फर्जीवाड़ा ... सब्जी व पकौड़े बेचने वालों के नाम 33 और 55 करोड़ के टर्न ओवर वाली फर्म

पानीपत में पकड़े गए जीएसटी फर्जी बिलिंग मामले में दो फर्मों के मालिक करनाल के हैं. एक फर्म श्री साई ओवरसीज सुभाष सेठी के नाम से रजिस्टर्ड है. कंपनी की टर्नओवर 33 करोड़ है. कागजों में फर्म का मालिक सुभाष हैं, लेकिन वह हकीकत में फड़ी लगाकर सब्जी बेचते हैं.

Namandeep Singh | News18 Haryana
Updated: January 12, 2019, 10:41 PM IST
फर्जीवाड़ा ... सब्जी व पकौड़े बेचने वालों के नाम 33 और 55 करोड़ के टर्न ओवर वाली फर्म
पुरानी सब्जी मंडी में सुभाष उर्फ शंभू का सब्जी का फढ़, वैसे इनके नाम है 33 करोड़ की फर्म
Namandeep Singh | News18 Haryana
Updated: January 12, 2019, 10:41 PM IST
यह मामला ऐसे करोड़पति का है जिनका नाम जीएसटी के दस्तावेजों में करोड़पतियों के तौर पर है लेकिन हकीकत में वह पाई-पाई को मोहताज हैं. पानीपत में पकड़े गए जीएसटी फर्जी बिलिंग मामले में दो फर्मों के मालिक करनाल के हैं. एक फर्म श्री साई ओवरसीज सुभाष सेठी के नाम से रजिस्टर्ड है. कंपनी की टर्नओवर 33 करोड़  है. कागजों में फर्म का मालिक सुभाष हैं, लेकिन वह हकीकत में फड़ी लगाकर सब्जी बेचते हैं. वहीं दूसरी फर्म श्री बाला जी एंटरप्राइजिज कंपनी उसके दामाद बलविंद्र के नाम पर रजिस्टर्ड है, जो हकीकत में पकौड़ों की रेहड़ी लगाता है. कहने को बलविंद्र 50 करोड़ की कंपनी का मालिक है.

कागजों में 33 करोड़ की कंपनी का यह मालिक हकीकत में फड़ी पर हुई दो-चार सौ रुपये की आमदनी से परिवार का गुजारा कर रहा है. अर्जुन गेट की तंग गली में इनका एक छोटा सा मकान है जहां ये अपनी पत्नी रानी सेठी और एक बेटे कशिश के साथ रहता है.वहीं उनका दामाद बलविंद्र नेवल के पास शाम को पकौड़ों की स्टाल लगाता है ताकि किसी रूप से अपने घर क गुजरा वह कर सके, उसके नाम पचास करोड़ की फर्म है.

सुभाष के मुताबिक हुआ यूं कि सन अप्रैल 2016 में पुरानी सब्जी मंडी में लगने वाली फड़ियों और रेहड़ियों को नई सब्जी मंडी में शिफ्ट कर दिया गया. सुभाष उर्फ शंभू भी पुरानी सब्जी मंडी में फड़ी लगाता था. अब नई जगह पर मंडी लगने से उनका काम भी प्रभावित हो गया. घर का गुजारा चलाना भी मुश्किल हो गया. हालात में उलझे सुभाष ने बताया कि 3- 4 जुलाई 2017 में लोन दिलाने के नाम पर उनसे पड़ोस के रहने वाले महिंद्र बहल ने आईडी ली थी.



काम बढ़ाने के लिए मिलने वाले इस 50 हजार रुपये के ऋण में सिर्फ एक तिहाई पैसों का ही भुगतान करना था. इस लालच में आकर उन्होंने हां कर दी. उन्होंने बताया कि महिंद्र ने आईडी लेने के करीब 10 दिन बाद उन्हें पानीपत के एक होटल में बुलाया. वहां कई पेज पर उनके हस्ताक्षर कराए और फोटो भी लिए. यहां उन्हें यह कहा गया कि ऋण पानीपत में मिलना है. ऐसे ही उनके दामाद बलविंद्र के भी कागज जमा हुए थे.

सुभाष के मुताबिक़ उसे कई बैंको में घुमाया गया. जगह-जगह दस्तावेज प हस्ताक्षर कराए गए लेकिन हस्ताक्षर से पहले वह कागज पढ़ नहीं पाया. सुभाष का आरोप है कि उनकी और उनके दामाद बलविंद्र की आईडी को यूज करके ही ये फर्जी फर्म रजिस्टर्ड कराई गई जिनसे फर्जी बिलिंग हुई है. उनकी इतनी बड़ी फर्म होती तो सब्जी और पकौड़े बेचते. करीब 20 दिसंबर 2018 के दिन यानि ऋण के लिए आइडी जमा हुए16 माह के बाद दोपहर करीब ढाई बजे घर का दरवाजा खटका. पड़ोस से भी आवाज आई कि गली में डाकिया आया है. जब गली के बाहर किसी लड़के से पत्र पढ़कर समझाने को कहा तो उसकी बात सुनकर होश उड़ गए.

अगले दिन सुभाष, उनकी पत्नी रानी, बड़ी बेटी प्रिया और दामाद बलविंद्र स्टेट टैक्स के डिप्टी कमीश्नर कार्यालय पानीपत गए. यहां उन्हें पता चला कि उनके नाम पर बनी फर्जी कंपनी श्री साईं ओवरसीज 33 करोड़ रुपये की टर्नओवर है, वही उनके दामाद के नाम 50 करोड़ की टर्नओवर की कम्पनी खुली हुई है जिस का जीएसटी  टैक्स भरने का नोटिस जारी हुआ है. सुभाष ने बताया की उन्होंने महिंद्र के खिलाफ करनाल और पानीपत पुलिस, सीएम विंडो व जीएसटी के अधिकारियों को भी शिकायत की हुई है, जिसपर कारवाई होने की वह इंतजार कर रहा है.


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