जेजेपी में बगावत शुरू, किसान सेल के महासचिव रामकुमार चंदौली ने छोड़ी पार्टी

जेजेपी से जुड़े रामकुमार चंदौली ने पार्टी को अलविदा कहकर किसानों को समर्थन दिया.

पानीपत टोल प्लाजा स्थित धरना केंद्र पर भारतीय किसान यूनियन ज़िला पानीपत की जनसभा का आयोजन किया गया था जिसमें जिलेभर से सैंकड़ो किसानों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया. जनसभा में जेजेपी से जुड़े रामकुमार चंदौली ने पार्टी को अलविदा कहकर किसानों को अपना समर्थन दिया.

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पानीपत. जेजेपी विधायक रामकरण काला का किसानों द्वारा किये गए भारी विरोध के बाद अब पार्टी में बगावत का दौर शुरू हो चुका है. ताजा उदाहरण पानीपत टोल प्लाजा पर आयोजित भारतीय किसान यूनियन की बैठक में देखने को मिला जहां भारतीय किसान यूनियन की कार्यकारिणी गठित करने की जनसभा में जेजेपी से जुड़े रामकुमार चंदौली ने पार्टी को अलविदा कहकर किसानों को अपना समर्थन दिया. चंदौली ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह यह समझते थे कि जेजेपी पार्टी किसानों की हितैषी है लेकिन उन्होंने किसानों के लिए कुछ नहीं किया. इसी वजह से उन्होंने आज जेजेपी को अलविदा कहकर किसानों को अपना समर्थन दिया है. उन्होंने बताया कि उन्हें किसान सेल का महासचिव बनाया गया था लेकिन जब यह मैंने महसूस किया कि यहां किसानों की बात नहीं हो रही तो मुझे पार्टी छोड़ना ही ठीक लगा. किसानों ने जेजेपी छोड़ने वाले रामकुमार का स्वागत किया. बीकेयू जिलाध्यक्ष सुधीर जाखड़ ने कहा कि अब हर रोज़ लोग बीजेपी और जेजेपी छोड़कर किसान यूनियन में शामिल होंगे.

इस मौके पर बीजेपी जिलाध्यक्ष अर्चना गुप्ता भी किसानों के निशाने पर रहीं. किसानों ने अर्चना गुप्ता के अर्चना डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेन्टर का बहिष्कार करने का ऐलान किया.

आपको बता दें कि आज पानीपत टोल प्लाजा स्थित धरना केंद्र पर भारतीय किसान यूनियन ज़िला पानीपत की जनसभा का आयोजन किया गया था जिसमें जिलेभर से सैंकड़ो किसानों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया. बैठक की अध्यक्षता ज़िला प्रधान सुधीर जाखड़ ने की और प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान ने विशेष तौर पर शिरकत की. पानीपत जिले की सर्वसम्मति से जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई और जिले में किसान आंदोलन को मजबूत करने संबंधी फैसले लिए गए.

पानीपत टोल प्लाजा पर किसान आंदोलन के चलते धरने पर डटे किसान आंदोलन को मजबूत करने के लिए किसान फिर एकजुट हुए. पानीपत जिले की सर्वसम्मति से जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई और जिले में किसान आंदोलन को मजबूत करने संबंधी फैसले लिए गए. वंही पानीपत में आंदोलन व् संगठन को मजबूत करने के लिए पदाधिकारी नियुक्त किये गए हैं.