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पानीपत : तीन साल से लघु सचिवालय के पास फ्लाइओवर के नीचे रह रहा है यह 'अदृश्य' परिवार

दिव्यांग बेटी और उसकी मां तीन साल से फ्लाइओवर के नीचे रह रही हैं.

यह मामला पानीपत जिले का है. ये मां-बेटी पिछले तीन साल से पानीपत के लघु सचिवालय के पास बने फ्लाईओवर के नीचे रह रही हैं. बेटी दिव्यांग है. वे बताती हैं कि उनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है.

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    सुमित भारद्वाज

    पानीपत. दिव्यांग बेटी (disabled daughter) और उसकी मां (Mother) पिछले 3 साल से एक फ्लाइओवर (flyover) के नीचे रह रही हैं, लेकिन आज तक किसी प्रशासनिक अधिकारी (administrative officer) या पुलिसवाले का ध्यान इनपर नहीं पड़ा. कोरोना संक्रमण (corona infection) की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के वक्त जब सबको अपने घर में रहने की हिदायत दी जा रही है, उस वक्त भी ये मां-बेटी फुटपाथ पर जीवन बसर कर रही हैं और इनसे इनकी हालत पूछने वाला कोई नहीं.

    यह मामला पानीपत जिले का है. ये मां-बेटी पिछले तीन साल से पानीपत के लघु सचिवालय के पास बने फ्लाईओवर के नीचे रह रही हैं. बेटी दिव्यांग है. वे बताती हैं कि उनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है. महिला का पति भी अब इस दुनिया में नहीं है और बेटा इनके साथ नहीं रहता. वे बताती हैं कि जो कोई कुछ भी दे देता है उसे ही खा-पीकर मां-बेटी का जीवन बसर हो रहा है. सरकार के बनाए रैनबसेरे भी इनकी पहुंच से दूर हैं.

    महिला ने अपना नाम कमला बताया. इस फ्लाइओवर के नीचे इनके सामान बिखरे पड़े हैं. फ्लाइओवर के नीचे टीन के दो बड़े बक्से नजर आते हैं. पूछने पर कमला कहती हैं कि हां, ये सामान उन्हीं के हैं. कमला बताती हैं कि उनके पति का देहांत हो चुका है. दिव्यांग बेटी का नाम संजू है, जिसकी शादी उन्होंने कर दी थी. संजू का पति मजदूरी करता है. फिलहाल उसके पास रोजगार नहीं है, जिसके चलते वह अपनी मां के साथ रहने को मजबूर है.

    बता दें कि इस परिवार का वोटर कार्ड भी बना हुआ है और ये वोट भी डालती हैं. लेकिन यहां से गुजरने वाले सांसदों, विधायकों का ध्यान कभी इस परिवार पर नहीं गया. दिन-रात शहर में गश्त करते पुलिसकर्मियों को फ्लाइओवर के नीचे बीते 3 साल से रह रहे ये लोग कभी नहीं दिखे. आप कह सकते हैं कि जिला प्रशासन और नेताओं को ऐसे लोग सिर्फ चुनाव के वक्त ही दिखते हैं, उसके बाद कभी नहीं.
    Published by:Anurag Anveshi
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