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हरियाणा: ‘चिट्टा’ नहीं मिला तो 3 बच्चियों के नशेड़ी पिता ने खुद को गोली मार आत्महत्या कर ली

नशा न मिला तो खुद को मार ली गोली

नशा न मिला तो खुद को मार ली गोली

Suicide in Sirsa: खुद को गोली मार कर आत्महत्या करने वाले भूप सिंह को चिट्टे की लत थी. उसे यह नशा मिल नहीं पा रहा था, इसलिए बेचैनी, हताशा के शिकार भूप सिंह ने देसी कट्टे से गोली मार कर खुद की जान ले ली. मृतक के परिजनों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पड़ताल शुरू की.

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सिरसा. नशा किस कदर लोगों को अपना शिकार बना रहा है, उनकी जिंदगियां बर्बाद कर रहा है, इसकी बानगी हरियाणा जिले के सिरसा में देखने को मिली. यहां प्रीत नगर की गली नंबर 11 में रहने वाले भूप सिंह नामक व्यक्ति ने ‘चिट्टा’ न मिलने की सूरत में देसी कट्टे से खुद को गोली मार कर खुदकुशी कर ली. मृतक अपने ससुर के मकान में रहता था. उसकी पत्नी के बयान के आधार पर पुलिस मौका-मुआयना करते हुए जांच में जुटी है.

बता दें कि मृतक भूप सिंह के साले ने भी कुछ अरसा पहले आत्महत्या कर ली थी. उसकी मौत के बाद भूप सिंह ससुराल में ही रहने लगा था. मृतक के परिजनों का कहना है कि मृतक ‘चिट्टे’ का आदी था. ‘चिट्टा’ न मिलने के चलते उसने ऐसा कदम उठाया होगा. मृतक के ससुर ने बताया कि मृतक भूप सिंह चिट्टे का सेवन करता था. नशे की पूर्ति नहीं हो रही थी, इसके चलते यह कदम उठाया है. इस मामले में डीएसपी आर्यन चौधरी ने कहा कि भूप सिंह ने खुद को गोली मारी है. परिजनों ने भी यही बताया है. पुलिस इस मामले में जांच कर रही है.

मृतक भूप सिंह की हैं तीन बेटियां

मृतक के ससुर फतेह सिंह ने बताया कि सोमवार दोपहर के समय उसने देसी कट्टे से मकान के बरामदे में गोली मार ली. उसकी मौके पर ही मौत हो गई. फतेह सिंह ने बताया कि कुछ समय पहले ही उसके बेटे ने भी आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद दामाद भूप सिंह उसके पास आकर रहने लगा. भूप सिंह दड़बी गांव का रहने वाला था और अपने साले की मौत के बाद ससुराल में ही रहता था. नशे का आदी होने के कारण वह घर में भी मारपीट करता था. मृतक भूप सिंह की तीन बेटियां है.

आखिर क्या होता है ‘चिट्टा’

ड्रग्स में आजकल जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वह है ‘चिट्टा’. आखिर ये ‘चिट्टा’ है क्या और कैसे किसी को लत का शिकार बना लेता है. पंजाबी भाषा या बोलियों में ‘चिट्टा’ का मतलब होता है- सफेद. पंजाब, हरियाणा में हेरोइन को चिट्टा कहा जाता है. इस नशीले ड्रग को यह नाम उसके सफेद रंग के कारण मिला है. अब और भी कई सिंथेटिक ड्रग्स इस्तेमाल होने लगे हैं, जो देखने में सफेद ही होते हैं। इस कारण उन्हें भी चिट्टा ही कहा जाने लगा है. ये सिंथेटिक ड्रग्स हैं- MDMA, जिसे ecstasy भी कहा जाता है, LSD और मेथाम्फेटामीन.

सोने से ही महंगा बिकता है चिट्टा

बाजार में सोने की मौजूदा कीमत 48 हजार रुपए के आसपास प्रति 10 ग्राम है, लेकिन नशे के बाजार में यह चिट्टा 6 हजार रुपए प्रतिग्राम यानी 60 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम की दर से मिलता है. यह नशा पंजाब, हरियाणा के साथ-साथ हिमाचल में भी आसानी से मिल जाता है. एक ग्राम चिट्टा से नशे की 3-4 खुराक तैयार हो जाती है. 7-8 बार इसे लेने के बाद व्यक्ति इसका आदी हो जाता है. नशा न मिलने पर बेचैन हो जाता है. ऐसी स्थिति में किसी दूसरे को, खुद को नुकसान पहुंचाने के साथ खुदकुशी जैसा आत्मघाती कदम उठा भी सकता है. इसका नशा रीढ़ के साथ पूरे स्नायु तंत्र को सक्रिय कर देता है.

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