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पानीपत में फीस न चुकाने पर निजी अस्पताल ने मरीज को बनाया बंधक, सांसत में फंसी जान

पानीपत में इलाज की फीस नहीं चुकाने पर एक मरीज को बंधक बनाने का मामला सामने आया है.

पानीपत में इलाज की फीस नहीं चुकाने पर एक मरीज को बंधक बनाने का मामला सामने आया है.

Panipat News: पानीपत में एक निजी अस्पताल ने इलाज की फीस नहीं चुकाने पर एक मरीज को बंधक बना लिया, मरीज भाग न जाये, इसके लिये एक गार्ड का पहरा भी बैठाया गया. जब मामला ज्यादा उछला तो अस्पताल ने मरीज को दो दिन के बाद छोड़ दिया है.

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    सुमित भारद्वाज,
    पानीपत. हरियाणा के पानीपत में इलाज की फीस नहीं चुकाने पर एक मरीज को बंधक बनाने का मामला सामने आया है. यहां पर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अस्पताल में कराये गये टेस्ट की फीस का भुगतान नहीं करना एक मरीज को भारी पड़ गया. निजी अस्पताल ने पैसे नहीं चुकाने पर मरीज को बंधक बना लिया. मरीज अस्पताल से भाग न जाये, इसके लिये एक गार्ड का पहरा भी बिठाया गया, जो 24 घंटे से मरीज का पहरा दे रहा है. घटना की जानकारी तेजी से शहर में फैली और मामला ज्यादा उछलने लगा तो अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को छोड़ दिया, लेकिन दो दिन से बंधक बनाकर रखने और इतना कष्ट सहने के बाद मरीज द्वारा अस्पताल में करवाये गये टेस्ट की रिपोर्ट फिर भी अस्पताल ने नहीं सौंपी.

    करनाल निवासी 51 वर्षीय नीलकमल इलाज करवाने के लिए अस्पताल आया था, लेकिन इलाज मरीज के लिये समस्या बन गया. कैशलेश बीमा पॉलिसी के चलते नीलकमल के सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट करवाये गये, लेकिन बीमा कंपनी ने अस्पताल के पैसे चुकाने से मना कर दिया. अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच बेचारा नीलकमल बुरी तरह से फंस गया. अब पैसे ना चुकाए जाने पर अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को अस्पताल में बंधक बना लिया और मरीज भाग न जाये, इसलिए उस पर एक गार्ड का पहरा बिठा दिया.

    मामला उछलने पर अस्पताल ने मरीज को छोड़ा

    अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों से पैसे चुकाकर उसे ले जाने की बात कही. नीलकमल के बेटे मोहित का कहना है कि बीमा कंपनी का एजेंट फरार है और उनका फोन भी नहीं उठा रहा है. इसलिये हमें अस्पताल की फीस चुकाने में परेशानी आ रही है. वहीं अस्पताल के संचालक डॉ. अभिनव कहते हैं कि मरीज से अभी तक एक भी पैसा नहीं लिया गया, लेकिन बिना पैसों के वह अस्पताल का खर्चे कैसे पूरे करेंगे. गलती बीमा कंपनी की हो चाहे अस्पताल प्रबंधन की, लेकिन यातना तो मरीज को ही भुगतनी पड़ी. जब मामला मीडिया तक पहुंचा तो मरीज को जाने दिया गया, तब जाकर मरीज ने राहत की सांस ली.

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