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अलविदा 2015: इन कारणों से सालभर विवादों में रही हरियाणा सरकार

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साल 2015 लगभग बीत चुका है और ऐसे में आपके मन में जरूर होगा कि पता चले इस साल में क्या कुछ खास रहा, क्या विवादों में रहा, क्या निर्णय लिए गए. तो कोई बात नहीं हम आपको ये सब बताने जा रहे हैं. और शुरुआत करेंगे सालभर के हरियाणा के विवादों से, क्योंकि साल की शुरुआत भी विवादों से हुई थी.

इस पूरे साल हरियाणा सरकार, उसके मुखिया समेत कई मंत्री विवादों में रहे. चाहे वो बयान देना हो या कोई निर्णय लेना. कई बारगी तो ऐसा लगा कि मानों विवाद में रहने की कोई प्रतियोगिता हो रही हो. तो आईए जानते हैं क्या हैं वो दस विवाद जो इस साल हरियाणा सरकार और उसके मंत्रियों से जुड़े.

1. ब्रांड एंबेसडर विवाद

रामदेव विवादः साल की शुरुआत यानि जनवरी में हरियाणा सरकार ने रामदेव को योग एवं आयुर्वेद का ब्रांड एंबेसडर बनाया. प्रदेश के स्वास्थ्य और खेल मंत्री अनिल विज ने हरिद्वार के दिव्य योग मंदिर में ये घोषणा की, लेकिन घोषणा के साथ ही रामदेव की नियुक्ति विवादों में आ गई. विवाद इसीलिए क्योंकि सरकार ने रामदेव को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया. जिसके बाद विपक्ष ने आपत्ति जताई बाद में विवाद बचने के लिए सरकार ने रामदेव को स्टेट गेस्ट की सुविधाएं दी.

परिणीति विवाद: रामदेव के बाद परिणीती चोपड़ा को भी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने पर विवाद छिड़ा. यहां विवाद खुद सरकार के वरिष्ठ मंत्री अनिल विज ने किया. दरअसल, हरियाणा सरकार ने परिणीति चोपड़ा को 'बेटी बचाओ' अभियान का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया. सीएम ने इसकी सूचना ट्वीट कर दी. जिसके बाद टि्व्‍टर पर ही कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने इस प्रकार के किसी भी निर्णय की जानकारी होने के बारे में इनकार किया. इस तरह इस विवाद ने भी काफी सुर्खियां बटोरी. बाद में इस विवाद में कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने भी सफाई दी.

2. धनखड़ ने आत्महत्या करने वाले किसानों को कहा कायर

29 अप्रैल 2015 को प्रदेश के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने किसानों पर विवादित बयान दे दिया. वो भी ऐसे वक्त में जब प्रदेश का किसान बेमौसम बरसात से फसलों को हुए नुकसान की वजह से खुदकुशी कर रहा था. कृषि मंत्री ने ऐसे किसानों को कायर कहकर बवाल खड़ा कर दिया. हरियाणा में बीजेपी सरकार के मंत्री धनखड़ ने किसानों की खुदकुशी पर गैरजिम्मेदाराना बयान देकर विरोधियों को हमलावर होने का बड़ा मौका दे दिया. हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी लेकिन तब तक उनके बयान पर काफी बवाल मच चुका था.

3. सरकार बनाम अफसरशाही

I. विज और कालिया विवाद

पूरे साल सरकार और अफसरों के बीच खिंची रही, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चित हुआ अनिल विज और आईपीएस संगीता कालिया का विवाद. 27 नवंबर 2015 को कैबिनेट मंत्री अनिल विज और फतेहाबाद की एसपी संगीता कालिया के बीच जमकर कहासुनी हुई और ये मुद्दा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी गूंजा. दरअसल अनिल विज कष्ट निवारण समिति की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे. इस बैठक में एसपी संगीता कालिया भी मौजूद थीं.

बैठक में शराब तस्करी का मसला उठा जिसको लेकर अनिल विज और संगीता कालिया के बीच नोंक-झोंक शुरू हो गई. शराब तस्करी पर संगीता कालिया का जवाब सुनकर अनिल विज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने संगीता कालिया को बाहर जाने को कहा. लेकिन संगीता कालिया ने बाहर जाने से मना कर दिया. जिसके बाद खुद मंत्री जी बैठक से उठकर चले गये. इस विवाद के एक दिन बाद संगीता कालिया का तबादला कर दिया गया. उन्हें मानेसर की रिजर्व बटालियन में भेज दिया गया. गौरतलब है कि इस मामले में विज को जान से मारने की धमकी भरा ट्वीट भी किया गया.

II. बेदी और भाटिया विवाद

दूसरा मामला था राज्यमंत्री कृष्णबेदी और सीएमओ वंदना भाटिया के बीच विवाद का. दरअसल, 27 जनवरी को मंत्री ने अपने पीए से सीएमओ को फोन करवाया और फिर खुद उनसे बातचीत की. बातचीत की शुरुआत तो काफी विनम्रता से हुई, लेकिन थोड़ी ही देर में टीका-टिप्पणी से होते हुए तू-तू-मैं-मैं तक जा पहुंची. बाद में जब मामला गरमाया तो मंत्री जी कहा उन्होंने कुछ गलत नहीं बोला. इस पर सीएमओ ने बातचीत की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक कर दी. मामला स्वास्थ्य मंत्री के दरबार में पहुंचा तो उन्होंने गंभीरता को देखते हुए सीएमओ का सरका दिया. मंत्री का कहना था कि सीएमओ ने कई बार कॉल करने के बावजूद उनका फोन रिसीव नहीं किया और जब बात हुई तो वह अभद्रता के साथ पेश आईं. उन्होंने यहां तक कहा कि आपको जो एक्शन लेना है आप ले लें. दूसरी ओर, सीएमओ का कहना था कि मंत्री धमकी भरे लहजे में बातचीत कर रहे थे. उन्होंने यहां तक कह डाला कि आप डॉक्टर हो या डंगर चलाने वाले हो. विवाद का पटाक्षेप भाटिया के तबादले के साथ ही हुआ.
4. बीफ विवाद 

I. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांगः दरअसल, अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के दादरी में एक शख्स की इस शक में हत्या कर दी गई कि उसके फ्रिज में बीफ है. इसके बाद तो पूरे देश में बीफ को लेकर चर्चा होने लगी. इस दौरान हरियाणा भी गाय और बीफ विवाद से अछूता नहीं रहा. यहां विज ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर विवाद की शुरुआत की.

विज ने दलील दी कि बंगाल टाइगर तो अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकते हैं लेकिन गाय नहीं कर सकती. विज ने मुहिम सोशल मीडिया पर भी छेड़ी और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर रायशुमारी ली. विज की इस मुहिम पर एक दिन में 574 लोगों ने वोट किया. जिसमें 75 फीसदी लोगों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के पक्ष में वोट दिया जबकि 25 फीसदी लोगों ने टाइगर के पक्ष में हालांकि बाद में मंत्री जी की ये मुहिम तो हवा हो गई लेकिन सीएम ने बीफ पर बयान देकर फिर से आग में घी डालने का काम किया.

II. सीएम का बीफ बयानः हरियाणा सरकार से दूसरा सबसे बड़ा विवाद जुड़ा बीफ विवाद. इसी दौरान एक अंग्रेजी अख़बार ने प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल खट्टर का इंटरव्यू किया. इंटरव्यू के दौरान सीएम ने कहा कि मुस्लिम देश में रह सकते हैं, लेकिन उनको गौमांस खाना छोड़ना होगा, क्योंकि गाय देश में आस्था का विषय है. जिसके बाद सीएम की जमकर आलोचना हुई और अंततः सीएम को अपने बयान पर माफी मांगनी पड़ी.

III. सरकारी पत्रिका में बीफ खाने की सलाह: मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बयान पर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि 27 अक्टूबर को फिर से प्रदेश में बीफ पर बवाल शुरू हो गया. दरअसल, हरियाणा शिक्षा महकमे की पत्रिका सारथी में बीफ खाने की सलाह दी गई थी. पत्रिका में बीफ को आयरन का स्त्रोत बताया गया था. जिसको लेकर विवाद शुरू हो गया. जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पत्रिका की संपादक देवयानी सिंह को उनके पद से हटा दिया गया. रामबिलास शर्मा ने सफाई दी कि पात्रिका में एक वैज्ञानिक रिपोर्ट को छापा गया था और सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है.

5. स्वास्थ्य और राज्य मंत्री में टकराव

कालिया के बाद कैबिनेट मंत्री अनिल विज अपनी ही सरकार के राज्य मंत्री से टकरा गए. जो कि विवादों की वजह बना. यह सरकार के ही दो मंत्रियों के बीच अपनी राजनैतिक सत्ता का टकराव था. बता दें यह विवाद अभी ठंडा नहीं पड़ा है, क्योंकि माना जा रहा है कि अब संगठन में जब भी फेरबदल होगा तो राज्य मंत्री नायब सैनी का पार्टी के जिला प्रधान पद से हटाना तय है. दोनों के बीच विवाद जनता दरबार को लेकर शुरू हुआ.

दरअसल, अनिल विज अंबाला छावनी रेस्ट हाउस में अक्सर खुला दरबार लगाते हैं. सरकार में व्यस्तताएं बढ़ जाने की वजह से विज कुछ दिनों खुला दरबार नहीं लगा पाए लेकिन छावनी के चौराहे पर लोगों से मिलना जारी रखा. इसी बीच राज्य मंत्री नायब सैनी ने अंबाला छावनी रेस्ट हाउस में खुला दरबार लगाना चालू कर दिया. सैनी अंबाला, भाजपा के जिलाध्यक्ष हैं. इसीलिए सैनी ने कुछ कार्यकर्ताओं को संगठन में समायोजित करना शुरू कर दिया. जिसके बाद विज और सैनी समर्थकों में यह बात राजनीतिक मुद्दा बन गई और विज ने सैनी को अपने दायरे में रहने की नसीहत देते हुए मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रांतीय अध्यक्ष सुभाष बराला से इस पूरे मामले की शिकायत की.

5. राज्यमंत्री ने उड़ाया मोदी के स्वच्छता अभियान का मजाक!

अक्टूबर में ही हरियाणा सरकार के मंत्री ने पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का सबके सामने मजाक उडा दिया. पीएम मोदी के इस अभियान को लेकर उनके कहे शब्द कैमरे में कैद हो गए. दरअसल, हरियाणा के सामाजिक अधिकारिता और न्याय राज्यमंत्री श्रीकृष्ण कुमार बेदी फतेहाबाद में चल रहे सफाई अभियान में हिस्सा लेने पहुंचे थे. जहां उन्होंने सफाई करते हुए मोदी के इस महत्वपूर्ण अभियान का मजाक उड़ाया. एक तरफ तो मंत्री जी हाथों में झाड़ू लेकर सफाई कर रहे थे दूसरी तरफ बोले जा रहे थे कि ”पता नहीं ये मोदी क्या-क्या करवाएगा”.
6. कैबिनेट मंत्री राव नरबीर बोले, सिर के ऊपर से जाती है गीता

भारतीय जनता पार्टी की सरकारें बेशक गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा दिलाने की पैरवी में जुटी हों और पाठ्यक्रमों में भी गीता को शामिल करने की क़वायद चल रही है, लेकिन हरियाणा में भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री ने गीता का उपहास उड़ा कर सबको हैरत में डाल दिया. 19 नवबंर को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'भारतीय कला में गीता की प्रासंगिकता' विषय पर आयोजित नेशनल सेमिनार में केबिनेट मंत्री राव नरबीर ने कह डाला कि यह मेरी बदक़िस्मती है कि गीता के इस विषय पर सेमिनार में मुझे बुलाया गया.

गीता की बातें मेरे सिर से निकल जाती हैं. इतना ही नहीं राव नरवीर ने कुरुक्षेत्र आने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए. राव नरबीर ने कहा कि सरकार बनने के बाद से मुझे लोग कह रहे थे कुरुक्षेत्र आओ! मैंने कहा क्यों आऊं कुरुक्षेत्र? यहां तो दस करोड़ यादवों का नरसंहार हुआ था. इस धरती पर करोड़ों यादवों का विनाश हुआ और मैं भी उसी यदुवंश से संबंध ऱखता हूं.

7. पूर्व सीएम हुकम सिंह की मौत, जांच और विवाद

12 फरवरी को तबीयत खराब होने पर प्रदेश के पूर्व सीएम मास्टर हुकम सिंह को पीजीआई रोहतक में दाखिल करवाया गया. वे 25 फरवरी को दोपहर बाद साढ़े तीन बजे तक पीजीआई में रहे. उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज सही नहीं हो रहा है. उन्हें गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए 25 फरवरी को 12:30 बजे एम्बुलेंस की मांग की गई. लेकिन एम्बुलेंस तीन घंटे देरी से यानी साढ़े तीन बजे मिली. एम्बुलेंस में ऑक्सीजन भी नहीं थी और न ही देखरेख के लिए किसी डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई.

26 फरवरी को मेदांता में पूर्व सीएम की मौत हो गई. बाद में जब मामला मीडिया की सुर्खियां बनी तो स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विभाग के महानिदेशक एवं सचिव, आईएएस, प्रदीप कासनी को जांच सौंपी. जिन्होंने मामले में परिजनों के आरोपों को सही पाया और रिपार्ट में कहा कि अगर वक्त रहते पूर्व सीएम को इलाज मिल जाता और एंबुलेंस के जरिये वे मेदांता अस्पताल पहुंच जाते तो उनकी जान बच सकती थी. जिसके बाद सभी को लगा कि कार्रवाई होगी लेकिन कासनी की रिपोर्ट ने मुख्यमंत्री के दरबार में दम तोड़ दिया और सरकार ने कासनी की रिपोर्ट को खारिज कर मामले को फिर से जांच के लिए सौंप दिया.

8. ‘ठेकेदार’ का ‘भ्रष्टाचार’ विवाद

भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस का दावा करने वाली खट्टर सरकार के राज्यमंत्री विक्रम सिंह पर भ्रष्टाचार के कथित आरोप लगे. दरअसल, मंत्री जी ओलावृष्टिके मुआवजे के नाम अपने ही एक जीवित कार्यकर्ता को मृत बताकर स्वैच्छिक कोटे से एक लाख रुपए की सहायता देने के मामले में घिरे. जब ईटीवी ने इस मामले को उठाया तो मंत्री जी ने वित्तीय सहायता के लिए जारी मूल पत्र और संशोधित पत्रों में हुई गड़बड़ को क्लेरिकल मिस्टेक करार दिया.

साथ ही मंत्री जी ने कहा कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. जिसके बाद विपक्ष को मुद्दा मिला और मंत्री का इस्तीफा भी मांगा. इसके अलावा मंत्री जी से एक और विवाद जुड़ा जब एक निजी चैनल ने ARCS इंस्पेक्टर वीरेंद्र हुड्डा का स्टिंग ऑपरेशन किया और उसे रिश्वत लेते कैमरे में कैद किया. इंस्पेक्टर ने कहा कि इस रिश्वत का पैसा ‘महीने’ के रूप में ‘ठेकेदार’ साहब तक पहुंचता है.

9. विज और सीएम के बीच निमंत्रण विवाद

सोनीपत के खानपुर महिला विश्वविद्यालय में आठ फरवरी 2015 को स्वास्थ्य संबंधी एक भवन का उद्घाटन हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल तो पहुंचे लेकिन विज नदारद थे. विज का कहना था कि समय रहते उन्हें कार्यक्रम की सूचना ही नहीं मिली थी, तब विज ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए ट्वीट किया था.

विज ने लिखा था- 'मैं मुख्यमंत्री का दिल से शुक्रिया करता हूं कि उन्होंने मेरे विभाग के प्रति गहरी रुचि दिखाई, अब मैं निश्चिंत हूं'. ट्वीट के जो मायने निकलकर आए उनके मुताबिक हरियाणा में जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से उनके विभाग की अनदेखी हो रही है. जिसके बाद इस विवाद का पटाक्षेप हुआ विज के ही ट्वीट से जब उन्होंने सीएम के साथ मैराथन में दौड़ लगाई और लिखा कि 'हम साथ-साथ हैं'.

10. शिक्षा मंत्री के ‘अमर्यादित’ बोल

हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा भी विवादों में के मामले में पीछे नहीं रहे. चाहे वो शिक्षा के भगवाकरण के आरोप हों या गेस्ट टीचर्स का मुद्दा. इतना ही नहीं कुछ विवादों को तो मंत्री जी ने खुद न्यौता दिया. जैसे कि जनवरी में सिरसा में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को लेकर आयोजित कार्यक्रम.

यहां नारी के सम्मान में बोलते-बोलते मंत्री जी ने मंच से ही रावण को गाली दे दी. इसके बाद भी मंत्री जी नहीं सुधरे और अगले ही महीने फिर रोहतक के एमडीयू विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू गाली दे दी. इस प्रकार शिक्षा मंत्री जी सालभर विवादों में रहे.

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