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प्रदेश भर में धूल खा रहे लाखों डैमेज ट्रांसफार्मर, विभाग नहीं ले रहा कोई सुध

प्रदेश भर में धूल खा रहे लाखों डैमेज ट्रांसफार्मर, विभाग नहीं ले रहा कोई सुध

हरियाणा प्रदेश के विधुत प्रसारण निगम की हायर परचेज कमेटी नए ट्रांसफार्मरों की खरीद करते समय यह ध्यान नहीं करती कि खरीदे जा रहे ट्रांसफार्मर उचित गुणवत्ता और मापदंड के हैं या नहीं. देखने में आता है कि कई बार तो नया ट्रांसफार्मर चालू करते ही ब्लास्ट हो जाता है क्योंकि इसके अंदर लगाई गई क्वाइलों की क्षमता निर्धारित क्षमता से कम होती है.

हरियाणा प्रदेश के विधुत प्रसारण निगम की हायर परचेज कमेटी नए ट्रांसफार्मरों की खरीद करते समय यह ध्यान नहीं करती कि खरीदे जा रहे ट्रांसफार्मर उचित गुणवत्ता और मापदंड के हैं या नहीं. देखने में आता है कि कई बार तो नया ट्रांसफार्मर चालू करते ही ब्लास्ट हो जाता है क्योंकि इसके अंदर लगाई गई क्वाइलों की क्षमता निर्धारित क्षमता से कम होती है.

हरियाणा प्रदेश के विधुत प्रसारण निगम की हायर परचेज कमेटी नए ट्रांसफार्मरों की खरीद करते समय यह ध्यान नहीं करती कि खरीदे जा रहे ट्रांसफार्मर उचित गुणवत्ता और मापदंड के हैं या नहीं. देखने में आता है कि कई बार तो नया ट्रांसफार्मर चालू करते ही ब्लास्ट हो जाता है क्योंकि इसके अंदर लगाई गई क्वाइलों की क्षमता निर्धारित क्षमता से कम होती है.

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हरियाणा प्रदेश के विधुत प्रसारण निगम की हायर परचेज कमेटी नए ट्रांसफार्मरों की खरीद करते समय यह ध्यान नहीं करती कि खरीदे जा रहे ट्रांसफार्मर उचित गुणवत्ता और मापदंड के हैं या नहीं. देखने में आता है कि कई बार तो नया ट्रांसफार्मर चालू करते ही ब्लास्ट हो जाता है क्योंकि इसके अंदर लगाई गई क्वाइलों की क्षमता निर्धारित क्षमता से कम होती है.

इससे यह स्पष्ट होता है कि हायर परचेज कमेटी कितनी ईमानदारी से अपना दायित्व निभाती है. एक अनुमान के अनुसार पूरे प्रदेश भर में लाखों ट्रांसफार्मर विभाग की अनदेखी के चलते खराब पड़े हैं. इन ट्रांसफार्मरों में से लगभग आधे ट्रांसफार्मर तो मिट्टी हो चुके हैं क्योंकि ट्रांसफार्मर खराब हो जाने के बाद उसे उसकी निर्धारित समय सीमा में ठीक करवाना किसी भी जिले के सर्कल अधिकारी अपनी तौहीन समझते हैं.

कुछ वर्ष पहले तो प्रत्येक सर्कल में इन ट्रांसफार्मरों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप खुली हुई थी, परंतु निगम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसे बंद करवा दिया गया।

अब फैक्ट्रियों व ट्यूबवेलों पर लगे हुए ट्रांसफार्मरों के जल जाने के बाद उत्तर प्रदेश में लेजाकर एक कंपनी से ठीक करवाकर लाया जाता है. इस मामले की अगर जांच करवाई जाए तो इसमें भी एक बड़ा घोटाला सामने आएगा. 25,63 और 100 के. वी के खरीदे गए ट्रांसफार्मरों में स्टेंडर्ड का सामान ना होने के कारण यह ट्रांसफार्मर कुछ ही समय में दम तोड़ जाते हैं और विभाग इन्हें ठीक करवाने की जगह नए ट्रांसफार्मर खरीद लेता है.

गर्मी का आगाज हो चूका है. हर बार की तरह इस बार भी लोगों को गर्मी में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि बिजली विभाग की अनदेखी के चलते जिले भर में हजारों ट्रांसफार्मर धूल खा रहे हैं , बिजली वितरण निगम नए ट्रांसफार्मर तो लगा रहे हैं लेकिन उसे पुराने ट्रांसफार्मर की सुध नहीं. जिस कारण निगम को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. कामकाज में लापरवाही व खुद के फायदे के लिए बिजली निगम के जेई खराब हो चुके ट्रांसफार्मरों को लावारिस हालत में छोड़ रहे हैं. ऐसे ही लावारिस पड़े रहने के बाद ट्रांसफार्मरों के पुर्जे निकलने शुरू हो जाते हैं और स्थानीय अधिकारी इस तरह की किसी भी गड़बड़ी से मना करते हैं.

तीन साल में निगम को हो चुका है 15 करोड़ से ज्यादा रुपए का नुकसान पानीपत सर्कल में इस समय करीब 5000 डैमेज ट्रांसफार्मर पड़े हैं. अकेले सर्कल कार्यालय की बात की जाए तो यहां पर ही करीब पांच सौ ट्रांसफार्मर बिखरे पड़े हैं और गलकर मिट्टी में मिल रहे हैं. थोड़ा मौका मिलते ही ऐसे ट्रांसफार्मरों के पार्ट्स चोरी हो जाते हैं. एक ट्रांसफार्मर की कीमत की बात की जाए तो यह पचास हजार रुपए तक होती है. इस तरह से तीन हजार ट्रांसफार्मरों की कीमत 15 करोड़ रुपए तक बनती है. इनमें से कुछ ट्रांसफार्मर तो ऐसे भी हैं जो रिपेयर हो सकते हैं, लेकिन इन्हें रिपेयर करने की तरफ भी कोई ध्यान नहीं देता.

ट्रांसफॉर्मरों के क्वायल हो रही चोरी : सर्कल कार्यालय में पड़े ट्रांसफार्मरों की कीमती क्वायल चोरी हो रही है. ज्यादातर ट्रांसफार्मरों की क्वाइल तो पूरी तरह से चोरी हो चुकी है. क्वायल चोरी होने के बाद ट्रांसफार्मरों के नाम पर उनके सिर्फ लोहे के खोल ही बचे पड़े हैं.

31 दिसंबर तक दिया गया था मौका
लंबे समय पहले डैमेज हो चुके ट्रांसफार्मरों को जमा कराने के लिए जेई को 31 दिसंबर तक का मौका दिया गया था. इस दौरान यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि ज्यादातर ट्रांसफार्मरों का तो पता ही नहीं है कि ये ट्रांसफार्मर किस जेई के रिकार्ड में हैं. तय सीमा के बाद कुछ समय और दिया गया था. इसके बाद भी इनका पता ही नहीं चल पाया था.जब इस बारे में पानीपत के विधुत प्रसारण निगम के सीनियर इंजिनियर ब्रह्मदत्त गर्ग से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने पानीपत में नई ज्वाइनिंग होने की बात कहते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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