Assembly Banner 2021

RTI से पानीपत क्लर्क भर्ती में घोटाले का हुआ पर्दाफाश, फर्जी प्रमाणपत्रों से हासिल की गई नौकरी

पानीपत के खाद्य आपूर्ति विभाग में हुई क्लर्कों की भर्ती में फर्जीबाड़ा हुआ है. ये नौकरियां फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर हासिल की गईं.

पानीपत के खाद्य आपूर्ति विभाग में हुई क्लर्कों की भर्ती में फर्जीबाड़ा हुआ है. ये नौकरियां फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर हासिल की गईं.

पानीपत के खाद्य आपूर्ति विभाग में हुई क्लर्कों की भर्ती में फर्जीबाड़ा हुआ है. ये नौकरियां फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर हासिल की गईं. ये खुलासा आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा मांगी गई सूचना में हुआ है.

  • Share this:
पानीपत. पानीपत (Panipat) में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी (Government Job) हासिल करने का मामला सामना आया है. ये खेल पानीपत के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (Food Supply Department) में हुआ है. एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने लेखा विभाग में दसवीं के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले शख्स का खुलासा किया है, लेकिन विभाग के अधिकारी इस मामले पर लीपापोती करते दिख रहे हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट ने सरकार से वर्ष 2013 में हुई 89 क्लर्क की भर्ती की जांच कर उसे रद्द करते हुए एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है.

सरकारी नौकरियों को हासिल करने के लिए लोगों में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा रहती है. शासकीय नौकरी में काम कम होने के साथ वेतन भत्तों और सुविधाओं के मोह के कारण व ढांचागत भ्रष्टाचार की वजह से ऊपरी कमाई के लालच में ज्यादातर लोग कोई भी तरीका अपनाकर सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं. इसलिए आम वर्ग के सपने को पूरा करने के लिए हर फील्ड में दलालों का बड़ा वर्ग सक्रिय है. जिसके, कारण आए दिन सरकारी भर्तियों में घोटाले सामने आते रहते हैं. ताजा मामला पानीपत के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने उजागर किया है.

आरटीआई एक्टिविस्ट यशपाल मलिक ने आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि 2013 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने 89 क्लर्क की भर्ती की थी. यह भर्तियां खाद्य आपूर्ति विभाग में की गईं थी. पानीपत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में नियुक्त राजवीर नामक व्यक्ति ने दसवीं के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर यह नौकरी हासिल की है. लेकिन जिस प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदक को पात्र माना गया वो प्रमाणपत्र ही फर्जी बताया गया. शिक्षा विभाग द्वारा दी गई सूचना ने इस बात पर मुहर लगाई है कि इस तरह का कोई प्रमाणपत्र ऐसे प्रारूप में नहीं जारी किया गया है. राज्य खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को भी इस संबंध में सूचित किया गया है.



वहीं, फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी हासिल करने वाला राजवीर इस समय खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के जिला कार्यालय में अकाउंट का काम देख रहा है. आरटीआई एक्टिविस्ट ने मांग की है कि इस तरह  फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले के हाथ में सरकारी खाते का लेन-देन कैसे दिया जा सकता है. विभाग उसे टर्मिनेट कर अब तक दिए गए वेतन की रिकवरी करें और साथ में नौकरी पाने में फर्जीवाड़ा करने की एफआईआर दर्ज की जाए.
उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है कि 2013 में हुई इस भर्ती घोटाले की जांच की जानी चाहिए. इसे रद्द कर इसकी उच्चस्तरीय जांच करा कर भर्ती में हुई धांधली में शामिल लोगों और उनके सहयोगियों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज करते हुए करवाई की जाए. (सुमित भारद्वाज की रिपोर्ट)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज