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जानिये कैसे, हरियाणा में कांग्रेस के मुकाबले BJP शासन में कमजोर हुआ RTI Act

News18 Haryana
Updated: January 19, 2020, 7:09 PM IST
जानिये कैसे, हरियाणा में कांग्रेस के मुकाबले BJP शासन में कमजोर हुआ RTI Act
आरटीआई के तहत सूचना नहीं देने के मामले में डिफॉल्टरों पर कुल 2.27 करोड़ रूपये की जुर्माना राशि बकाया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हरियाणा की भाजपा (BJP) सरकार के पांच वर्ष के शासन काल में कांग्रेस (Congress) शासन काल के मुकाबले आरटीआई कानून निरंतर कमजोर हुआ है. आरटीआई (RTI) के तहत सूचना नहीं देने के मामले में डिफॉल्टरों पर कुल 2.27 करोड़ रूपये की जुर्माना राशि बकाया है.

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पानीपत. भ्रष्टाचार (Corruption) पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली हरियाणा की भाजपा सरकार (Bjp government) के पांच वर्ष के शासन काल में कांग्रेस शासन काल के मुकाबले आरटीआई कानून (RTI Act) निरंतर कमजोर हुआ है. प्रदेश में जनसूचना अधिकारी पहले तो आरटीआई में सूचना नहीं देते हैं और जब राज्य सूचना आयोग इन पर जुर्माना लगाता है तो अधिकारी ठेंगा दिखाते हुए जुर्माना तक जमा नहीं कराते हैं. आरटीआई के तहत सूचना नहीं देने के मामले में डिफॉल्टरों पर कुल 2.27 करोड़ रूपये की जुर्माना राशि बकाया है. डिफॉल्टरों की संख्या 1726 है. सूचना आयोग के आदेशों के बावजूद जुर्माना जमा ना कराने वाले डिफॉल्टरों की सूची में कई एचसीएस व अन्य बड़े अधिकारी शामिल हैं.

3471 अपील केस सुनवाई के लिए लंबित

पिछले 14 वर्षों में आयोग में दर्ज कुल 77,342 अपील केसों में से 73, 871 केसों का निपटारा हुआ, जबकि 3471 अपील केस सुनवाई के लिए लंबित हैं. लम्बित केसों की संख्या में लगातार होती वृद्धि का खामियाजा सूचना लेने वाले आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है.

आरटीआई कार्यकर्ता ने राज्य सूचना आयोग से हासिल की जानकारी

आरटीआई एवं श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि उन्होंने गत 3 जनवरी को राज्य सूचना आयोग में आरटीआई लगाकर जुर्माना राशि जमा नहीं कराने वाले अधिकारियों की सूची और उनपर जुर्माने की राशि का ब्यौरा मांगा था. इस पर राज्य सूचना आयोग के अवर सचिव यज्ञ दत्त चुघ ने 10 जनवरी के पत्र द्वारा बताया कि सूचना आयोग के वर्ष 2006 में गठन से 31 दिसम्बर 2019 तक कुल 3,50,54,740 जुर्माना सूचना नहीं देने के दोषी 2974 अफसरों पर लगाया था. इसमें से मात्र 1,23,12,216 रूपये ही वसूल हुए हैं, जबकि 1726 डिफॉल्टर जनसूचना अधिकारियों ने कुल 2,27,42,524 की जुर्माना राशि जमा नहीं कराई.

कपूर ने कहा कि प्रदेश में आरटीआई कानून का भट्ठा बैठ चुका है. अधिकारी राज्य सूचना आयोग के आदेशों व आरटीआई एक्ट की परवाह नहीं करते हैं. उन्होंने डिफाल्टरों से जुर्माना राशि ब्याज सहित वसूल करने व आरटीआई एक्ट को सही ढंग से लागू करने की सरकार से मांग की है. जुर्माना की बकाया वसूली के लिए सूचना आयोग में जुर्माना वसूली (एन्फोर्समेंट) प्रकोष्ठ के तत्काल गठन की गंभीर आवश्यकता है. इसके इलावा लम्बित अपील केसों को विशेष अभियान चलाकर निपटाने की आवश्यकता है.

राज्य में कानून हुआ कमजोरतुलनात्मक स्थिति में जहां भाजपा शासन काल में डिफॉल्टर जन सूचना अधिकारियों का औसत 64 प्रतिशत रहा व जुर्माना राशि मात्र 28.62 प्रतिशत वसूली जा सकी. वहीं कांग्रेस शासन काल में सूचना ना देने के डिफॉल्टर जनसूचना अधिकारियों का औसत 46 प्रतिशत रहा व इनसे जुर्माना वसूली का औसत 72.15 प्रतिशत रहा. कुल बकाया जुर्माना राशि में से 85 प्रतिशत जुर्माना राशि भाजपा शासन काल की है.
जुर्माना नहीं जमा कराने वाले प्रमुख डिफॉल्टर अधिकारी

1. बिजेन्द्र हुड्डा तत्कालीन एसडीएम चरखी दादरी —50,000 रुपये

2. सतिन्द्र सिवाच एसडीएम अम्बाला —5,000 रुपये

3. प्रशांत इशकान एसडीएम बरवाला —75,00 रुपये

4. सतबीर सिंह झांगू, एसडीएम लोहारू —25,000 रुपये

5. कुमारी शालिनी चेतल सिटी मैजिस्ट्रेट हिसार —25,000 रुपये

6. वीएस मान एस.ई. यूएचबीवीएनएल पानीपत —12,500 रुपये

7. डा० सुमन दलाल चेयरपर्सन आईटीटीआर खानपुर कलां —60,000 रुपये

8. भारत भूषण गोगिया एस्टेट ऑफिसर हुडा गुरूग्राम —25,000 रुपये

9. अशोक छिक्कारा बीडीपीओ करनाल —50,000 रुपये

10. विकास सिंह तहसीलदार सोनीपत —50,000 रुपये

11. ईशम सिंह सूचना अधिकारी, नगर निगम गुरूग्राम — 65,000 रुपये

(पानीपत से सुमित भारद्वाज की रिपोर्ट)

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First published: January 19, 2020, 7:09 PM IST
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