे, जिन्हें मानव जाति कभी नहीं भुला सकेगी.

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सुमित भारद्वाज

पानीपत. पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज पानीपत में आयोजित ‘हिंद दी चादर’ गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाशोत्सव में हिस्सा लिया. कार्यक्रम में उन्होंने शीश नवाकर सच्चे पातशाह से मानव जाति की सुख-समृद्धि के लिए अरदास की.  इस मौके पर हुड्डा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी सिर्फ एक धर्म के नहीं बल्कि पूरी मानवता के गुरु और पूजनीय हैं. उन्होंने उस दौर में देश, धर्म व मानवता के लिए बलिदान दिया जब देश मुगलों के अत्याचार झेल रहा था.

पानीपत में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से मांग की कि ऐसी महान विभूति की याद में हरियाणा स्थित धमतान साहिब में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कॉलेज व रिसर्च सेंटर बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को अच्छी शिक्षा मिले और गरीब व दीन-दुखी की सेवा हो सके. हुड्डा ने कहा कि यह हम सबके लिए गर्व की बात है कि हरियाणा प्रदेश आज हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाशोत्सव मना रहा है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी साहस, त्याग, बलिदान और आपसी प्रेम की वो मिसाल थे, जिन्हें मानव जाति कभी नहीं भुला सकेगी. गुरु जी की शिक्षा और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं. आज भी हमें उनके जीवन से धार्मिक सहिष्णुता, एकता और आपसी भाईचारे की सीख लेने की आवश्यकता है.

मानवता के इतिहास में त्याग व बलिदान की अनूठी मिसाल कहीं नहीं मिलती: हुड्डा 

उन्होंने कहा कि समूची मानवता के इतिहास में त्याग व बलिदान की इससे अनूठी मिसाल कहीं नहीं मिलती. जिनके दादा गुरु अर्जुन देव जी, खुद और उनकी पत्नी माता गुजरी जी, सुपुत्र गुरु गोबिन्द सिंह जी और उनके चारों सुपुत्र बाबा जुझार सिंह, अजीत सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने अपने धर्म, सिद्धांत, संस्कृति और स्वाभिमान के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया. उन्होंने “सिर दिया पर सार न दिया” अन्यायी और क्रूर औरंगजेब का गुरुर तोड़ दिया.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरी तरफ मुगल शासकों के जुल्म, जबरदस्ती, अन्याय और धर्म परिवर्तन की चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया. उस दौर में उन्होंने अपने अनुयायियों में साहस, संगठन, समानता और बलिदान की भावना जगाई. उन्होंने ‘देग-तेग’, मीरी-पीरी की शानदार परंपरा को विकसित किया। लंगर और संगत प्रथा से संगठन, समानता और सौहार्द का निर्माण हुआ.

गुरुजी ने दी मुगलों को चुनौती 

हुड्डा ने बताया कि सन 1674 में जबरन धर्म परिवर्तन से पीड़ित कश्मीरी पंडित गुरु तेग बहादुर जी के पास रक्षा के लिए आए. गुरुजी ने मुगलों को चुनौती दी कि यदि वे पहले मुझसे धर्म परिवर्तन करा सकते है तो दूसरों को मजबूर करें. औरंगजेब ने इसे अपनी रक्षा के खिलाफ चुनौती माना. नतीजन, गुरुजी का उनके तीन साथियों (भाई मतीदास, भाई सतीदास और बाबा दयाला जी) सहित चांदनी चौक दिल्ली में सिर काट कर शहीद कर दिया. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह मानवता के इतिहास में एक अनूठी और अकेली मिसाल है कि किसी एक धार्मिक सम्प्रदाय के गुरु ने दूसरे धर्म के अनुयायियों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान दिया हो. इस अवसर पर लगभग सभी कांग्रेसी विधायक भी नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ कार्यक्रम में मौजूद रहे.

गुरु तेग बहादुर का हरियाणा से है खास रिश्ता 

गुरु तेग बहादुर का हरियाणा प्रदेश से विशेष संबंध रहा है.जब गुरुजी प्रथम गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और सिद्धान्तों के प्रचार के लिए पूर्व दिशा में गए तो कुरुक्षेत्र, झिंवरहेड़ी (यमुनानगर) आदि स्थलों पर भी गए. इसके बाद गुरु तेग बहादुर जी अपना बलिदान देने तलवंडी साबो के गुरुद्वारा दमदमा साहिब से चले और धमतान साहिब (जींद), जींद, लाखनमाजारा (रोहतक) होते हुए आगरा पहुंचे, जहां उनको गिरफ्तार कर पिंजरे में दिल्ली लाया गया.

गुरुद्वारा शीशगंज के चांदनी चौक में उन्होंने अपना बलिदान दिया. जब उनके कटे हुए शीश को लेकर आनंदपुर साहिब लाया जा रहा था तो रास्ते में बढ़ खालसा (सोनीपत) के एक अनुयायी ने अपना शीश कटाकर पीछा करती हुई मुगल फौज को दिया और गुरुजी के शीश का उनके सुपुत्र श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने श्री आनंदपुर साहिब में अंतिम संस्कार किया.

Tags: Bhupendra Singh Hooda, Guru Teg Bahadur, Haryana news

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